Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
विलापगीत 2:1 विलापगीत 2:2 विलापगीत 2:3 विलापगीत 2:4 विलापगीत 2:5 विलापगीत 2:6 विलापगीत 2:7 विलापगीत 2:8 विलापगीत 2:9 विलापगीत 2:10 विलापगीत 2:11 विलापगीत 2:12 विलापगीत 2:13 विलापगीत 2:14 विलापगीत 2:15 विलापगीत 2:16 विलापगीत 2:17 विलापगीत 2:18 विलापगीत 2:19 विलापगीत 2:20 विलापगीत 2:21 विलापगीत 2:22



मुख्य व्याख्यात्मक बिंदु
यह विलापगीत 2:22 ईश्वरीय क्रोध की तीव्रता तथा यहोवा की लापरवाही नहीं, बल्कि उसके न्याय की कठोरता को दर्शाता है। शास्त्रीय सूक्तियाँ कहती हैं कि इस ह्रास का कारण नीति, पापकर्म और सत्ता के दुरुपयोग से जुड़ा है; परन्तु poetaic पाठ में यह भी स्पष्ट होता है कि यह संकट परमेश्वर के चिह्नित निर्णय का भाग है ताकि जो निष्ठा-भंग करते हैं, उनसे सावधानियाँ बरती जा सकें। यहाँ का पाठ यह बताता है कि दया, सुरक्षा, और पाल-पोषण की विपदा में भी प्रभु की योजना चलती है; वह अपने लोगों को अदृश्य रूप से कठोर समय से गुजरवाता है ताकि वे अंततः उसकी पवित्र स्वीकृति में पुनः स्थिर हों।
पाठ-संदर्भ: साहित्यिक संदर्भ
विलापगीत का यह भाग विदेश-चाह और राजसी धाँधली के बीच बना एक नागरिक-संकट है जिसमें नाको-झोंक, बुढ़ापे और बच्चों के स्वास्थ्य-नाश के चित्र मिलते हैं। यहोवा के क्रोध की ध्वनि में, एक कुटुंब–परिवारिक क्षय का मार्मिक दृश्य है। यह शोक-गीत का एक उभरा हुआ मोड़ है जो यह दर्शाता है कि पिता-पुत्र और मातृ-तन में साधारण सहजता भी कैसे टूट सकती है जब नियत दिन आ पहुँचे।
धर्मशास्त्रीय महत्त्व
1) न्याय और दया का संतुलन: गीत के कड़क बोल यह दिखाते हैं कि परमेश्वर अपने चुने हुए लोगों के लिए न्यायपूर्ण निर्णायक समय तय करता है। 2) व्याख्या में आशा की कमी नहीं: भय और विनाश के बीच भी परमेश्वर के भय के कारण जो नियत पर्व बुलाये जाते हैं, वे एक उद्धारकारी क्रम को संकेत करते हैं। 3) राजसी सत्ता का परिदृश्य: यह पाठ राज्य-व्यवस्था के भीतर जनता के लिए क्रूर सच को उजागर करता है, परंतु हर परिस्थिति में परमेश्वर के Sovereign नियंत्रण की पुष्टि करता है।
पवित्रशास्त्र के साथ सम्बन्ध (Cross-references)
इन संदर्भों से स्पष्ट होता है कि दयालुता और न्याय एक साथ चलते हैं और प्रतिकूल क्षण भी परमेश्वर के उद्देश्य को पूरा करने के साधन बनते हैं।
आत्म-चिंतन के प्रश्न
संक्षिप्त निष्कर्ष
विलापगीत 2:22 यह दर्शाता है कि परमेश्वर की करुणा और न्याय दोनों साथ चलते हैं। भय के कारणों से नियत पर्व बुलाने वाले दृश्य में भी वह अपने लोगों के लिए एक नियोजित क्रम रचते हैं ताकि वे विपत्ति के अंदर भी ईश्वर की अखंड स्थिति और सांसारिक व्यवस्था के प्रति समर्पण को स्मरण करें। यह पाठ हमें यह सिखाता है: कड़वे क्षणों में भी परमेश्वर के नेतृत्व पर टिके रहें; 그는 एक उद्धारक क्रम में हमारी पीड़ा को भी लाभ में बदल सकता है।
सूत्र-सार
आमतौर पर मैथ्यू हेनरी, एल्बर्ट बार्न्स और एडम क्लार्क जैसे यूटिलिटी-कोट्स का छोटा सा अंश इस पाठ के लिए मूल्यवान हो सकता है। उदाहरण के लिये: “यहाँ परमेश्वर का क्रोध और उसकी करुणा एक साथ चलती हैं; वह अपने लोगों को कष्ट देते हैं ताकि उनकी आत्मा में सत्य की जागृति हो।” (उद्धरण स्वरूप वास्तविक ग्रंथों के संक्षेपार्थ, कृपया मूल टिप्पणियाँ देखें।) यह विचार इस टिप्पणी में सम integrated रूप से संदर्भित है कि निष्ठा-भंग के परिणामस्वरूप मिलने वाला दारुण परिश्रम भी ईश्वर के उद्धार-योजना का हिस्सा है।