Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
अय्यूब 1 अय्यूब 2 अय्यूब 3 अय्यूब 4 अय्यूब 5 अय्यूब 6 अय्यूब 7 अय्यूब 8 अय्यूब 9 अय्यूब 10 अय्यूब 11 अय्यूब 12 अय्यूब 13 अय्यूब 14 अय्यूब 15 अय्यूब 16 अय्यूब 17 अय्यूब 18 अय्यूब 19 अय्यूब 20 अय्यूब 21 अय्यूब 22 अय्यूब 23 अय्यूब 24 अय्यूब 25 अय्यूब 26 अय्यूब 27 अय्यूब 28 अय्यूब 29 अय्यूब 30 अय्यूब 31 अय्यूब 32 अय्यूब 33 अय्यूब 34 अय्यूब 35 अय्यूब 36 अय्यूब 37 अय्यूब 38 अय्यूब 39 अय्यूब 40 अय्यूब 41 अय्यूब 42



अय्यूब 26:6— अधोलोक उसके सामने उघड़ा रहता है, और विनाश का स्थान ढँप नहीं सकता।
मुख्य interpretive point : यह पद अशेष निर्भय विश्वास की भाषा है कि परमेश्वर के ज्ञान-नज़र के सामने मृत्यु-खाई भी अनछिपी नहीं रह सकती; अलौकिक सत्ता के सामने हर गुमनाम भय और माया का अंत है। अय्यूब की दार्शनिक व्यथा में यह प्रकट होता है कि जीवन के रहस्यों को स्थाई रूप से समझना संभव नहीं, पर परमेश्वर की सत्ता सब कुछ प्रकट कर देती है।
संदर्भ-संदर्भ-विकास (लिटरेरी संदर्भ)
यह उद्धरण स्थूल रूप से दिन के अंधकार-निर्णय से परे एक अजेय नियंत्रण को दर्शाता है: नीचे के स्थान (घोर गम्भीरी) के विरुद्ध परमेश्वर की सत्ता। भजन 139:8-11 और नीति 15:11 तथा इब्र 4:13 के संदर्भ में कहा गया है कि परमेश्वर हर चीज से परे है और मन-चेतना की गहराईयों तक पहुँचता है। इस क्रम में अय्यूब के परीक्षणों पर एक ठोस, दार्शनिक उत्तर निकलता है: भक्ति-आस्था स्वयं को इस अनिश्चितता के बीच सुरक्षित रखती है, जब तक कि परमेश्वर के उद्देश्य प्रकाषमान न हों।
धर्मवैज्ञानिक महत्त्व ( Theology )
— परमेश्वर की न्याय-पराकाष्ठा सभी गहराइयों से ऊपर है; न कोई स्थान, न कोई स्थिति जो उसे छिपे।
— विपत्ति के समय भी उसकी योजना और सच्चाई प्रकट रहती है; अय्यूब के विरुद्ध केन्द्रित तर्कों में यह उत्तर है कि दुख के अर्थ को समझना मनुष्य के वश में नहीं, पर ईश्वर की विशेषज्ञता विश्व-सत्ता का परिचायक है।
क्विक cross-references (संक्षिप्त समझ के साथ)
जीवंत प्रश्न (Reflection)
संक्षिप्त निष्कर्ष
अय्यूब 26:6 सूचित करता है कि परमेश्वर ही वह है जो हर गहराई, हर स्थान और हर गुप्त व्यवस्था को उजागर कर देता है। इस वाक्य से हमारी आत्मा को धैर्य मिलता है: भय या अज्ञानता के बावजूद ईश्वर की सत्ता अटल है, और उसकी मार्गदर्शिका में ही हमारी सच्ची सुरक्षा है। यह पाठ हमें यह याद दिलाता है कि जीवन के कठिन प्रश्नों के उत्तर पूरी तरह समझ में न आएँ भी, परमेश्वर की चेतना से वे सब कुछ समझ में आने लगते हैं।
पहली पंक्तियों से निकले संभावित उद्धरण (ड्राफ्ट): “ अधोलोक उसके सामने उघड़ा रहता है, और विनाश का स्थान ढँप नहीं सकता।”