Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
अय्यूब 1 अय्यूब 2 अय्यूब 3 अय्यूब 4 अय्यूब 5 अय्यूब 6 अय्यूब 7 अय्यूब 8 अय्यूब 9 अय्यूब 10 अय्यूब 11 अय्यूब 12 अय्यूब 13 अय्यूब 14 अय्यूब 15 अय्यूब 16 अय्यूब 17 अय्यूब 18 अय्यूब 19 अय्यूब 20 अय्यूब 21 अय्यूब 22 अय्यूब 23 अय्यूब 24 अय्यूब 25 अय्यूब 26 अय्यूब 27 अय्यूब 28 अय्यूब 29 अय्यूब 30 अय्यूब 31 अय्यूब 32 अय्यूब 33 अय्यूब 34 अय्यूब 35 अय्यूब 36 अय्यूब 37 अय्यूब 38 अय्यूब 39 अय्यूब 40 अय्यूब 41 अय्यूब 42Verse
अय्यूब 34:1 अय्यूब 34:2 अय्यूब 34:3 अय्यूब 34:4 अय्यूब 34:5 अय्यूब 34:6 अय्यूब 34:7 अय्यूब 34:8 अय्यूब 34:9 अय्यूब 34:10 अय्यूब 34:11 अय्यूब 34:12 अय्यूब 34:13 अय्यूब 34:14 अय्यूब 34:15 अय्यूब 34:16 अय्यूब 34:17 अय्यूब 34:18 अय्यूब 34:19 अय्यूब 34:20 अय्यूब 34:21 अय्यूब 34:22 अय्यूब 34:23 अय्यूब 34:24 अय्यूब 34:25 अय्यूब 34:26 अय्यूब 34:27 अय्यूब 34:28 अय्यूब 34:29 अय्यूब 34:30 अय्यूब 34:31 अय्यूब 34:32 अय्यूब 34:33 अय्यूब 34:34 अय्यूब 34:35 अय्यूब 34:36 अय्यूब 34:37



अय्यूब 34:22 – “ऐसा अंधियारा या घोर अंधकार कहीं नहीं है जिसमें अनर्थ करनेवाले छिप सके।”
Immediate setting: यह पद अय्यूब के मित्रों की उक्ति-श्रृंखला के बीच आता है जहाँ एक वैचारिक संघर्ष चलता है—ईश्वर के न्याय और विवेकपूर्ण निदर्शन की चर्चा। इस आयत में दयालु, समर्थ और न्यायी परमेश्वर की बिना-छोड़-छोड़ पकड़ की बात की गई है, ताकि कोई भी निष्क्रिय रूप से अनर्थ कर सके या अंधकार में छिपकर कुकर्म से बच न सके।
पाठ के बारे में महत्वपूर्ण निष्कर्ष
यह आयत निष्क्रिय लोगों के बजाय God’s omnipresence और न्याय की व्यापकता को उजागर करती है। अंधकार-सी घोर परिस्थितियाँ भी परमेश्वर के सामने निर्वासन नहीं बनतीं; हर अत्याचार, भेदभाव या शोषण का पर्दाफाश परमेश्वर के सामने होता है। यह विचार विश्वास को यह आश्वासन देता है कि न्याय का तंत्र समय के हर मोड़ पर सक्रिय है, और जो पाप करेगा उसे अंततः जवाबदेही का सामना करना पड़ेगा।
परिभाषित शब्द और छवि
– अंधियारा/घोर अंधकार: यहाँ से अपेक्षित है गहरे पाप, दुष्कर्म और चोरी जैसे क्रियाकलाप जिनमें भेद नहीं होता।
– अनর্থ करनेवाले: वे जो दूसरों को क्षति पहुँचाते हैं, संख्या से नहीं बल्कि नीयत से बुरा करते हैं।
मुख्य विचारों की संगति
1) परमेश्वर हर क्रिया के स्वरूप से परे है और किसी भी कुकर्म से बच नहीं सकता—न अंधकार, न चुप्पी।
2) न्याय का ढांचा वैश्विक है; दया, समानता और न्याय के साथ वह सब कुछ परखता है।
Related Cross-References (संशोधित संदर्भ, संक्षेप में)
उপयोगी निबंधन—आज के जीवन के लिए
– अन्याय के समय भी हमें सत्य और नैतिकता के साथ खड़ा रहना चाहिए।
– यह आयत याद दिलाती है कि किसी भी प्रकार की दुष्कर्म-रचना या धूर्तता असहनीय है, चाहे परिस्थितियाँ कितनी भी रोशनी में क्यों न हों।
संयोजन से निष्कर्ष
अय्यूब 34:22 हमें यह सन्देश देता है कि परमेश्वर सर्वव्यापी न्यायपूर्ण सत्ता है—अंधकार चाहे कितना भी घना हो, वह अनर्थ करने वालों को सुरक्षित नहीं कर सकता। पुराने समुदायों के भाष्य-नोट्स से लेकर आधुनिक पाठ तक यह विचार एक ही धागे को पकड़े है: God’s presence और His righteous order darkness में भी प्रकाश बनकर काम करता है।
ध्यान दें: नीचे उद्धरित पंक्तियाँ/नोट्स में Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के मौलिक टुकड़ों से 2-3 ठोस उद्धरणों का उल्लेख किया गया है, यदि उपलब्ध हों।