अय्यूब 22:23 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

यदि तू सर्वशक्तिमान की ओर फिरके समीप जाए, और अपने डेरे से कुटिल काम दूर करे, तो तू बन जाएगा।

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अय्यूब 22:23 पद-दर-पद बाइबल टीका

अय्यूब 22:23 पर चर्चा का तुरंत संदर्भ

पద్య का संदर्भ अय्यूब की बातचीत के दौरान न्याय और रीति-नीति की कसौटी के बारे में है। यदि कोई व्यक्ति परमशक्तिमान की ओर फिरे और अपने दुष्कर्मों से दूरी बनाए, तब वह जीवन-मार्ग में लौट सकता है और अनुभव कर सकता है कि ईश्वरीय वरदान उस पर खुलते हैं। यह संदेश धार्मिक-नैतिक पटरी के पुनर्संचार का है: गलतियों की दिशा से पलटकर ईश्वर की दिशा में लौटना जीवन की नई दिशा खोलता है।

पारगमन में ईश्वर की भूमिका और विश्वास की दृष्टि

यह पद दर्शाता है कि परमशक्तिमान के समीप आना, और दुष्कारिणी चालों को त्यागना, ईश्वर के साथ पुनः संबद्ध होने का मार्ग है। विश्वास में यह स्पष्ट किया गया है कि ईश्वर निकट रहता है जब मनुष्य अपने पापकर्म को छोड़कर नैतिक सत्य की ओर कदम बढ़ाता है। जहां नैतिक प्रवेश है, वहीं आशीष और सुरक्षा की अनुभूति मिलती है।

शब्दों और प्रतीकों की व्याख्या

- सर्वशक्तिमान (सर्वशक्तिमान): वह परम सत्ता है जो सभी चीजों की व्यवस्था और न्याय करता है; उसके निकट आना विश्वास की वापसी और संकट-घड़ी से निकलने की आशा है।

- अपने डेरे से कुटिल काम दूर करे: अपने आचरण में छिपे पाप-कार्य, छल-व्यवहार और दुष्कर्मों से दूरी बनाना; यह आंतरिक परिवर्तन की पहली चाबी है।

अन्य संदर्भ—क्वार्टर से सम्बद्ध पाठ

- नीतिमाला और उपदेशक के संदेश जो कहते हैं कि ईश्वर के साथ सत्यपूर्ण संबंध तब बनते हैं जब मनुष्य पाप छोड़कर आशीर्वाद की ओर लौटता है।

- उद्धारकर्ता के द्वारा उद्धार की दिशा में यात्रा में आत्म-स्वीकृति और पश्चात्ताप का महत्व।

क्यों और क्या सिखाता है यह पाठ आज?

1) आत्म-चेतना और पश्चात्ताप: यदि आप अपने आचरण में भ्रष्टाचार छोड़ दें और ईश्वर की ओर लौटें, तो फिर ईश्वर की करुणा और आशीष मिलना संभव है।

2) पथ-परिवर्तन की चाह: संकट के समय में भी एक सचेत निर्णय—सच्चाई और ईमानदारी के मार्ग पर वापस आना—जीवन के लाभ के द्वार खोलता है।

3) समुदायिक जीवन में नई समर्पण: विवेकपूर्ण आचरण से परिवार और समुदाय में विश्वास-व्यवस्था पुनः स्थापित होती है।

2–3 cross-reference (संक्षेप में)

  • याकूब 4:8 — ईश्वर के समीप आने के लिए आचरणिक पवित्रता और पश्चात्ताप की आवश्यकता पर बल देता है।
  • नीतिवचन 16:6 — दया और सत्य से पाप दूर होता है; ईश्वर के भय में रहने से पथ स्पष्ट होता है।
  • रोमियों 12:2 — पुरानी रीति-नीति से नहीं बल्कि मन बदले जाने पर नया जीवन संभव है।

समापन सार

यह पाठ हमें स्मरण कराता है कि ईश्वर के निकट लौटने का मार्ग पाप छोड़कर सत्य की राह पर चलना है। जब हम अपने डेरे के कुटिल कर्म छोड़कर ईश्वर की इच्छा की ओर मुड़ते हैं, तब ईश्वर हमारी दिशा को bless कर सकता है और नए जीवन की राह खोल सकता है। यह संदेश आज भी ताजा है—विश्वास, पश्चात्ताप और परिवर्तन के साथ परमेश्वर के पास लौटना ही जीवन की वास्तविक सुरक्षा है।

याद रहे: उपलब्ध स्वीकृत उद्धरण-रेफरेंसेस में Matthew Henry, Albert Barnes या Adam Clarke के शाब्दिक उद्धरण स्पष्ट रूप से संकेत किए गए हों तो ही उद्धरण-टुकड़े प्रस्तुत किए जाएंगे।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

अय्यूब 22:23 समानांतर पद और संबंधित वचन

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इसलिए तू इन लोगों से कह, सेनाओं का यहोवा यह कहता है: तुम मेरी ओर फिरो, सेनाओं के यहोवा की यही वाणी है, तब मैं तुम्हारी ओर फिरूँगा, सेनाओं के यहोवा का यही वचन है। (याकू. 4:8, होशे 6:1)

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“यदि तू अपना मन शुद्ध करे*, और परमेश्‍वर की ओर अपने हाथ फैलाए,

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तो भी यदि तू आप परमेश्‍वर को यत्न से ढूँढ़ता, और सर्वशक्तिमान से गिड़गिड़ाकर विनती करता,

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