Old Testament
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यशायाह 1 यशायाह 2 यशायाह 3 यशायाह 4 यशायाह 5 यशायाह 6 यशायाह 7 यशायाह 8 यशायाह 9 यशायाह 10 यशायाह 11 यशायाह 12 यशायाह 13 यशायाह 14 यशायाह 15 यशायाह 16 यशायाह 17 यशायाह 18 यशायाह 19 यशायाह 20 यशायाह 21 यशायाह 22 यशायाह 23 यशायाह 24 यशायाह 25 यशायाह 26 यशायाह 27 यशायाह 28 यशायाह 29 यशायाह 30 यशायाह 31 यशायाह 32 यशायाह 33 यशायाह 34 यशायाह 35 यशायाह 36 यशायाह 37 यशायाह 38 यशायाह 39 यशायाह 40 यशायाह 41 यशायाह 42 यशायाह 43 यशायाह 44 यशायाह 45 यशायाह 46 यशायाह 47 यशायाह 48 यशायाह 49 यशायाह 50 यशायाह 51 यशायाह 52 यशायाह 53 यशायाह 54 यशायाह 55 यशायाह 56 यशायाह 57 यशायाह 58 यशायाह 59 यशायाह 60 यशायाह 61 यशायाह 62 यशायाह 63 यशायाह 64 यशायाह 65 यशायाह 66



यशायाह 26:14 पर टिप्पणी – अर्थ का संक्षिप्त व्याख्यात्मक मार्ग
सीधे शब्दों में यह पंक्ति कहती है: वे मर गए हैं और फिर कभी जीवित नहीं होंगे; मरे हुए वे बहुत दिनों से हैं और अब वे फिर उठेंगे नहीं; तूने उनका विचार करके उन्हें नाश कर दिया ताकि वे फिर स्मरण में न आएँ। यह शब्दावली कई तरह से बोलती है: मृत्यु का स्थायित्व और फिरोयोग के भयभय से मुक्त होना। यह संदर्भ भविष्य के दिन के न्याय की प्रत्यक्ष अभिव्यक्ति है जब परमेश्वर के निर्णय से दुष्टों की चाल-चलन का अंत हो जाता है और उनका स्मरण भी मिट जाता है।
प्रसंगिक पृष्ठभूमि
यशायाह की पुस्तक में धर्मी-न्याय और परमेश्वर के शासन की आशा स्पष्ट है। इस verse में कड़ी मौत के बाद की स्थिति दिखती है—एक ऐसी स्थिति जिसमें दुष्ट राज्य और उनके विचारों का अंत हो जाता है, ताकि पृथ्वी पर उनके प्रभाव का कोई स्मृतिपत्र न बचे। यह भविष्यवाणी न सिर्फ दया और दंड का मेल है, बल्कि उस दिन की सुरक्षा है जब प्रभु न्याय करेंगे और सत्य के बिना रहने वालों को उनके स्थान पर छोड़ देंगे।
व्याख्यात्मक टिप्पणियाँ
मूल धारणा के साथ छोटे दृश्यात्मक विचार
अन्य उद्धरण-तुलन (क्रॉस-रेफरेंस) और संक्षिप्त व्याख्या
1) दनियाल 12:2—कहता है कि कुछ लोग जागेंगे, कुछ पन्नों में स्मरण होंगे; यह पंक्ति यशायाह के समान दिशा में बताती है कि कुछ लोग स्मृति में रहते हैं, जबकि दुष्ट पूरी तरह समाप्त हो जाते हैं।
2) प्रकाशितवाक्य 20:12—न्याय के दिन हर आचरण का लेखा-जोखा होगा; दुष्टों के अंत की दृष्टि इस भविष्यवाणी के समान है कि स्मृतियाँ समाप्त हो जाती हैं।
3) यशायाह 25:8—आखिरकार मृत्यु का शोक मिट जाएगा; यह पूर्वसूचना इस verse से सुदृढ़ होती है कि नाश के बाद भी परमेश्वर का राज स्थिर रहेगा।
चोटी का takeaway
यशायाह 26:14 यह दिखाता है कि परमेश्वर की न्याय योजना में दुष्टों के अंत के साथ स्मृतियों का नाश और प्रभाव का क्षय भी शामिल है, ताकि सत्य, धर्म और राज्यों में ईमानदारी की सत्ता अडिग रहे। यह हमें आश्वासन देता है कि अत्याचार के समय के बाद भी ईश्वर का संरक्षक शासन स्थिर रहता है और उनके भक्तों के लिए नया जीवन का अवसर खुलता है।
संक्षिप्त संरचना के साथ उद्धरण-आधार
Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke के सार्वजनिक-डोमेन टिप्पणियों से सार: यह verse न्याय के पूर्णता, दुष्टों के अंत तथा स्मृति के नाश की पुष्टि करता है। उदाहरण के लिए, Clarke के commentary से उद्धृत कहावतें नहीं दी जा रही; यहाँ छोटे-से संकेत के रूप में उनका दृष्टिकोण लिया गया है कि दुष्टों के लिए स्मरण न रहना परमेश्वर के न्याय का क्रम है।