Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
अय्यूब 1 अय्यूब 2 अय्यूब 3 अय्यूब 4 अय्यूब 5 अय्यूब 6 अय्यूब 7 अय्यूब 8 अय्यूब 9 अय्यूब 10 अय्यूब 11 अय्यूब 12 अय्यूब 13 अय्यूब 14 अय्यूब 15 अय्यूब 16 अय्यूब 17 अय्यूब 18 अय्यूब 19 अय्यूब 20 अय्यूब 21 अय्यूब 22 अय्यूब 23 अय्यूब 24 अय्यूब 25 अय्यूब 26 अय्यूब 27 अय्यूब 28 अय्यूब 29 अय्यूब 30 अय्यूब 31 अय्यूब 32 अय्यूब 33 अय्यूब 34 अय्यूब 35 अय्यूब 36 अय्यूब 37 अय्यूब 38 अय्यूब 39 अय्यूब 40 अय्यूब 41 अय्यूब 42Verse
अय्यूब 21:1 अय्यूब 21:2 अय्यूब 21:3 अय्यूब 21:4 अय्यूब 21:5 अय्यूब 21:6 अय्यूब 21:7 अय्यूब 21:8 अय्यूब 21:9 अय्यूब 21:10 अय्यूब 21:11 अय्यूब 21:12 अय्यूब 21:13 अय्यूब 21:14 अय्यूब 21:15 अय्यूब 21:16 अय्यूब 21:17 अय्यूब 21:18 अय्यूब 21:19 अय्यूब 21:20 अय्यूब 21:21 अय्यूब 21:22 अय्यूब 21:23 अय्यूब 21:24 अय्यूब 21:25 अय्यूब 21:26 अय्यूब 21:27 अय्यूब 21:28 अय्यूब 21:29 अय्यूब 21:30 अय्यूब 21:31 अय्यूब 21:32 अय्यूब 21:33 अय्यूब 21:34



अय्यूब 21:27 का संदर्भ: संदर्शन तथा आध्यात्मिक गहराई
अध्याय 21 में अय्यूब अपने मित्रों के बेतरतीब तर्कों का प्रत्युत्तर देते हैं। वह प्रश्न उठाते हैं कि बद-भाग्य और सुख-समृद्धि के वितरण में ஜனरल नियम कौन-सा है, और क्यों कुछ लोग धन-यश में आनंदित रहते हैं जबकि दूसरे दुखी होते हैं। उसी पंक्ति में यह अनुभूति आती है कि लोगों के भाग्य पर केवल ईश्वर की योजना चलती है, और वह हर दशा में न्यायपूर्ण रहते हैं। नीचे दिए गए वचन (21:27) में कैद दृश्य यह संकेत देता है कि ईश्वर के विरुद्ध की गई चालें—जो न्याय के नाम पर भी की जाती हों—स्वतः उनके अपने ज्ञान और योजना की पुष्टि नहीं कर सकतीं।
यह वचन God के बारे में क्या बताता है
यह पंक्ति स्पष्ट करती है कि परमेश्वर सब कुछ जानते हैं—तुरंत और संपूर्ण रूप से। “देखो, मैं तुम्हारी कल्पनाएँ जानता हूँ” से संकेत मिलता है कि ईश्वर मानव की सूक्ष्म हरकतें, उनके मंसूबे और उनके मन की योजनाओं तक पहुँच में रहते हैं। साथ ही, “उन युक्तियों को भी” से यह प्रकट होता है कि भले ही लोग अन्याय के मार्ग से प्रश्न उठाने का प्रयास करें, ईश्वर उन चालों को भी जानते हैं जो उन्होंने अपने लाभ के लिए अपनाईं। यह विश्वास दिलाता है कि ईश्वर की निगरानी और न्याय की दृष्टि स्थाई है; वे हर योजना, हर चाल और हर परिणाम से अवगत हैं।
महत्त्वपूर्ण शब्द-चित्रों की स्पष्ट समझ
अनुच्छेद-घटक: संबंधित पवित्र पाठ
• प्रस्थान से एकงठित विचार मिलता है—आस्था के साथ यह विचार कि ईश्वर का न्याय प्रत्येक परिस्थिति में तटस्थ और सम्यक रहता है।
• अन्य संदर्भ जो इस विचार को पुष्ट करते हैं: कुछ सुसंवादक पाठ स्पष्ट करते हैं कि धन-सम्पदा या दुःख-तकलीफ किसी एक समीक्षा का संकेत नहीं, बल्कि परमेश्वर के पूर्ण ज्ञान और न्याय के भाग हैं (इब्रानी अध्याय के समान विचारों के पंछी)।
आज के संदर्भ में उपयोगी निष्कर्ष
1) आत्म-आलोचना और स्पष्टता: जब हम अपने या दूसरों के उद्देश्य और चाल के बारे में सुनते हैं, तो ईश्वर की व्यापक दृष्टि को याद रखें—क्योंकि वह हर योजना से अवगत है।
2) धैर्य और विश्वास: इस वचन से मिलता पाठ यह है कि विश्वास में हमें अपनी कल्पनाओं के तरकश में न डालकर ईश्वर के न्याय पर निर्भर रहना चाहिए, भले परिस्थितियाँ कैसी भी हों।
3) ज्ञान-आधारित चेतावनी: दूसरों की गलत योजनाओं के पीछे छुपे उद्देश्य को पहचानना मददगार है, परन्तु समान रूप से हमें संवेदनशील और नम्र रहना चाहिए, ताकि हम स्वयं भी अन्याय के रास्ते न चलें।
संक्षिप्त तुलना: ऐतिहासिक टीका-कार्य से निष्कर्ष
• Matthew Henry की शब्दावली में, यह बतला देता है कि परमेश्वर के ज्ञान के सामने मानव चालें छोटी पड़ जाती हैं; मानव की योजनाएं उनके ज्ञान में हैं और उनके न्याय से बच नहीं सकतीं।
• Albert Barnes यह संकेत करते हैं कि सत्य यह है कि ईश्वर हर विचार और योजना को जानता है; इसलिए मनुष्य को अपने मार्गों में सावधानी बरतनी चाहिए और प्रतिद्वंद्वी की चालों के पीछे न पड़कर ईश्वर के प्रति विश्वास बनाए रखना चाहिए।
• Adam Clarke बताते हैं कि इस प्रकार का वाक्य मानव-न्याय से अधिक ईश्वर के न्याय पर केन्द्रित है—क्योंकि न केवल व्यवहारिक चालें, बल्कि विचार भी उसी की निगरानी में रहते हैं।
नोट: यदि आप चाहें तो इस पाठ के लिए मैं Matthew Henry के छोटे उद्धरण (जहाँ उपलब्ध हों) और Barnes/Clarke के छोटे-छोटे स्पष्ट कथन यहां संक्षेप में उद्धृत कर सकता हूँ।