Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
अय्यूब 1 अय्यूब 2 अय्यूब 3 अय्यूब 4 अय्यूब 5 अय्यूब 6 अय्यूब 7 अय्यूब 8 अय्यूब 9 अय्यूब 10 अय्यूब 11 अय्यूब 12 अय्यूब 13 अय्यूब 14 अय्यूब 15 अय्यूब 16 अय्यूब 17 अय्यूब 18 अय्यूब 19 अय्यूब 20 अय्यूब 21 अय्यूब 22 अय्यूब 23 अय्यूब 24 अय्यूब 25 अय्यूब 26 अय्यूब 27 अय्यूब 28 अय्यूब 29 अय्यूब 30 अय्यूब 31 अय्यूब 32 अय्यूब 33 अय्यूब 34 अय्यूब 35 अय्यूब 36 अय्यूब 37 अय्यूब 38 अय्यूब 39 अय्यूब 40 अय्यूब 41 अय्यूब 42Verse
अय्यूब 19:1 अय्यूब 19:2 अय्यूब 19:3 अय्यूब 19:4 अय्यूब 19:5 अय्यूब 19:6 अय्यूब 19:7 अय्यूब 19:8 अय्यूब 19:9 अय्यूब 19:10 अय्यूब 19:11 अय्यूब 19:12 अय्यूब 19:13 अय्यूब 19:14 अय्यूब 19:15 अय्यूब 19:16 अय्यूब 19:17 अय्यूब 19:18 अय्यूब 19:19 अय्यूब 19:20 अय्यूब 19:21 अय्यूब 19:22 अय्यूब 19:23 अय्यूब 19:24 अय्यूब 19:25 अय्यूब 19:26 अय्यूब 19:27 अय्यूब 19:28 अय्यूब 19:29



अय्यूब 19:13 का संदर्भ और संदर्भगत अर्थ
यह पद अय्यूब के दुःख और असहाय अवस्था के बीच है। मलबे में डूबते हुए अय्यूब बताता है कि ईश्वर ने उसके रिश्तेदारों और परिचितों के साथ उसकी दूरी बना दी है; वे लोग जो पहले उसे जानते थे और उसे प्यार करते थे, अब उसकी पहचान से अनजान और पराए की तरह व्यवहार करते हैं। यह अभिव्यक्ति उसकी पीड़ा की गहराई को दिखाती है—दोस्ती, गर्मजोशी और सामाजिक-समरूपता की कमी। नतीजतन अय्यूब अपने आघात का प्रवेश-मार्ग महसूस करता है, जैसे ही उसकी पहचानी गयी जगहें ध्वस्त हो रहीं हों।
मुख्य अर्थ
कथा यह है कि दुख के घेराव में सामाजिक संपर्क टूटना भी एक भारी पीड़ा है—जो बाहरी शारीरिक पीड़ा के साथ जुड़कर उसे और अधिक असहाय बनाता है। अय्यूब पूर्व के विश्वास को चुनौती देता है कि परमेश्वर उसकी व्यक्तिगत मसीहियत्व को नहीं पहचान रहा; साथ ही यह भी संकेत है कि उसकी सामाजिक पहचान भी उसके पक्ष में नहीं रही।
दो-तीन प्रमुख विषय
संदर्भ-योग्यछोटे उद्धरणीय संकेत
इस पंक्ति से जुड़ी भिन्न-भिन्न टिप्पणीकार धारणाएं यह संकेत देती हैं कि दुख के साथ सामाजिक अलगाव भी फिल्मों बनता है।
अनुशंसित क्रॉस-रेफरेंसेस और उनका संक्षेप
1) अन्य अनुभाग जहां मित्रों के साथ असहायता दर्शायी जाती है—यह बताता है कि Kis तरह से सामाजिक रिश्ते पीड़ा को बढ़ाते हैं।
2) विश्वास की परीक्षा पर भाष्य—क्योंकि अय्यूब का प्रश्न यह है कि क्या परमेश्वर अभी भी उसे पहचान रहा है।
3) अंततः प्रतिवेदक के रेफरेंस: मित्रों की असमर्थता और भगवान के न्याय के विचारों को मिलाकर, विश्वास की यात्रा में आशा की गूँज बनती है।
व्यावहारिक चिंतन
हमेशा याद रखें कि कठिन समय में भी सामाजिक रिश्तों की मौलिकता बनी रहे—परिजनों और मित्रों के साथ संवाद बनाए रखें, और अपनी आस्था को ईश्वर के सामने स्पष्ट रखें। अगर किसी के दुख का सामना करते समय हम उसकी पहचान और सम्मान को बनाए रखते हैं, तो वह आघात भी दुःख के साथ एक सकारात्मक मार्ग खोल सकता है।
संक्षिप्त समापन
अय्यूब 19:13 वह दृश्य है जिसमें दुख सामाजिक दूरी की चपेट में आ जाता है—एक ऐसे समय में जब उसका आत्म-विश्वास और आत्म-स्वीकृति भी साथ छोड़ देती है। यह न सिर्फ उसकी व्यक्तिगत पीड़ा है, बल्कि ऐसी पीड़ा है जो मानवीय रिश्तों की नाजुकता को उजागर करती है और हमें यह सिखाती है कि ईश्वर के साथ निष्ठा बनाए रखना, और दूसरों के साथ करुणा से व्यवहार करना कितनी आवश्यकता है।
क्रॉस-रेफरेंसेस (संक्षेप में)
-Psalm 69:20–21 के साथ पीड़ा और असहायता के अनुभवों का तालमेल; -Job 7:11-16 में आत्म-ग्रहण और आक्रोश की अनुभूति के विरोधाभास का संकेत; -I Peter 3:8-9 में भाइयों-बहनों के साथ सहानुभूति और धैर्य की ओर संकेत।
नोट: नीचे उद्धृत विशिष्ट पादर्व्यों के स्पष्ट शब्द-आकार नहीं दिए गए हैं, परन्तु उनके विचार इन पंक्तियों के भाव की ओर मार्गदर्शित करते हैं।
स्वीकारोक्ति: यह टिप्पणी Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के सार्वजनिक-डोमेन विचारों के सार को समेकित करते हुए तैयार की गई है; उनके अनुचित-उद्धरणों के लिए नीचे पंक्ति-உद्धरण के रूप में इंगित है जिनमें उनके ठीक-ठीक छोटे कथन उद्धृत हैं:
“…कष्ट के समय मित्र भी परिवर्तित होते हैं, पर ईश्वर के निकटता ही स्थिर रहती है।”