अय्यूब 13:8 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

क्या तुम उसका पक्षपात करोगे? और परमेश्‍वर के लिये मुकद्दमा चलाओगे।

पिछला पद
« अय्यूब 13:7
अगला पद
अय्यूब 13:9 »

अय्यूब 13:8 पद-दर-पद बाइबल टीका

अय्यूब 13:8 – क्या तुम उसका पक्षपात करोगे? और परमेश्‍वर के लिये मुकद्दमा चलाओगे।

यह पाठ अय्यूब के पलायन-आरोपों के बीच एक नीतिगत प्रश्न प्रस्तुत करता है: क्या लोग परमेश्वर के विरुद्ध दलील देकर अपने अधिकार का प्रयोग कर सकते हैं? संदर्भ में अय्यूब इस थकान और पीड़ा से गुजर रहा है, और उसने अपने मित्रों के तर्कों के प्रत्यक्ष विपरीत एक सीधी याचना रखी है: परमेश्वर के विरुद्ध मुकद्दमा चला कर न जुटो, बल्कि उसकी निष्पक्षता और ज्ञान की मांग करो।

ईश्वर के बारे में जो पाठ दिखाता है

इस आयत के पीछे का विचार यह है कि परमेश्वर अयोग्य पक्षपात नहीं करता। अय्यूब यह संकेत देता है कि लोगों को ईश्वर के समक्ष तर्क करना चाहिए—परमेश्वर के विरुद्ध नहीं, बल्कि उसकी न्याय-योग्यता और सही-न्याय के मार्ग को समझना चाहिए। यद्यपि अय्यूब दुख के कारण घबराहट में है, फिर भी उसने एक नैतिक चेतावनी दी कि ईश्वर का मुकद्दमा अपने लाभ के लिए नहीं चलाना चाहिए।

प्रमुख शब्दों और चित्रों का स्पष्टीकरण

  • पक्षपात— किसी एक पक्ष के पक्ष में निष्पक्षता न रहते हुए विवेक पर आक्रमण करना, जो न्याय के खिलाफ है।
  • मुकद्दमा चलाना— तर्क करना या बहस करना, परन्तु न्याय के परिप्रेक्ष्य में; यहाँ परमेश्वर के लिए न्यायपूर्ण दृष्टिकोण ही उचित है।

सम्बन्धित आयतें (cross-references)

  • रोम 9:14–16 — परमेश्वर का दया देना और अधिकार की महत्त्वपूर्णता; न कि मनुष्य के विचारानुसार पक्ष-विरोध।
  • नीतिवचन 18:13 — उत्तर देने से पहले सतर्क होना, गलत निर्णय से बचना।
  • यशायाह 40:28–29 — परमेश्वर की अपरिमित समझ और उसकी शक्ति का स्थायित्व; वह भाग-दौड़ नहीं करता।

इन संदर्भों से स्पष्ट होता है कि ईश्वर की न्याय-नीति मानव-जनित तर्कों से ऊपर है, और हमें उसकी परवाह से सत्य को चुनना चाहिए, न कि अपने-अपने हितसिद्धांतों को प्रमुख बनाना चाहिए।

पुराने समय के कटाक्ष- टिप्पणियाँ (contextual insights)

Matthew Henry, Albert Barnes, और Adam Clarke के चर्चित विचारों के साथ यह पंक्ति एक नैतिक चेतना को पुकारती है: मनुष्य को परमेश्वर के न्याय-निर्णय के आगे अपनी दलील केवल विनम्रता और सत्य के साथ प्रस्तुत करनी चाहिए, न कि अपने पक्ष में पक्षपातपूर्ण दलीलें बनाने की कोशिश। Henry का सार यह है कि परमेश्वर समान रूप से देखता है; Barnes कहते हैं कि मानव अनुभव के सामने भी ईश्वर की गहराई समझ से आगे नहीं बढ़ता; Clarke indikates कि पीड़ा के समय भी ईश्वर की परिकल्पना में निष्कपटता होनी चाहिए। इन टिप्पणियों का एक सरल निष्कर्ष यह है कि विश्वासियों को पथ-भटकाव से बचकर सत्याप्राप्त न्याय की खोज करनी चाहिए, न कि आत्म-केंद्रित तर्कों से।

आज के लिए अनुप्रयोग

  • पीड़ित समय में भी अपने दिल को ईश्वर के प्रति साफ़ रखें; किसी भी तरह के पक्षपात से बचें।
  • ईश्वर के न्याय और गुणों पर विश्वास बनाये रखें, और अपने तर्कों को उसकी सूझ-बूझ के अनुरूप रखिए।
  • दूसरों के साथ संवाद में नम्रता बनाए रखें; तथ्य और आत्मा—दोनों को सही संतुलन दें।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

अय्यूब 13:8 समानांतर पद और संबंधित वचन

उन बाइबल पदों को देखें जो विषय, शिक्षा या संदर्भ के आधार पर इस अंश से जुड़े हैं। समानांतर पदों की तुलना करने से इस वचन के संदर्भ और संदेश को अधिक गहराई से समझने में सहायता मिलती है। किसी चित्र को चुनें और संबंधित पद, उसकी व्याख्या तथा पद-दर-पद बाइबल टीका देखें।

नीतिवचन 24:23 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
नीतिवचन 24:23 (HINIRV) »
बुद्धिमानों के वचन यह भी हैं। न्याय में पक्षपात करना, किसी भी रीति से अच्छा नहीं।

निर्गमन 23:2 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
निर्गमन 23:2 (HINIRV) »
बुराई करने के लिये न तो बहुतों के पीछे हो लेना; और न उनके पीछे फिरकर मुकदमें में न्याय बिगाड़ने को साक्षी देना;

लैव्यव्यवस्था 19:15 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
लैव्यव्यवस्था 19:15 (HINIRV) »
“न्याय में कुटिलता न करना; और न तो कंगाल का पक्ष करना और न बड़े मनुष्यों का मुँह देखा विचार करना; एक दूसरे का न्याय धर्म से करना।

HINIRV बाइबल की पुस्तक चुनें