अय्यूब 31:3 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

क्या वह कुटिल मनुष्यों के लिये विपत्ति और अनर्थ काम करनेवालों के लिये सत्यानाश का कारण नहीं है*?

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अय्यूब 31:3 पद-दर-पद बाइबल टीका

अय्यूब 31:3 पर टिप्पणी (HINIRV)

पृष्ठभूमि: अय्यूब 31 अध्याय में आत्मकथन है, जहाँ अय्यूब अपने आचरण, ईमानदार जीवन और परमेश्वर के न्याय के लिए स्पष्ट गवाही देता है। यह वाक्य अय्यूब के प्रश्न को स्पष्ट करता कि क्या विपत्ति और अनर्थ केवल उन लोगों के लिए है जो कुटिल हैं, जैसा कि दुर्जनों के लिए माना जाता है। वह अपने जीवन के हर क्षेत्र में नैतिक पवित्रता और निष्कलंक आचरण का प्रमाण देता है, ताकि यह सिद्ध हो सके कि विपत्ति का कारण केवल धोखे में नहीं है, बल्कि ईश्वर के न्याय के पूर्ण और विचारयोग्य कार्य में है।

केंद्रीय अर्थ

इस पद में अय्यूब अपने अपने आचरण और चरित्र के आधार पर परमेश्वर के न्याय की मांग करता है। वह यह स्पष्ट करता है कि उसका जीवन एक सत्य-आत्म-विश्लेषण है: यदि उसने किसी प्रकार से चोरी, छल veya अन्याय किया हो, तो उसे दण्ड मिलना चाहिए; लेकिन उसके जीवन में किसी प्रकार का भ्रष्टाचार नहीं है। अतः विपत्ति का कारण केवल “कूटिल मनुष्यों” के लिए नहीं बनता। इसी से स्पष्ट होता है कि परमेश्वर का न्याय व्यापक है और प्रत्येक जीवित कर्म का मूल्यांकण करता है—चाहे वह आमदनी हो, वित्त, पारिवारिक उत्तरदायित्व, या इमानदारी से दिनचर्या के कार्य।

दो-तीन प्रमुख विषय

  • आत्मिक ईमानदारी बनाम विपत्ति: अय्यूब यह दिखाते हैं कि विपत्ति एक अकस्मात् परिणाम नहीं, बल्कि परमेश्वर के विचारशील कार्य का भाग हो सकता है, न कि हर विपत्ति “कुटिलता” के कारण।
  • नैतिक आचरण की पुष्टि: वह अपने हर क्षेत्र—पक्ष, परिवार, धन, सार्वजनिक जीवन—में निरामय आचरण का प्रमाण देता है ताकि संदेह का उसे मौका ही न मिले।
  • ईश्वर के न्याय की सीमा: यह पाठ दिखाता है कि न्याय केवल दुष्टों के लिए नहीं है, बल्कि ईश्वर सभी को उनके कर्मों के अनुसार उत्तरदायी ठहराते हैं।

क्रॉस-रेफरेंसेस और उनके सम्बद्ध अर्थ

1) इब्र 13:4—आचरण और पवित्रता की महत्ता; परिवारिक एवं सामाजिक जीवन में पुण्य-निष्ठा का मूल्य।

2) भजन 26:1-3—आत्म-विश्वास और न्याय की माँग—यही अय्यूब के तर्क की आत्मा है कि ईश्वर सत्य और निष्कलंक जीवन को देखता है।

3) योह 7:24—न्याय के साथ धैर्य और सत्य की जाँच; पूर्वाग्रह को छोड़कर निष्पक्ष आचरण की माँग।

व्यावहारिक चिंतन

हम व्यक्तिगत जीवन में कैसे उत्तर दें? यह पद हमें प्रेरित करता है कि हम अपने आचरण की परवाह करें, चाहे आन्तरिक संघर्ष क्यों न हों। किसी भी विपत्ति के समय हमारी ईमानदारी और सत्यनिष्ठा बनी रहे—कम से कम यह कि हम न hypocritical हों, न दूसरों के पत्थर फेंकें। साथ ही, याद रखें कि परमेश्वर के न्याय की परख समय पर होती है; हम उसे अपने जीवन के हर क्षेत्र में विश्वास के साथ प्रस्तुत करें।

संक्षिप्त निष्कर्ष

अय्यूब 31:3 उद्घोषणा है कि विपत्ति का उद्देश्य कूटिलता से नहीं, बल्कि ईश्वर के न्याय की व्यापकता है। अय्यूब अपने जीवन के प्राकृतिक और नैतिक हर पहलू को परीक्षित ठहराते हैं ताकि यह सिद्ध हो कि उनका हृदय और कर्म पवित्र हैं। यह संदेश आज हमारी नैतिक जागृति के लिए भी परम उपयोगी है: सच और पवित्र जीवन का संस्थान, भले परिस्थितियाँ कैसी भी हों, और परमेश्वर के विचारों पर भरोसा बनाए रखना चाहिए।

उद्धृत टिप्पणीकारों से मिलते-जुलते विचार

मार्थे हेन्री (Matthew Henry) और अल्बर्ट बार्न्स (Albert Barnes) के मानक विचारों के अनुरोध पर, इतिहास-आधारित पूरण-उद्धरणों के रूप में मिलते-जुलते छोटे संकेत दिए गए हैं: “यदि हमारे जीवन में स्पष्ट निष्कलंक आचरण है, तो विपत्ति के समय भी हमारा निश्चय दृढ़ रहता है”—यह प्रकार की सूक्तियाँ इन-commentary traditions में मिलती हैं। आवश्यक टिप्पणियाँ नीचे के उदाहरण में संक्षेप में उद्धृत हैं: “हमारे कर्म हमारे ईश्वर-विश्वास का प्रमाण हैं।”

पाठ-स्मरण: यह टिप्पणी पूरी तरह से पाठ के संदर्भ में है, और किसी भी व्यक्तिगत मंथन के लिए प्रेरक है कि हम प्रभु के न्याय के प्रति सजग रहें और अपने आचरण को ईश्वर के स्मरण के अनुरूप बनाए रखें।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

अय्यूब 31:3 समानांतर पद और संबंधित वचन

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