Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
अय्यूब 1 अय्यूब 2 अय्यूब 3 अय्यूब 4 अय्यूब 5 अय्यूब 6 अय्यूब 7 अय्यूब 8 अय्यूब 9 अय्यूब 10 अय्यूब 11 अय्यूब 12 अय्यूब 13 अय्यूब 14 अय्यूब 15 अय्यूब 16 अय्यूब 17 अय्यूब 18 अय्यूब 19 अय्यूब 20 अय्यूब 21 अय्यूब 22 अय्यूब 23 अय्यूब 24 अय्यूब 25 अय्यूब 26 अय्यूब 27 अय्यूब 28 अय्यूब 29 अय्यूब 30 अय्यूब 31 अय्यूब 32 अय्यूब 33 अय्यूब 34 अय्यूब 35 अय्यूब 36 अय्यूब 37 अय्यूब 38 अय्यूब 39 अय्यूब 40 अय्यूब 41 अय्यूब 42Verse
अय्यूब 38:1 अय्यूब 38:2 अय्यूब 38:3 अय्यूब 38:4 अय्यूब 38:5 अय्यूब 38:6 अय्यूब 38:7 अय्यूब 38:8 अय्यूब 38:9 अय्यूब 38:10 अय्यूब 38:11 अय्यूब 38:12 अय्यूब 38:13 अय्यूब 38:14 अय्यूब 38:15 अय्यूब 38:16 अय्यूब 38:17 अय्यूब 38:18 अय्यूब 38:19 अय्यूब 38:20 अय्यूब 38:21 अय्यूब 38:22 अय्यूब 38:23 अय्यूब 38:24 अय्यूब 38:25 अय्यूब 38:26 अय्यूब 38:27 अय्यूब 38:28 अय्यूब 38:29 अय्यूब 38:30 अय्यूब 38:31 अय्यूब 38:32 अय्यूब 38:33 अय्यूब 38:34 अय्यूब 38:35 अय्यूब 38:36 अय्यूब 38:37 अय्यूब 38:38 अय्यूब 38:39 अय्यूब 38:40 अय्यूब 38:41



मुख्य विचार: परमेश्वर की सार्वभौमिक महिमा और इंसान की सीमाओं
अय्यूब 38:4 बताता है: जब मैंने पृथ्वी की नींव डाली, तब तू कहाँ था? यदि तू समझदार हो तो उत्तर दे। यह वाक्य परमेश्वर की अपनी सत्ता और ज्ञान की सीमा-रेखा को उभारता है; इंसान की बुद्धि और अनुभव कितने भी गहरे क्यों न हों, वे परमेश्वर के महान योजना-नियमन के सामने सदा अधूरे रहते हैं।
पाठ-पृष्टभूमि (लिटरेरी कॉन्टेक्स्ट)
उठती हुई यह पहली गवाही है जहाँ ईश्वर सीधे अय्यूब से प्रश्न पूछते हैं—एक तरह से मानवीय समझ की चुनौती। अतः यह अध्याय अय्यूब की दुर्दशा तथा उसके मित्रों की तर्क-युद्ध में एक बदलाव का संकेत है; ईश्वर के विरुद्ध मानव की तर्क-शक्ति छोटी पड़ जाती है। यह भाग बैनर के रूप में न सिर्फ दुख की बात है, बल्कि भगवान की महिमा, न्याय और नीति पर केंद्रित है।
शास्त्रीय महत्व (थियोलॉजिकल significance)
यह उद्धरण दो प्रमुख संदेश देता है: एक तो सृष्टि के निर्माण के समय से लेकर आज तक विश्व-प्रबंध एक योजना के अनुसार संचालित है, जिसमें मानव पात्र छोटा पड़ता है; दूसरा यह कि पीड़ित दृष्टिकोण से भी परमेश्वर की तैयारी और उद्देश्य को मानना आवश्यक है। आय्यूब की तकलीफ में भी भगवान की आत्म-प्रज्ञा एक स्थिर संदर्भ बनकर रहता है।
पवित्र शास्त्रों में सम्बन्ध (Cross-references)
इन संदर्भों के अनुसार, अय्यूब के संकट के साथ-साथ पाठक यह स्मरण करते हैं कि परमेश्वर की कार्य-व्यवस्था हमारी सोच से परे हो सकती है, और उसे मानना प्रायः आस्था की कसौटी है।
चिंतन के लिए प्रश्न
संक्षिप्त निष्कर्ष
अय्यूब 38:4 परमेश्वर की गहरी सत्ता और निर्माण-कार्य के संदर्भ को उजागर करता है। यह बताता है कि मानव समझ चाहे कितनी भी विस्तृत हो, पृथ्वी-नींव जैसी विशाल योजना के पीछे उसकी पहुँच सीमित है। इस ज्ञान के साथ आस्था यह कहती है कि दुख के बीच भी परमेश्वर की योजना सुध-बुध से परे है, और विश्वास उसे स्वीकार करने की दशा बनाता है।
पूर्ववर्ती टिप्पणी से उद्धरण (गुणवत्ता के लिए स्वीकृत स्रोतों से)
यदि आवश्यक हो, तो यह पाठ Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke जैसे सार्वजनिक-डोमेन टिप्पणीकारों के विचारों के तात्पर्यपूर्ण सार से सहायता ले सकता है।—उद्धरण केवल तभी उद्धृत होंगे जब वे विशिष्ट और उपयुक्त हों।