अय्यूब 21:7 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

क्या कारण है कि दुष्ट लोग जीवित रहते हैं, वरन् बूढ़े भी हो जाते, और उनका धन बढ़ता जाता है? (अय्यू. 12:6)

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अय्यूब 21:7 पद-दर-पद बाइबल टीका

पाठ के लिए सहज परिचय

अय्यूब 21 में मित्रों के सवालों के बीच दुष्टों की स्थिर सफलता की वास्तविकता पर गहराई से विचार है। इस अध्याय में राहत-स्वर को छोड़कर भीषण प्रश्न उभरते हैं: क्यों दुष्ट लोग जीवन भर सुखी रहते हैं, बूढ़े होते हैं, उनका धन बढ़ता है, जबकि दूसरों के लिए कष्ट बना रहता है? यह उद्धार का संकेत नहीं है कि संसार में सब कुछ समान है; बल्कि कथा बताती है कि जीवन की दृष्टि के भीतर परमेश्वर की न्याय-गति अपनी गति से चलती है।

पद का एक-एक कर विश्लेषण

अय्यूब 21:7 - क्या कारण है कि दुष्ट लोग जीवित रहते हैं, वरन् बूढ़े भी हो जाते, और उनका धन बढ़ता जाता है?

यह पंक्ति जीवन-स्थिति के ठंडे तर्क से उठती है: परोपकारी यह मानते हैं कि दुष्टों की असफलता अवश्य होगी, परन्तु वास्तविकता कुछ और कहती है। अय्यूब ने अपने दोस्ती के तर्कों के विरुद्ध, दुष्टों की प्रतीत हो रही सफलता को देख कर यह प्रश्न उठाया है: क्या इन घटनाओं के पीछे एक सम्यक न्याय नहीं है?

मुख्य आध्यात्मिक पाठ

  • न्याय का बाह्य प्रदर्शन कभी आंतरिक न्याय की गारंटी नहीं देता। दुष्टों के सुख-दुख उनके अंतर्देशीय ईश्वर-सम्पर्क से स्वतंत्र नहीं होते।
  • जीवन के समय पर परीक्षित अनुभव यह सिखाता है कि परमेश्वर की योजना समय-सारिणी पर चलती है, और उसकी राह से हम पूर्ण निर्णय नहीं कर सकते।

अनुकृति: पवित्र ग्रंथों के संगठित सार

यह पाठ अय्यूत के प्रश्न-युग में न्याय की जटिलता को सामने रखता है। अन्य बाइबिल पाठ जैसे कि भजन 73, ईश्वर के सामने उनकी दृष्टि परिवर्तन का मुद्दा उठाते हैं—क्यों कुछ लोग समय के साथ द्याप्त लाभ लेते हैं जबकि अलग-थलग अनुभव करते हैं। भीतरी संदेश यही है: सांसारिक सुख-समृद्धि हमेशा परमेश्वर की मंज़ूरी का संकेत नहीं होती; आस्था को परमेश्वर की न्याय-योजना के साथ संयत रखना चाहिए।

कथा के साथ समायोजन: जीवन में क्यों करें विश्लेषण?

- मानवीय अनुभव से उत्पन्न यह प्रश्न हमें यह सिखाता है कि गूढ़ नियम केवल बाहरी घटनाओं से नहीं समझे जाते।

- परमेश्वर का न्याय समय-सारिणी पर चलता है; हमारा दायित्व उसे मानना और सत्य में टिके रहना है।

सूत्र-सम्पादन और विश्लेषणात्मक क्रॉस-रेफरेंसे

क्रॉस-रेफरेंसे—

  • भजन 37:1-2: दुष्टों की दिखावे की सफलता पर धैर्य बनाए रखना; परमेश्वर की न्याय-योजना पर अधिक भरोसा करना।
  • यशाय 55:8-9: परमेश्वर की विचार-योजना मनुष्य के विचारों से भिन्न होती है।
  • रोम 12:19: माँगने के बजाय प्रभु को छोड़ना नहीं, परन्तु उन्हें न्याय करने देना।

संक्षेप में, इन संदर्भों से यह स्पष्ट होता है कि सांसारिक लाभ-हानि से परमेश्वर की न्याय-गति की पूर्णता नहीं मापा जा सकती। हमें विश्वास के साथ उसकी योजनाओं पर टिके रहना चाहिए।

व्यावहारिक आवेदन

  • जब दुष्टों के अनुसार संसार चलता दिखाई दे, तब भी आत्मा को स्थिर रखें: परमेश्वर की पवित्र योजना समय-समय पर स्पष्ट होती है।
  • अपमानित न हों; क्योंकि जीवन के अनुभव सीख देते हैं कि ईश्वर अपने समय पर न्याय करता है और हमारी पृष्ठभूमि में वाणी चलती है।

संक्षेप

अय्यूब 21:7 हमें याद दिलाता है कि संसार में होने वाले सुख-दुःख सभी एक समान न्याय के संकेत नहीं होते। दुष्टों की अस्थिर सफलता एक चेतावनी है कि हमें बाहरी घटनाओं से न्याय का निष्कर्ष नहीं निकालना चाहिए। परमेश्वर की न्याय-योजना समय के भीतर काम करती है; हमारा कर्तव्य है धैर्यपूर्वक उसे मानना और विश्वास के साथ चलते रहना।

याद रखने योग्य बातें

1) बाहरी लाभ से आंतरिक विश्वास न टूटे। 2) न्याय की पूर्णता का सत्य समय पर प्रकट होता है। 3) प्रभु के मार्ग पर टिके रहकर आशीष पाई जा सकती है।

नोट: नीचे दिए गए उद्धरणों में Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के सीधे शब्दों के संक्षिप्त संकेत हैं, यदि उपलब्ध हों—

उद्धरण-नोट: Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke के संक्षेप उद्धरणों के हिसाब से, उनके पंक्तिबद्ध विवेचन में दुष्टों की सफलता के विरुद्ध धैर्य और परमेश्वर की न्याय-गति पर भरोसा बनाए रखने की सीख मिलती है।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

अय्यूब 21:7 समानांतर पद और संबंधित वचन

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