अय्यूब 38:23 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

जिसको मैंने संकट के समय और युद्ध और लड़ाई के दिन के लिये रख छोड़ा है?

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अय्यूब 38:23 पद-दर-पद बाइबल टीका

अय्यूब 38:23 का अर्थ

इस पद का तात्पर्य है: परमेश्वर ने संकट के समय के लिए, युद्ध और लड़ाई के दिनों के लिए अत्यंत आवश्यक और नियत जोखिमपूर्ण परिस्थितियों को सुरक्षित रखा है ताकि वह अपने उद्देश्य को पूरा कर सके। यहाँ ईश्वर अपने असीम ज्ञान और पवित्र शासन की घोषणा कर रहे हैं: वह हर स्थिति में अपना नियंत्रण बनाए रखते हैं और अपने चैलेंजों से बचाकर भी लोगों के लिए उपयुक्त समय और जगह चुनते हैं।

पृष्ठभूमि और संदर्भ

अय्यूब के प्रति ईश्वर का उद्धारक सवाल यह संकेत देता है कि संसार की घटनाओं के पीछे वही सत्ता है जो समय-समय पर तुलना-योग्य परीक्षण लाती है। अय्यूब की तड़प, पीड़ा और मित्रों की चर्चा एक ही धागे में बंधी है: परमेश्वर अपनी सार्वभौमिक बुद्धि से हर परिस्थिति को आकार दे रहे हैं। यह verse यह बताता है कि कुछ कठिन अवसरों को वह पहले से सुरक्षित रखे हैं ताकि वे समय आने पर उचित सार्थकता और परिणाम दे सकें।

व्याख्यात्मक अवलोकन

  • परमेश्वर की इच्छा और योजना समय-समय पर प्रकट होती है; वह संकटों को पनि जानकर, उनकी सीमा निर्धारित करता है।
  • यह उद्धरण आंतरिक सुरक्षा की बात नहीं करता कि हर मुश्किल से पहले एक आरामदायक रास्ता होगा, बल्कि यह है कि परमेश्वर हर दिन के लिए आवश्यक संघर्ष और सुरक्षा दोनों देता है।
  • युद्ध-नीति का उल्लेख यह संकेत देता है कि प्रभु के नियंत्रण में सब कुछ है—यह विश्वास को मजबूती देता है कि पीड़ा भी सांत्वना और उद्धार का एक उपकरण बनती है।

थीमैटिक सूची

  1. ईश्वर का नियोजन और समयसारिणी
  2. पीड़ा के बीच का सुरक्षा-आधार
  3. विश्वास में निर्भरता और आशा

अनुसंधानीय क्रॉस-रेफरेंस

1) अय्यूब 5:19 — कठिन समयों में परमेश्वर को बुलाने पर सहायता मिलती है; यह दृष्टिकोण उसी संरक्षण की पुष्टि करता है जो यहाँ दिख रहा है।

2) रोमियों 8:28 — सभी चीजें मिलकर भलाई के लिए कार्य करती हैं; संकट भी उद्धार के मार्ग बन सकता है, जब परमेश्वर की योजना के अनुसार चले।

3) यशायाह 54:17 — किसी प्रतिद्वंद्वी की तलवार से नहीं, बल्कि परमेश्वर के विरुद्ध प्रतिरोध कभी सफल नहीं होगा; सुरक्षा की यह वचन-गवाही इस पाठ के साथ संगति बनाती है।

संक्षिप्त व्यावहारिक निचोड़

जब भी जीवन में संकट मानसिक और बाहरी लड़ाइयों के रूप में आते हैं, तब याद रखें कि परमेश्वर ने इन्हें भी अपने उद्देश्य के लिए सुरक्षित रखा है। हमें भरोसा रखना चाहिए कि हमें उस समय और तरीके से बचाने के लिए वह सही दिन और मार्ग निर्धारित कर रहा है जो हमारे लिए उत्तम परिणाम देगा।

एतिहासिक-परामर्श के उद्धरण (सिर्फ जहाँ उपयुक्त)

Matthew Henry, Albert Barnes या Adam Clarke के संकलित विचारों के खंड-उद्धरण केवल आवश्यकता के अनुसार जोड़े गए हैं। यदि मिले, तो वे शास्त्रीय प्रकाश डालते हैं।

लेखन-नोट्स

यह commentary मूल संदेश को शांत-पुष्ट तरीके से प्रस्तुत करता है: परमेश्वर की संपूर्ण योजना और समय-सारिणी के भीतर संकट भी एक नियत चरण है, जो विश्वास को परखता और मजबूत बनाता है।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

अय्यूब 38:23 समानांतर पद और संबंधित वचन

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फिर जब वे इस्राएलियों के सामने से भागकर बेथोरोन की उतराई पर आए, तब अजेका पहुँचने तक यहोवा ने आकाश से बड़े-बड़े पत्थर उन पर बरसाएँ, और वे मर गए; जो ओलों से मारे गए उनकी गिनती इस्राएलियों की तलवार से मारे हुओं से अधिक थी।।

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यशायाह 30:30 (HINIRV) »
और यहोवा अपनी प्रतापीवाणी सुनाएगा, और अपना क्रोध भड़काता और आग की लौ से भस्म करता हुआ, और प्रचण्ड आँधी और अति वर्षा और ओलों के साथ अपना भुजबल दिखाएगा। (भज. 18:13-14)

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और आकाश से मनुष्यों पर मन-मन भर के बड़े ओले गिरे, और इसलिए कि यह विपत्ति बहुत ही भारी थी, लोगों ने ओलों की विपत्ति के कारण परमेश्‍वर की निन्दा की।

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