Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
अय्यूब 1 अय्यूब 2 अय्यूब 3 अय्यूब 4 अय्यूब 5 अय्यूब 6 अय्यूब 7 अय्यूब 8 अय्यूब 9 अय्यूब 10 अय्यूब 11 अय्यूब 12 अय्यूब 13 अय्यूब 14 अय्यूब 15 अय्यूब 16 अय्यूब 17 अय्यूब 18 अय्यूब 19 अय्यूब 20 अय्यूब 21 अय्यूब 22 अय्यूब 23 अय्यूब 24 अय्यूब 25 अय्यूब 26 अय्यूब 27 अय्यूब 28 अय्यूब 29 अय्यूब 30 अय्यूब 31 अय्यूब 32 अय्यूब 33 अय्यूब 34 अय्यूब 35 अय्यूब 36 अय्यूब 37 अय्यूब 38 अय्यूब 39 अय्यूब 40 अय्यूब 41 अय्यूब 42Verse
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अय्यूब 6:16 का तात्पर्य और पाठ के पीछे संदेश
पद का संदर्भ अय्यूब की पीड़ा के बीच है, जब वह अपने मित्रों के आरोपों से थककर अपनी गति-शक्ति और शांति खो चुका है। यह पंक्ति एक ठंडे, बर्फीले घाव की imagery बनाती है: बर्फ़ के कारण वे काले हो जाते हैं, और उनमें हिम छिपा रहता है। यहाँ ठंड और हिम की दृश्यता मानवीय अशक्ति, दुर्बलता और दुख के कारणों को दर्शाती है – वे बाहरी वातावरण की कठोरता की तरह आंतरिक पीड़ा के साथ घुल मिल जाते हैं।
ईश्वर या विश्वास के दृष्टिकोण से पाठ क्या प्रकट करता है
यहUAGE पाठ हमें दिखाता है कि दर्द और ठंडे सामाजिक अनुभवों के बीच भी ईश्वर की दृष्टि हमारे भाग्य को नहीं छोड़ती। अय्यूब अपने दुख के कारण, दुख-संघर्ष और असहायता के बीच भी ईश्वर पर भरोसा बनाए रखना चाहता है। बर्फ़ और हिम का उल्लेख शारीरिक दुर्बलता को प्रतीक बनाकर मानवीय स्थितियों की नश्वरता और परिवर्तनशीलता को उजागर करता है।
महत्वपूर्ण शब्दों और छवियों की स्पष्ट व्याख्या
Related passages (संवेदी संदर्भ)
- अकसर बर्फ़ और ठंड की imagery दयालुता की कमी या विपरीत परिस्थितियों में भी भरोसा बनाये रखने की धारणा से जुड़ती है; आत्म-आकांक्षा में ईश्वर के भरोसे की याद दिलाती है।
- अन्य नीतियों में पीड़ा से निपटने के लिए धैर्य और ईश्वर के साथ स्थिरता की माँग की जाती है, जैसे कि कुछ Psalms में दुख में भी ईश्वर की सहायता की आशा दिखाई देती है।
- कठिनाई के बीच सत्य को ढूंढ़ना, बहरे कानों को भी सुनाने के लिए ईश्वर की सत्ता की याद दिलाती है।
वर्तमान में उपयोगी अनुप्रयोग
1) कठिन समय में भी स्थिर विश्वास बनाए रखें: शारीरिक या सामाजिक ठंडक के बीच भी ईश्वर के अटल प्रेम की याद दिलाए।
2) अपनी आंतरिक पीड़ा को खुले तौर पर परखें और उसे ईश्वर के साथ बाँटें; हिम-छिपे दर्द को छिपाने के बजाय उसका हवाला-आकलन करें ताकि राहत मिले।
3) दूसरों के साथ सहानुभूति रखें: अय्यूब के अनुभव से सीखते हुए जान लें कि कठिनाइयों में भी मित्रता और धैर्य बहुत मायने रखता है।
मैथ्यू हेनरी, अॅल्बर्ट बार्न्स, एडम क्लार्क के प्रेरक संकेत (संक्षेप)
यह अनुभाग पाठ की ठंड और दर्द की छवि पर बल देता है कि पीड़ा के समय भी ईश्वर पर भरोसा नहीं टूटना चाहिए। अगर यहाँ से उद्धरण संभव हों, तो वे पाठ के भाव को संक्षेप में पुष्टि करते हैं: दर्द के बीच ईश्वर की गति बनाये रखने की आवश्यकता और विश्वास की शीतलता।
नोट: उचित उद्धरण उपलब्ध होने पर ही उल्लेखित विचारों को पाठ के साथ संरेखित रूप में पेश किया गया है; उपरोक्त अनुभाग में विशिष्ट वाक्यों के पूर्ण उद्धरण नहीं दिए गए हैं, ताकि पाठ्य-संरचना में originality बनी रहे।