Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
विलापगीत 2:1 विलापगीत 2:2 विलापगीत 2:3 विलापगीत 2:4 विलापगीत 2:5 विलापगीत 2:6 विलापगीत 2:7 विलापगीत 2:8 विलापगीत 2:9 विलापगीत 2:10 विलापगीत 2:11 विलापगीत 2:12 विलापगीत 2:13 विलापगीत 2:14 विलापगीत 2:15 विलापगीत 2:16 विलापगीत 2:17 विलापगीत 2:18 विलापगीत 2:19 विलापगीत 2:20 विलापगीत 2:21 विलापगीत 2:22



विलापगीत 2:5 का तात्पर्य और संदर्भ
यह verse निश्चय ही विलापगीत का तीखा संकेत है जहाँ यरूशलेम के दोलनों में यहोवा की कठोरता औरasmine युद्ध-हानि स्पष्ट दिखती है। संदर्भ में यह भाग यहोवा द्वारा इस्राएल पर प्रतिशोध के रूप में उसकी दुर्दशा का वर्णन करता है: नगर के महलों, गढ़ों औरावासों को उसने नष्ट कर दिया। यहूदा की पुत्री का रोना-पीटना भी स्पष्ट है—लोक अपने पूर्ववत् सुरक्षा और सम्मान के खो जाने से विक्षिप्त है। इस पंक्ति में परमेश्वर को “शत्रु” के रूप में दिखाया गया है, जो इस्राएल पर आघात कर रहा है क्योंकि उन्होंने परमेश्वर के आदेशों को न मानने का परिणाम भुगता।
मूल तात्पर्य और केंद्रीय विचार
1) संकेतित आघात: यहोवा का विरोधी बनना और इस्राएल के विरुद्ध युद्ध-स्थिति अपनाना—यानी न्याय का परिणाम, न कि अभीष्ट आंशिक मनोबल।
2) शहर-विहीनता: भवनों, दृढ़ गढ़ों और नगर-स्वामित्व के क्षय से सामाजिक-आर्थिक संहति को चोट।
3) दीन-हृदय रोना: यहूदा की पुत्री का विलाप—पारिवारिक और सामुदायिक श 스ंवेदना का प्रतीक, स्थायित्व खोने के बाद की आम पीड़ा।
कुंजी थीम्स
संगत आयाम/अन्वय (cross-references के संकेत)
• तेहराईन के अन्य विलापगीत जहाँ परमेश्वर की नाराज़गी और शहरों के विनाश का दृश्य आता है—यह संकेत देता है कि परमेश्वर की पुख्ता न्याय-चेतावनियाँ समाज के लिए मार्गदर्शक चेतावनी होती हैं।
• इतिहास-प्रत्यय में बुराइयों के परिणामस्वरूप दिखे गए ‘रोना-पीटना’ के चित्र, जिसे पुराने नियम की अन्य पुस्तकों में भी दोहराव के रूप में मिलता है।
नोट: यदि आप संदर्भ verses की संक्षिप्त पंक्ति देखना चाहें तो देखें, किन्तु पूर्ण वाक्य नहीं।
व्यावहारिक विचार
परमेश्वर के न्याय-प्रकाश से सीख: अस्थायित्व के समय भी व्यक्ति और समाज को पवित्रता, निष्ठा और समुदाय-समर्थन के लिये पुनः प्रतिबद्ध होना चाहिए। दुख के क्षण में भी धार्मिक-आस्था बनाए रखना और पाप के कारण आई चुनौतियों का सचेत आकलन करना चाहिए।
संक्षिप्त समापन
यह verse इस्राएल पर परमेश्वर के न्याय की कड़वी परत को दिखाता है—शहरों के ध्वंस और पलायन से उभरने वाले रोने और भविष्य के पुनर्निर्माण की दिशा का संकेत भी देता है। यह हमें स्मरण कराता है कि विपत्ति के बीच सत्य की खोज और पंक्तिबद्ध आस्था ही उद्धार का मार्ग बनते हैं।
संक्षिप्त उद्धरण (पाबंदी)
इस पाठण में Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के जुड़ाव से जुड़ी प्रत्यक्ष संक्षिप्त वाक्य-उद्धरण उपलब्ध नहीं हैं; यदि चाहें तो उनके सार्वजनिक-डिपार-टिप्पणियों के विशिष्ट शाब्दिक उद्धरण स्पष्ट संदर्भ के साथ दिए जा सकते हैं।