Old Testament
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अय्यूब 22:18 के सन्दर्भ में अर्थ
इस पद का सरल अर्थ है: जो कुछ भी दुष्टों ने किया, भले ही वे भरे-पूरे बन गए हों, परन्तु उन की योजना और विचार ईश्वर से दूर रहते हैं। यहाँ व्याख्या यह है कि परमेश्वर उन लोगों के घर-आँगन को अच्छी चीजों से भरने का प्रत्यक्ष अभिषेक दिखाते हैं, पर दुष्ट लोगों के मन में मंशा और उद्देश्य एक भ्रमित दूरी पर रहते हैं।
पृष्ठभूमि
अय्यूब की कठिनाई की कथा में यह भाग उन वक्तों को दर्शाता है जब उसके मित्रों ने धर्म-कथन कर यह कहा कि सफलता-सम्पन्न जीवन का आधार पाप पर है। निष्कर्ष यह कि भोग-विलास और समृद्धि से दुष्टता सिद्ध नहीं होती; बल्कि मानव के दिल की स्थिति और परमेश्वर के न्याय के बीच एक गहरी दूरी होती है।
व्याख्या के मुख्य बिंदु
थीमैटिक सार
अन्य पवित्र प्रवचनों के संबंध
1) पूर्वी साक्ष्यों में आयतें जो यह शिक्षा जोड़ते हैं कि परमेश्वर का न्याय निरीक्षणयोग्य है और बाह्य सुख से आंतरिक सत्य का मूल्य बदल नहीं सकता।
2) कुछ अन्य ग्रन्थों में यह स्पष्ट होता है कि सम्पन्नता का मोहित प्रभाव व्यक्ति को पथभ्रष्ट कर सकता है, इसलिए सतर्क रहने की आवश्यकता है।
3) नैतिक विवेक और ईश्वरीय चर्या के साथ आंतरिक परिवर्तन ही सच Prayउन्नति बनाते हैं।
संक्षिप्त व्यावहारिक निष्कर्ष
अगर आप समृद्धि के बीच हैं, तो अपने दिल की दिशा पर निगाह रखें—क्या आपका विवेक ईश्वर के निर्देशों के अनुसार है? दया, सत्य, और नम्रता को अपने दैनिक व्यवहार में बनाए रखें। बाहरी सुख के पीछे न भागें; आंतरिक परिवर्तन और ईश्वरीय स्रोत से जीवन के मूल्य को पहचानें।
क्रॉस-रेफरेंसेस और उनका संक्षेप लिंक
सूचि में दिए गए बिंदु हल्के-फुल्के नहीं हैं; वे हमारी धारणा को निर्देशित करते हैं कि आस्तिक जीवन में आंतरिक धार्मिकता बाहरी संपदा से अधिक महत्वपूर्ण है।
उद्धरण के लिए नोट: इस हितार्थ में Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke के सार्वजनिक-डोमेन टिप्पणीकारों के सीधे संक्षिप्त विचारों का उपयोग किया गया है। नीचे उनके विशिष्ट शब्दों के छोटे उद्धरण दिए जा सकते हैं, यदि उपलब्ध हों:
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