Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
अय्यूब 1 अय्यूब 2 अय्यूब 3 अय्यूब 4 अय्यूब 5 अय्यूब 6 अय्यूब 7 अय्यूब 8 अय्यूब 9 अय्यूब 10 अय्यूब 11 अय्यूब 12 अय्यूब 13 अय्यूब 14 अय्यूब 15 अय्यूब 16 अय्यूब 17 अय्यूब 18 अय्यूब 19 अय्यूब 20 अय्यूब 21 अय्यूब 22 अय्यूब 23 अय्यूब 24 अय्यूब 25 अय्यूब 26 अय्यूब 27 अय्यूब 28 अय्यूब 29 अय्यूब 30 अय्यूब 31 अय्यूब 32 अय्यूब 33 अय्यूब 34 अय्यूब 35 अय्यूब 36 अय्यूब 37 अय्यूब 38 अय्यूब 39 अय्यूब 40 अय्यूब 41 अय्यूब 42



पद का तात्पर्य और उसका संदर्भ
अय्यूब 26:10 में यह बतलाया गया है कि परमेश्वर उजियाले और अंधियारे के बीच जहाँ एक सीमा है, वहाँ जलनिधि (जलधि) की सीमा भी निर्धारित कर देता है। यह दृश्यात्य四不像 चित्र है, जो ब्रह्मांड की व्यवस्था और परमेश्वर की सत्ता पर प्रकाश डालता है। यह पाठ अय्यूब के मौन गहरे दुख के बीच ईश्वर के विशाल प्रशासन की याद दिलाता है—कुछ भी अनियमित नहीं, बल्कि हर चीज के पीछे उसकी योजना और नियंत्रण है।
ईश्वर या विश्वास के बारे में पाठ से जो सीख मिलती है
यह छवि बताती है कि प्रभु सब कुछ की सीमा तय करता है—प्रकाश और अंधकार, जीवन और मृत्यु, और सभी प्राकृतिक नियम उनके आदेश के अधीन हैं। यह विश्वास को आश्वस्त करता है कि अंधकार में भी परमेश्वर की विश्वसनीयता और κραंत रचना नहीं टूटती।
शब्दों और छवि की स्पष्टीकरण
अन्य प्रासंगिक बाइबल पद
1) पलों के भ्रम में भी परमेश्वर की रचना-संरचना अदृष्ट नहीं होती; वह सभी चीजों के साथ चलने योग्य सीमा निर्धारित करता है।
2) परमेश्वर का शासन अंधकार को भी निकाल देता है और प्रकाश से मार्ग दिखाता है—यह गहरी दिव्य शासन की पुष्टि है।
3) जीवन के कठिन समय में भी, प्रभु की योजना स्थिर और निष्कपट रहती है; वह सही समय पर मार्ग दिखाते हैं।
2–3 क्रॉस-रेफरेंसेस और उनका छोटा स्पष्टीकरण
• תהक प्रकाश और अंधकार के बीच संरचना का चित्र मालूम करता है: जब सृष्टिकर्ता हर चीज़ के बजाय, क्रम और सीमा तय करता है।
• कुछ अन्य संदर्भ जो सीमा और नियंत्रण की बात करते हैं—ध्यान दें कि वे परमेश्वर के शासन की पुष्टि करते हैं कि कुछ भी अनियमित नहीं है।
आज के समय में इसे कैसे समझें?
हमारे दैनिक जीवन में अंधकार अक्सर भय और अनिश्चितता लाते हैं। इस पद से सीख यह है कि परमेश्वर की सीमा और प्रकाश दोनों एक साथ रहते हैं—वह अंधकार में भी रास्ता दिखाते हैं और उजाले में भी सुरक्षा बनाए रखते हैं। कठिन क्षणों में भी हम यह विश्वास रख सकते हैं कि हर स्थिति में परमेश्वर की योजना काम कर रही है, और उसका प्रकाश हमारी भूमिका और दिशा तय करता है।
सार-संयोजन
यह श्लोक अय्यूब के दुख के बीच हमें यह याद दिलाता है कि परमेश्वर सब कुछ का निर्माता और नियंत्रक है। उजाला और अंधकार—दोनों उसकी व्यवस्था में एक साथ सुरक्षित रूप से चलते हैं। इस संदेश से प्रेरित होकर हम विश्वास, धैर्य और विनम्र प्राथना में स्थिर रहते हैं, यह जानते हुए कि परमेश्वर की सीमा उचित और उद्धारकारी है.
नोट: नीचे उद्धृत कुछ पुराने पन्नों से ली गई संक्षिप्त बातों के अनुसार, Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke से संभव स्वरूप की संक्षिप्त पंक्तियाँ संदर्भित हैं (सिर्फ सपष्ट उद्धरण के लिए):
• “The morning light shall break forth” (Henry/Clark संबद्ध सार) — यह संकेत देता है कि परमेश्वर अंधकार के बाद उजाला लाते हैं।
• “God hath fixed a compass for every sea” (Barnes संबन्धित रूप) — परमेश्वर ने जलनिधि के जैसी गहरी जलराशियों के लिए भी एक सीमा निर्धारित की है।