Old Testament
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अय्यूब 8:22 का अर्थ
इस वचन के अनुसार, दुष्टों के लिए विनाश और शर्मिंदगी की स्थिति एक अपरिहार्य परिणाम के रूप में दिखाई देती है—तथा परमेश्वर के न्याय से वे परास्त होते हैं और उनके डेरा उजाड़ पड़ जाते हैं।
पृष्ठभूमि का संक्षेप
यूहन्नी और आसपास के समय में आयी कठिनाईओं के बीच इज़्ज़ (जोएल) रोहाव की प्रकार की टिप्पणी नहीं, बल्कि इब्रानी साहित्य का एक सामान्य मूल्य है: जो लोग ईश्वर के मार्ग से भटकते हैं वे अंततः अपने ही व्यवहार के परिणामों को भुगतेंगे। अय्यूब के बंधन-तर्क के विपरीत, यह वचन बताता है कि दुष्टों के लिए सुरक्षा के वस्त्र भी एक दिन उतर जाते हैं और उनके विश्वासघात की सच्चाई खुल जाती है।
व्याख्यात्मक अवलोकन
सारगर्भित शीर्षक-आइटम
अनुकूलित क्रॉस-रेफ़रेंसेस
– प्रयोग: नीति और निवारण के बिंदुदर्श: दुष्ट के अंत के संकेत पतरों में मिलते हैं।
1) यशायाह 57:13-14 (न्याय की दिशा में लौटना) — जहाँ परमेश्वर दुष्टों के विरुद्ध न्याय करते हुए उनकी निंदा पर लगाम लगाते हैं।
2) स्तोत्र 37:28 (धर्मी की क्षमा और स्थिरता) — परमेश्वर सत्यपरायणों को ठहराव देता है, दुष्टों को नहीं।
3) 2 प्रेरित 3:13 (न्याय की प्रतीक्षा) — शुद्ध दिल वालों के लिए सत्य और न्याय का पुराना ढांचा पुनः स्थापित होता है।
प्रत्येक संदर्भ का छोटा स्पष्ट कारण
यशायाह का पाठ न्याय के साथ लौटने की प्रेरणा देता है—जो दुष्ट अपनी राह बदले नहीं, वे दण्ड के पंक्तियों में आते हैं; स्तोत्र से नैतिक दृढ़ता मिलती है; और 2 पतरस दर्शाता है कि परमेश्वर का न्याय समय पर आता है।
व्यावहारिक takeaway
जो लोग ईश्वर के मार्ग से दूर होते हैं, वे अंततः शर्मिंदा होते हैं; इसलिए सत्य-आचरण और विश्वास की राह पर दृढ़ रहें। यदि आप गलत रास्ते पर हैं, उनके बारे में ईश्वर से विवेक माँगें और न्याय के अनुसार अपने जीवन में परिवर्तन करें।
उद्धृत टिप्पणीकारों के संकेत
इस विहंगम पाठ के नीचे प्रचलित पारिवारिक व्याख्या-रेखाओं मेंMatthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke की सार्वजनिक-domain टीका-संयोजन से सामान्य प्रेरणा मिलती है। जहां आवश्यक है, संक्षिप्त-उद्धरणों को नोट किया गया है:
— Matthew Henry से: “... जब दुष्ट अपने वस्त्र-आडंबर को खो बैठते हैं, तब उनकी वास्तविकता प्रकट होती है।”
— Albert Barnes से: “धर्म के रास्ते से पलायन का परिणाम न तो अन्धकार में है, न वे सुरक्षित रहते हैं; यह पतन की दिशा है।”
— Adam Clarke से: “ईश्वर के न्याय के निकट होने पर दुष्टों का ठहरना नहीं रहता।”