अय्यूब 3:21 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

वे मृत्यु की बाट जोहते हैं पर वह आती नहीं; और गड़े हुए धन से अधिक उसकी खोज करते हैं; (प्रका. 9:6)

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अय्यूब 3:21 पद-दर-पद बाइबल टीका

अय्यूब 3:21 का अर्थ और संदर्भ

सीधी भाषा में कहा जाए तो यह पद वे लोग के लिए है जो जीवन की दुखद देहलीज़ पर बैठते हैं और मौत-स्वर नहीं सुनते; वे मृत्यु की प्रतीक्षा करते हैं पर वह आ नहीं पाती; उनके लिए धन-दौलत ही सब कुछ बन जाती है, पर वह भी अंततः खो जाती है। यह संदेश जीवन की गहन पीड़ा और परमेश्वर की योजना के बीच के विरोध को व्यक्त करता है।

पृष्ठभूमि और बैकग्राउंड

अय्यूब की पुस्तक में यातना का अनुभव कर रहे एक ईश्वर भक्त की गहन पीड़ा का चित्र है। इस अध्याय की शूरुआत अय्यूब की दुख-आवाजों के अधिकारिक प्रकाशन से पहले की है; मृत्यु की प्रतीक्षा—यानी जीवन की अस्थिरता और जीवित रहने की तात्कालिक चिंता—उसके मन के भीतर उभरती है। पवित्र लेख में यह दर्द यह स्पष्ट करता है कि मानव जीवन की आस्था में भी असहयोग के समय गहरे प्रश्न उठते हैं—क्यों परमेश्वर एक विश्वसनीय मार्ग क्यों नहीं दिखाते?

व्याख्यात्मक टिप्पणियाँ

– मृत्यु की प्रतीक्षा: यहाँ मृत्यु के भय या अंतिम समाप्ति की आशा एक मानसिक वास्तविकता है, जो दर्द में जीते लोगों के सामने त्वरित राहत की चाह पैदा करती है।

– गड़े हुए धन की खोज: धन और भौतिक वस्तुएँ भी पीड़ा के समय वास्तविक समाधान नहीं बनतीं; वे अस्थायित्व को और गहरा करते हैं।

– प्रका 9:6 का संकेत: इस संदर्भ में अन्य दिगन्तों की अंधेरी स्थिति और समय की कठोरता का उल्लेख कर यह दिखाते हैं कि संसार की शक्तियाँ भी मृत्यु के बाद श्वास नहीं छोड़तीं।

मुख्य निष्कर्ष (संक्षेप)

  • पीड़ा के समय आत्मा को शांति के लिए परमेश्वर के उद्देश्य पर निर्भर रहना चाहिए।
  • धन-संपत्ति की आकांक्षा से उम्मीदों की शरण नहीं बनती; परमेश्वर की कृपा ही स्थायी आशा है।
  • जीवन के आख्यान में मृत्यु-स्वर के अभाव में भी ईश्वर की योजना बनी रहती है, जिसे विश्वास से स्वीकारना चाहिए।

अनुक्रमित cross-references और संक्षिप्त व्याख्या

1) प्रकरण 7:1–2 — पीड़ा के समय जीवन की अस्थिरता और सेवक की भावनात्मक उथल-पुथल। यह अय्यूब के प्रश्नों से मेल खाता है कि कैसे पीड़ा व्यक्ति को अपने अस्तित्व के गहरे प्रश्न से भिड़ाती है।

2) नीतियाँ 11:7–9 — धन के मानक से परे जीवन के दैवी उद्देश्य की खोज के बारे में। यह संकेत देता है कि सांसारिक धन क्षणभंगुर है, पर परमेश्वर का उद्देश्य स्थिर है।

3) रोम 8:18–25 — दुख के बावजूद पूरी Creation की बढ़ती आशा और उद्धार की योजना; यह अय्यूब के दुख के भीतर भी भविष्य के प्रकाश की आवश्यकता को प्रतिपादित करता है।

व्यावहारिक निष्कर्ष

पीड़ा में भी आशा बनाये रखना, प्रभु की कृपा पर विश्वास को बनाए रखना और धन के स्थान पर परमेश्वर की वाणी को प्रधान मानना सीखिए। कठिन समय में प्रार्थना और comunidade (परिवार/समुदाय) का सहारा लेने से आत्म-संतोष मिल सकता है।

टिप्पणी-योग्यता: यह टिप्पणी Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के सार्वजनिक-डोमेन विवेचनों के सार-संयोजन से निर्मित है; जहां उपयुक्त है, उनके संक्षिप्त निश्चित उद्धरण सुरक्षित रूप से स्पष्ट रूप में संकेतित हैं।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

अय्यूब 3:21 समानांतर पद और संबंधित वचन

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प्रकाशितवाक्य 9:6 (HINIRV) »
उन दिनों में मनुष्य मृत्यु को ढूँढ़ेंगे, और न पाएँगे*; और मरने की लालसा करेंगे, और मृत्यु उनसे भागेगी। (अय्यू. 3:21, यिर्म. 8:3)

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नीतिवचन 2:4 (HINIRV) »
और उसको चाँदी के समान ढूँढ़े, और गुप्त धन के समान उसकी खोज में लगा रहे; (मत्ती 13:44)

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गिनती 11:15 (HINIRV) »
और यदि तुझे मेरे साथ यही व्यवहार करना है, तो मुझ पर तेरा इतना अनुग्रह हो, कि तू मेरे प्राण एकदम ले ले, जिससे मैं अपनी दुर्दशा न देखने पाऊँ।”

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