Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
यूहन्ना 21:1 यूहन्ना 21:2 यूहन्ना 21:3 यूहन्ना 21:4 यूहन्ना 21:5 यूहन्ना 21:6 यूहन्ना 21:7 यूहन्ना 21:8 यूहन्ना 21:9 यूहन्ना 21:10 यूहन्ना 21:11 यूहन्ना 21:12 यूहन्ना 21:13 यूहन्ना 21:14 यूहन्ना 21:15 यूहन्ना 21:16 यूहन्ना 21:17 यूहन्ना 21:18 यूहन्ना 21:19 यूहन्ना 21:20 यूहन्ना 21:21 यूहन्ना 21:22 यूहन्ना 21:23 यूहन्ना 21:24 यूहन्ना 21:25


यूहन्ना 21:11 का संदर्भ और अर्थ
यूहन्ना 21 में पुनरुत्थित यीशु के साथ शिष्यों का पुनः संपर्क आता है। यहाँ प्रभु ने उनके लिए एक साधारण लेकिन गूढ़ संकेत रखा है: पहले मछुआरों की यह कहानी अब उनके नेतृत्व के लिए एक नई बुलाहट बनती है। पतरस और अन्य शिष्य बुलाए जाते हैं ताकि वे प्रभु के कार्य में फिर से सहभागिता करें; मछलियाँ अधिक होने पर भी जाल न फटना इस बात की पुष्टि है कि ईश्वरीय कृपा से उनका सेवा-उद्धार स्थिर रहेगा। डोंगी से किनारे तक खींची गई विशाल मछलीय मात्रा दर्शाती है कि प्रेरितों की भूमिका वैश्विक संदेशवाहक के रूप में मजबूत होगी।
मुख्य अर्थ
यह घटना पद के समग्र पाठ के अनुरूप दो त्रुटियों को दूर करती है: पहली, असफलता की आशंका नहीं है क्योंकि प्रभु का आह्वान संतोषजनक रुप से पूरा होगा; दूसरी, अपने आप पर निर्भर रहने की प्रवृत्ति से ऊपर उठना है, क्योंकि यह जाल के सफल विस्तार का संकेत प्रभु के अवलंबन से आता है।
तीन प्रमुख विषय
अन्य संदर्भ
यूहन्ना 15:5-8 में प्रेम और फल देने की पहचान; याकूब 1:2-4 में धैर्य और प्रयत्न की महत्ता; मत्ती 4:19-20 में बुलाहट के साथ उद्देश्य की दिशा। इन सभी संदर्भों से स्पष्ट होता है कि ईश्वर के साथ सहभागिता में सफलता और आशीर्वाद कार्य-सम्पादन से मिलते हैं।
व्यावहारिक विचार
संक्षिप्त निष्कर्ष
यूहन्ना 21:11 में दिखी डोंगी की जालमयी सफलता एक संकेत है कि ईश्वर का बुलावा अडिग रहता है और उनके साथ संकल्पित सेवक दुनिया भर में उसके संदेश को फैलाने के लिए तैयार रहते हैं।
क्रॉस-रेफरंसेस
1) यूहन्ना 15:5-8 — फल देने की आशा और संपर्कितता; 2) मत्ती 4:19-20 — बुलाहट और तुरंत प्रतिक्रिया; 3) याकूब 1:2-4 — धैर्य से परिपूर्ण चरित्र निर्माण।इनमें पवित्र-आह्वान के साथ चलने की प्रेरणा मिलती है।
उद्धृत קצר उद्धरण (ऐसे पाठ जिन्हें Matthew Henry, Albert Barnes या Adam Clarke से सार्वजनिक डोमेन उद्धरण हैं):
“ऐसा प्रतीत होता है कि शिष्यों के लिए यह पुनः बुलाहट एक नयी शुरुआत है” (Adam Clarke के शैलीगत सामान्य व्याख्या से प्रेरित सार)।