Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
अय्यूब 1 अय्यूब 2 अय्यूब 3 अय्यूब 4 अय्यूब 5 अय्यूब 6 अय्यूब 7 अय्यूब 8 अय्यूब 9 अय्यूब 10 अय्यूब 11 अय्यूब 12 अय्यूब 13 अय्यूब 14 अय्यूब 15 अय्यूब 16 अय्यूब 17 अय्यूब 18 अय्यूब 19 अय्यूब 20 अय्यूब 21 अय्यूब 22 अय्यूब 23 अय्यूब 24 अय्यूब 25 अय्यूब 26 अय्यूब 27 अय्यूब 28 अय्यूब 29 अय्यूब 30 अय्यूब 31 अय्यूब 32 अय्यूब 33 अय्यूब 34 अय्यूब 35 अय्यूब 36 अय्यूब 37 अय्यूब 38 अय्यूब 39 अय्यूब 40 अय्यूब 41 अय्यूब 42Verse
अय्यूब 6:1 अय्यूब 6:2 अय्यूब 6:3 अय्यूब 6:4 अय्यूब 6:5 अय्यूब 6:6 अय्यूब 6:7 अय्यूब 6:8 अय्यूब 6:9 अय्यूब 6:10 अय्यूब 6:11 अय्यूब 6:12 अय्यूब 6:13 अय्यूब 6:14 अय्यूब 6:15 अय्यूब 6:16 अय्यूब 6:17 अय्यूब 6:18 अय्यूब 6:19 अय्यूब 6:20 अय्यूब 6:21 अय्यूब 6:22 अय्यूब 6:23 अय्यूब 6:24 अय्यूब 6:25 अय्यूब 6:26 अय्यूब 6:27 अय्यूब 6:28 अय्यूब 6:29 अय्यूब 6:30



अय्यूब 6:20 का अर्थ और संदर्भ
सीधे शब्दों में, यह verse उन लोगों की असफलता और असमर्थता की स्थिति दर्शाता है जो भरोसा करके चले थे पर वास्तविकता में उन्हें धक्का लगा। वे आशा में पहुँचे, पर वहाँ पहुँचकर लज्जित हुए और उनके मुँह सूख गए। यहाँ तनाव यह है कि भले ही प्रतिक्रिया में आशा टूटे, पर परमेश्वर के सच्चे ज्ञान से सुरक्षा नहीं छूटती।
पृष्ठभूमि और परिप्रेक्ष्य
यह अय्यूब की सूचना-दत्तक कहानी का भाग है जहाँ मित्रों की आस्था और तर्कों के बीच विषयगत द्वंद्व उभरते हैं। मित्रों ने अय्यूब की विपत्तियों के पीछे उद्धार का मार्ग केवल कर्मों के परिणामों से जोड़ा, पर बहती गहराई में अय्यूब की पीड़ा और परमेश्वर की योजना एक अलग सत्य को उद्घाटित करती है। यह पद बताता है कि लोग परिस्थितियों में क्या सोचते हैं और वे अपनी धारणाओं के कारण कहाँ चूक जाते हैं—भरोसा पर भी नहीं कि सत्यान्वेषी परमेश्वर का प्रत्यक्ष मार्ग किस दिशा में है।
व्याख्यात्मक अवलोकन
छोटी थीम-सूची
अनुकूलित क्रॉस-रेफरेंसेज़
1) यशायाह 30:15— जवाबदेही यह है कि प्रतिश्रुति से नहीं, शांत आत्म-समर्पण से उद्धार मिलता है; यह पाठ अय्यूब की स्थिति में भी प्रतिध्वनित होता है कि सत्य शांतिपूर्ण मार्ग से आता है।
2) जमील 5:7-8— धैर्यपूर्वक प्रतीक्षा करें; प्रभु की कृपा समय पर मिलती है। यह verse संकेत देता है कि धैर्य ही विश्वास की असली पराकाष्ठा है।
3) क़लिसयियों 1:11— प्रभु की महारन से दृढ़ता मिलती है; संकटों में आशा के साथ स्थिर रहना चाहिए।
छोटा निष्कर्ष/व्यावहारिक takeaway
जो लोग कठिनाइयों के बीच अपनी आशाओं को बनाए रखना चाहते हैं, उन्हें याद रखना चाहिए कि भरोसा केवल त्वरित परिणाम नहीं है, बल्कि परमेश्वर की व्यवस्था में स्थिर विश्वास है। पीड़ा की स्थिति में भी सत्य यह है कि पूरी समझना न सदा संभव है, पर परमेश्वर की सामर्थ्य और मार्ग उपलब्ध रहता है—यही वास्तव में उद्धार का स्रोत है।
नोट
इस तरह के अंश में पुराने टिप्पणीकारों के शब्द सीधे उद्धृत नहीं किए गए हैं, परMatthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke के मानक विचारों के अनुरूप मूल विचार—धैर्य, सत्य की महत्ता, और मानव सोच का सीमित होना—संयमित रूप से समाहित हैं।