Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
यूहन्ना 21:1 यूहन्ना 21:2 यूहन्ना 21:3 यूहन्ना 21:4 यूहन्ना 21:5 यूहन्ना 21:6 यूहन्ना 21:7 यूहन्ना 21:8 यूहन्ना 21:9 यूहन्ना 21:10 यूहन्ना 21:11 यूहन्ना 21:12 यूहन्ना 21:13 यूहन्ना 21:14 यूहन्ना 21:15 यूहन्ना 21:16 यूहन्ना 21:17 यूहन्ना 21:18 यूहन्ना 21:19 यूहन्ना 21:20 यूहन्ना 21:21 यूहन्ना 21:22 यूहन्ना 21:23 यूहन्ना 21:24 यूहन्ना 21:25



यूहन्ना 21:5 पर टिप्पणी — प्रारम्भिक संदर्भ और गहराई
पद में यीशु के पुनरुत्थान के बाद के प्रसंग के दौरान मछुआरे फिर से नावों पर लौटकर जीवन-संघर्ष से जूझ रहे हैं। वे तिब्बती-सीमा पर जीवन के सामान्य कामों में उलझे रहते हैं, पर यीशु की आवाज़ उन्हें चुपचाप बुलाती है। यहाँ बच्चों से कहा गया, “हे बालकों, क्या तुम्हारे पास कुछ खाने को है?”— एक सरल, परंतु गहरे संकेत से कि यीशु नवीन जीवन की ज़रूरतों के बीच भी साथ है और दैनिक अस्तित्व की मानवीय वास्तविकताओं को अनदेखा नहीं करता।
पाठ से मिलता God या विश्वास का संदेश
यह दृश्य दो बातों को स्पष्ट करता है: पहली, यीशु का साथ होना और उनके इंतजार में व्यक्तिगत देखभाल; दूसरी, ऊर्जा और आशा की पुनर्स्थापना की प्रक्रिया। भोजन मांगना एक ऐसी स्थिति है जिसमें दिखता है कि समुदाय अभी भी कच्चे अनुभवों और भुखमरी के बीच है, और ईश्वर की निष्ठा उस कमी को भरने के लिए उपस्थित है। यह विश्वास को यह संदेश देता है कि ईश्वर हमारे दैनिक behov को भी मानते हैं और हमारी ज़रूरतों के समय में पहुँचे रहते हैं।
महत्वपूर्ण शब्दावलियाँ और चित्रीत चित्र
- बालक: इस शब्द से संबन्धित धारणा है कि शिष्य अभी भी सीख रहे हैं, असुरक्षा के क्षणों में ईश्वर के साथ निकटता की आवश्यकता है।
- खाने को है: भूख-संवाद सीधे जीवन के भौतिक पक्ष से जुड़ा है, पर यह प्रतीक है कि ईश्वर हमारे हर दिन के मॉडर्न-चाह को भी पूरा कर सकता है—भौतिक और आध्यात्मिक दोनों नहीं छोड़कर।
सम्बन्धित पारायणियाँ
• मत्ती 14:17-21 — पाँच रोटियाँ और दो मछলियाँ कथा के रूप में यह दर्शाती है कि प्रभु चंचल स्थिति में भी पर्याप्त व्यवस्था कर देते हैं।
• लूका 24:31-32 — यात्रा के समय दिलों में दृष्टि खुलना; प्रभु के साथ सहभागिता से आत्मा और समझ प्रबुद्ध होती है।
• यूहन्ना 21:12-14 — चित्र-नियम के अंतर्गत यीशु का पुनरागमन और मित्रों के साथ भोजन-संशय का पुनःस्थापन।
प्रासंगिक विचार: विशुद्ध पाठ्य-समाधान
- दृश्य संकेत देता है कि मछुआरे अपने कार्य में असफल प्रतीत होते हैं, पर यीशु उनके साथ रहते हैं और उनके दैनिक जीवन की आवश्यकताओं की परवाह करते हैं।
- “बालकों” संबोधन में क्राइस्ट की स्नेहपूर्ण और शिक्षक-सरलता झलकती है— एक ऐसा प्रेम जो शिष्यों को समर्थ बनाता है।
ऐतिहासिक-आधार से संकल्पना
पूर्व-ख़तों के प्रकाश में यह घटना आत्म-विश्वास की पुनर्स्थापना का अवसर है: प्रभु के साथ रहने से ही अपार आशा और पुनर्निर्माण संभव है।
आज के लिए अनुप्रयोग
ऊपर की प्रवृत्तियाँ Murray-थिंकर्स के सामाजिक-आध्यात्मिक रुझान से सामंजस्य बिठाती हैं। यदि आप चाहें तो यही विचार आगे बढ़ाकर नई-नई स्थितियों में भी अपनाये जा सकते हैं।
कॉट्रेक्टेड उद्धरण (सार):
नीचे यह ध्यान दें कि नीचे के देशों के Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के स्पष्ट उद्धरण सीधे टेक्स्ट-उद्धरण के रूप में उपलब्ध हैं; जहां संभव हुआ, उनके विचारों से मिलते-जुलते सार उपलब्ध कराए गए हैं।