Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
यूहन्ना 9:1 यूहन्ना 9:2 यूहन्ना 9:3 यूहन्ना 9:4 यूहन्ना 9:5 यूहन्ना 9:6 यूहन्ना 9:7 यूहन्ना 9:8 यूहन्ना 9:9 यूहन्ना 9:10 यूहन्ना 9:11 यूहन्ना 9:12 यूहन्ना 9:13 यूहन्ना 9:14 यूहन्ना 9:15 यूहन्ना 9:16 यूहन्ना 9:17 यूहन्ना 9:18 यूहन्ना 9:19 यूहन्ना 9:20 यूहन्ना 9:21 यूहन्ना 9:22 यूहन्ना 9:23 यूहन्ना 9:24 यूहन्ना 9:25 यूहन्ना 9:26 यूहन्ना 9:27 यूहन्ना 9:28 यूहन्ना 9:29 यूहन्ना 9:30 यूहन्ना 9:31 यूहन्ना 9:32 यूहन्ना 9:33 यूहन्ना 9:34 यूहन्ना 9:35 यूहन्ना 9:36 यूहन्ना 9:37 यूहन्ना 9:38 यूहन्ना 9:39 यूहन्ना 9:40 यूहन्ना 9:41



ार्थ: यह वचन ईशु ने शब्त के दिन मिट्टी से आंखें खोलकर चमत्कार दिखाने का संकेत है—Jesus ने यह किया ताकि सत्यप्रकाश और परमेश्वर की कृपा स्पष्ट हो सके
पाठ का प्रत्यक्ष अर्थ: यीशु ने एक आदमी की आंखों पर मिट्टी बनाई, उसे लगाया और उसके आँखों पर पानी डाला। यह सब्त के दिन था; फिर उसने व्यक्ति को जाने को कहा ताकि वह देख सके और वह व्यक्ति यीशु पर विश्वास करे।
प्रसंगिक पृष्ठभूमि: यूहन्ना 9 अध्याय में, दृष्टिहीन व्यक्ति की चिकित्सा की कथा है जो समाज के भीतर अलगाव और धार्मिक परंपराओं के दबाव के बीच यीशु की पहचान और प्रेरणा को उजागर करती है। शब्त के नियमों पर बहस भी उभरती है—कथा दिखाती है कि यीशु के कार्य मानवूचित दर्द को दूर करने में परमेश्वर के राज्य की उपस्थिति को कैसे संकेतित करते हैं।
व्याख्या के मुख्य बिंदु:
संक्षिप्त विचार-सूची
संदर्भ-योजनाएं (Cross-references) — पाठक के लिए संक्षेप स्पर्श:
दृष्टिकोण और व्यावहारिक निष्कर्ष
हमेशा याद रखें: प्रभु के काम में सच्चा विश्राम और स्वतंत्रता उन लोगों के लिए है जो ईश्वर की कृपा को स्वीकारते हैं। शब्त नियमों की कड़ाई कभी-कभी लोगों को ईश्वर के दिव्य कार्य को देखने से रोकती है; यीशु का चमत्कार बताता है कि परमेश्वर की रोशनी अंधे को भी मार्ग दिखाती है और विश्वास की दिशा देती है।
पूर्व-लेखन निष्कर्ष
इस कथा में Matthew Henry, Albert Barnes, और Adam Clarke के संक्षिप्त कथन से मिलती-जुलती धारणा निकलती है, कि यीशु का चमत्कार मानवीय दयादत्ता के साथ शास्त्र-नियमों के सही संतुलन को प्रस्तुत करता है।