Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
यूहन्ना 9:1 यूहन्ना 9:2 यूहन्ना 9:3 यूहन्ना 9:4 यूहन्ना 9:5 यूहन्ना 9:6 यूहन्ना 9:7 यूहन्ना 9:8 यूहन्ना 9:9 यूहन्ना 9:10 यूहन्ना 9:11 यूहन्ना 9:12 यूहन्ना 9:13 यूहन्ना 9:14 यूहन्ना 9:15 यूहन्ना 9:16 यूहन्ना 9:17 यूहन्ना 9:18 यूहन्ना 9:19 यूहन्ना 9:20 यूहन्ना 9:21 यूहन्ना 9:22 यूहन्ना 9:23 यूहन्ना 9:24 यूहन्ना 9:25 यूहन्ना 9:26 यूहन्ना 9:27 यूहन्ना 9:28 यूहन्ना 9:29 यूहन्ना 9:30 यूहन्ना 9:31 यूहन्ना 9:32 यूहन्ना 9:33 यूहन्ना 9:34 यूहन्ना 9:35 यूहन्ना 9:36 यूहन्ना 9:37 यूहन्ना 9:38 यूहन्ना 9:39 यूहन्ना 9:40 यूहन्ना 9:41

यूहन्ना 9:23 पर टिप्पणी: माता-पिता की सुरक्षा-नीति और विश्वास की परीक्षा
पद यूहन्ना 9:23 में çeşट रूप से दर्शाता है कि घायल अंधे की कहानी के बीच, लोगों के मन में भय और सामाजिक दबाव कैसे काम करते हैं। इस वाक्य में उसके माता-पिता कहते हैं, “वह सयाना है; उसी से पूछ लो।” इससे यह स्पष्ट होता है कि ईश्वर के महान कार्य को मान लेने में परिवार और समुदाय कितने दायित्ववाले क्षणों से गुजरते हैं। यह verse एक बहुप्रश्नीक घटना का हिस्सा है: किस पर भरोसा किया जाए, जब स्थिति चुनौतीपूर्ण हो और परिणामों के डर से लोग बोलना कम कर दें?
पद के अध्याय में संदर्भ और स्थिति
यह वाक्य यूहन्ना के gospel के उस भाग से जुड़ा है जहाँ यीशु ने अंधे व्यक्ति को दृष्टि दी। घटना के बाद लोगों के बीच बहस छिड़ती है—क्या यह दिव्य कार्य यहूदियों के नियमों के अनुरूप है, या धार्मिक नेता इसे खारिज कर देंगे? माता-पिता का यह उत्तर दर्शाता है कि वे क्यों बोलते नहीं: वे जानते हैं कि उनके बेटे के लिए बोलना जोखिम भरा है, और वे नहीं चाहते कि गलत प्रशंसा या दुष्कर्म उनके परिवार पर पड़े।
मुख्य आध्यात्मिक पाठ
इस verse का सबसे महत्वपूर्ण पाठ यह है कि विश्वास के निर्णय में डर और सामाजिक दबाव भी एक भूमिका निभाते हैं, परन्तु वास्तविक विश्वास स्वयं परख के क्षण में पहचाना जाता है। माता-पिता का उत्तर दिखाता है कि वे इस नई स्थिति में बड़े परिपक्व होकर कहते हैं, “वह सयाना है; उसी से पूछ लो,” अर्थात वे यीशु के कार्य के सत्यता या उसकी अस्थिरता के दायरे में नहीं आना चाहते। इससे यह निष्कर्ष निकलता है कि असली विश्वास कभी-भी व्यक्तिगत दबावों से ऊपर उठकर सत्य की खोज में खड़ा होता है।
अन्य पवित्र ग्रंथों से तुलना
- मत्ती 10:21-22 में कहा गया है कि परिवारजन कभी-कभी अपने आप के विरुद्ध उठते हैं, और विश्वास की चपलता उनके निर्णयों को प्रभावित करती है; यहां भी परिवार का डर दिखाई देता है।
- मरकुस 3:20-35 में यीशु के साथ परिवार की चिंताजनक स्थिति आती है; समुदाय और परिवार के आग्रह के बीच संतुलन रखना चुनौतीपूर्ण हो सकता है, किन्तु यीशु की बात सत्य के अनुरूप रहती है।
- प्रेषित 4:19-20 में Peter और John के फैसले का उदाहरण है: सामाजिक दबाव के बावजूद, विश्वास के संदेश को बोलना चाहिए।
व्यावहारिक अनुप्रयोग
संप्रेषणीय आत्म-साक्ष्य और क्रॉस-रेफरेंसे
यहाँ तीन संकेंद्रित क्रॉस-रेफरेंसे दी जा रही हैं:
- मत्ती 10:21-22: परिवारजन के दवाब के बीच विश्वास की कसौटी।
- मरकुस 3:20-35: परिवार-सम्बन्ध और समाज-प्रतिष्ठा के दबावों के बीच यीशु की भूमिका।
- प्रेरित 4:19-20: भय के समय भी ईश्वर के उद्देश्य के पक्ष में बोलना।
संक्षेप निष्कर्ष
यूहन्ना 9:23 में माता-पिता का उत्तर एक बुनियादी शिक्षा देता है: कभी-कभी परिवार-परिवार की सुरक्षा के कारण लोग व्यक्तिगत विश्वास की प्यास को दबा देते हैं; परन्तु वास्तविक विश्वास सत्य के प्रकाश के सामने साहसपूर्वक खड़ा रहता है। यह verses हमें याद दिलाता है कि ईश्वर के कार्य को पहचानना और दूसरे को उसका प्रमाण देना, भय या सामाजिक दबाव से परे है—और यह एक नयी दृष्टि देता है कि धर्म-सम्मत जीवन में धैर्य, सत्यता और दृढ़ विश्वास कैसे अद्भुत चमत्कार बन सकते हैं।
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उद्धरण स्रोत: मैथ्यू हेनरी, अल्बर्ट बार्न्स और एडम क्लार्क के सार्वजनिक-डोमेन टिप्पणीकार प्रमाण से प्रेरित समन्वित पाठ्यांश; संलग्न उद्धरण नीचे दिए जाते हैं यदि उपयुक्त मिलें:
“वह सयाना है; उसी से पूछ लो।” — पाठ के भीतर संदर्भ