यूहन्ना 21:25 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

और भी बहुत से काम हैं, जो यीशु ने किए; यदि वे एक-एक करके लिखे जाते, तो मैं समझता हूँ, कि पुस्तकें जो लिखी जातीं वे जगत में भी न समातीं।

यूहन्ना 21:25 पद-दर-पद बाइबल टीका

यूहन्ना 21:25 का प्रत्यक्ष अर्थ

इस आयत में यीशु के जीवन-कार्य न केवल कुछ घटनाओं तक सीमित रहे, बल्कि वे अनगिनत थे। यहाँ कहा गया है कि अगर हर एक कार्य को लिखा जाता, तो ग्रंथ विशाल हो जाते और संसार उन्हें समाते नहीं। इसका मतलब है कि ईसाई विश्वास के लिए आवश्यक तथ्यom, शिक्षाएं और चमत्कार इतने व्यापक हैं कि उनका पूर्ण वर्णन संभव नहीं है; परन्तु जो महत्वपूर्ण है, वही उनके रस को पकड़ता है—जूनून, प्रेम, और उद्धार का संदेश।

पृष्ठभूमि और संदर्भ

यूहन्ना के अंतिम अध्यायों में यीशु ने अपने चेलों के साथ पुनर्जीवित अवस्था में संवाद किया। यह कह कर कि बहुत से काम थे जो उसने किए, लेखक यह बताने की कोशिश कर रहा है कि यीशु की कर्म-यात्रा अद्भुत और अप्रत्याशित थी, परन्तु प्रेरितों के लिए सबसे आवश्यक बातें उनके प्रेषण, क्रूसिक निधन, और जीवन का नया आधार स्थापित करना थीं।

interpretive observations

- संक्षेप में: सभी कार्यों का लिखना संभव नहीं, इसलिए शास्त्र उन प्रमुख घटनाओं और शिक्षाओं पर केंद्रित है जो विश्वास और जीवन को दिशा देती हैं।

- यह आयत हमारे लिए स्मरण कराती है कि ज्ञान का दायरा विराट है, परन्तु प्रेरितों के लिए जो मुख्य संदेश है, वही पर्याप्त और निर्णायक है: यीशु मरे और जी उठे, ताकि हमारा उद्धार हो।

छोटी थीमेटिक सूची

  • परम ओज तथा करूणा: यीशु के कर्मों की गहराई का दायरा अकल्पनीय है, परन्तु धर्मशास्त्र का लक्ष्य उद्धार का सार है।
  • विश्वास का केंद्र: यथार्थ जीवन संबंध यीशु के वचन और कार्यों पर टिकता है, न कि लेखों की सीमा पर।
  • आपत्ति बनाम आशीर्वाद: जहां लेखन सीमित है, वहीं अनुभव और स्मरणजनक गवाही विश्वास को मजबूत बनाती है।

अन्य उपयुक्त आयतों के साथ संलाप

1) मत्ती 28:18-20 के महान आयोग की याद दिलाते हैं कि यीशु के वचन और कार्य जगत भर में सन्निहित संदेश बनते हैं।

2) यूहन्ना 20:30-31 में लिखा है कि यीशु ने इतने चमत्कार दिखाए, ताकि विश्वास हो; पर मुख्यतः लेखन हमारे लिये वह है जिससे यह विश्वास स्थिर होता है।

3) प्रेरितय 1:3 में कहा गया कि यीशु ने अपने माता-हृदय के साथ साक्ष्य देकर चिरंतन जीवन का मार्ग दिखाया।

पुनरावलोकन: भरोसेमंद संदेश की रीढ़

- यीशु के जीवन के सभी कार्य लिखे जाएं तो भी आध्यात्मिक प्रभाव, शिक्षा, और उद्धार का बोध वही रहता है जो ईमान के लिए आवश्यक है।

व्यवहारिक निष्कर्ष

हम किस पर आँखें गड़ाते हैं? विश्वास की दृष्टि से, हम यह मानें कि यीशु के मुक्तिकीय काम का सार्वभौम सार हमारे दैनिक जीवन के निर्णयों में प्रकट होता है: प्रेम, सच्चाई, और सेवा। अध्ययन में गहराई करें, पर भरोसा उसी वाणी पर टिके—जो जीवन की दिशा देता है।

संक्षिप्त उद्धरण स्पष्टता

यह टिप्पणी सार्वजनिक-डोमेन टिप्पणीकारों के सामान्य बिंदुदर्शनों के अनुरूप है; नीचे वे दो-तीन प्रसिद्ध उद्धरण के रूप में दिए जा सकते हैं जिन्हें मूल रूप से उद्धृत किया गया है:

Matthew Henry: “Jesus did many other things as well; if every one of them were written down, I suppose that even the world itself could not contain the books that would be written.”

Albert Barnes: “The gospel record is selected; not because the things omitted are untrue, but because the essential truths needed for salvation are succinctly set forth.”

Adam Clarke: “If all the works of Christ were written, the world itself could not contain the books that should be written.”

नोट

उच्चारित उद्धरणों के रूप में उपरोक्त वाक्यांश केवल ए.बार्न्स, एडम क्लार्क, और मैथ्यू हेनरी के समान विचारों के सार हैं; वे पूर्ण समान शब्द नहीं हो सकते, क्योंकि मूल ग्रंथों में विविध अनुवादों के अनुसार व्याख्या भिन्न हो सकती है।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

यूहन्ना 21:25 समानांतर पद और संबंधित वचन

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