Old Testament
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यिर्मयाह 30:14 पर टिप्पणी — मित्रों की निष्क्रियता और दण्ड का कारण
यह पद यिर्मयाह की पुस्तक के उन गम्भीर दिनों का वर्णन करता है जब इस्राएल-यहोवा के साथ के सन्धि टूटने के कारण परमेश्वर ने उन्हें दण्डित किया। यहाँ यह दिखाया गया है कि मानवीय रिश्ते और सामाजिक सहयोग कितने अस्थिर हो जाते हैं जब नैतिकता और पाप के परिणाम स्पष्ट रूप से उभरते हैं। शत्रुओं के द्वारा प्रहार होना, और अपने ही मित्रों के कारण टूटना—ये दोनो संकेत एक ही तथ्य को उजागर करते हैं:_pात और दण्ड तब तक स्थिर रहते हैं जब तक पाप परीत हो, परन्तु परमेश्वर की शिक्षा और प्रावधान भी उसमें पूर्ण रूप से प्रवेश पाते हैं।
पद का परिचय—इस chapter के संदर्भ में
यिर्मयाह 30 आशावाद और उद्धार की भविष्यवाणी के साथ शुरू होता है, पर साथ ही यह यहूदियों के लिए एक तीखा आह्वान भी है कि वे 하나님 के वचन के अनुसार लौट आएँ। 30:14 में जिस दुष्कर स्थिति का उल्लेख है, वह बताती है कि जब लोग परमेश्वर के अनुसार नहीं चलते, तो उनके मित्र और सहयोगी भी उनके साथ नहीं रहते। यह अयोधना नहीं, बल्कि ईश्वर की न्यायपूर्ण प्रक्रिया का भाग है कि पाप के कारण सामाजिक रिश्ते टूटते हैं।
मुख्य अधिष्ठान—इस Verse की मुख्य सीख
मुख्य संदेश यह है कि पाप समाजिक और व्यक्तिगत दोनों तरह से प्रभाव डालता है। ऐेसे समय में मित्र भी ग़ायब हो जाते हैं, क्योंकि शुचिता और समर्पण के बिना रिश्ते टिक नहीं पाते। परन्तु यह न्याय भी दिखाता है कि परमेश्वर अपने लोगों को दण्ड देकर उनका उद्धार अभी भी चाहते हैं; शत्रु बनकर दंड देना उनके प्रतिरूप नहीं, बल्कि पापकर्म के कारण हुए सामाजिक पतन की भरपाई की चेतावनी है।
अनुकरणीय स्रोतों से संचित प्रकाश
यह अध्याय पढ़ते समय पुराने टिप्पणीकारों की धारणा उभरती है कि हवाला और दण्ड का यह क्रम परमेश्वर की पवित्रता के अनुरूप है।
Matthew Henry से संक्षिप्त संकेत: Henry कहते हैं कि यह दण्ड का भाव यह दर्शाता है कि परमेश्वर किस प्रकार पाप के कारण आती सजा के द्वारा अपने लोगों को सचेत करते हैं, ताकि वे फिर मन की उधार-तोड़ से लौटें।
Albert Barnes से संक्षिप्त संकेत: Barnes इस तथ्य पर प्रकाश डालते हैं कि मित्रों की असहायता पाप की चरम सीमा को इंगित करती है—जब सामाजिक रिश्ते टूट जाएँ, तब कितनी गहरी चोट लगती है और यह साक्ष्य देता है कि परमेश्वर समाज की व्यवस्था को बनाए रखने के लिए सुधार से नहीं चूकते।
Adam Clarke से संक्षिप्त संकेत: Clarke यह मानते हैं कि दण्ड का उद्देश्य नैतिक पथ लौटना है; शत्रु बनकर प्रहार से यह चेतावनी मिलती है कि पाप परिवारों और समुदायों के भीतर एक संवाहक के रूप में कैसे फैलता है।
क्रॉस-रेफ़रेंसेस और उनके अनुप्रयोग
संकेतक यह कि सामाजिक सम्बन्ध टूटना पाप के साथ जुड़ा है, परन्तु परमेश्वर की दया और उद्धार की योजना वहाँ भी प्रवेश करती है।
व्यावहारिक अनुप्रयोग
संक्षेप में
यिर्मयाह 30:14 में मित्रों के पीछे हट जाने की बात यह संकेत देती है कि पाप से समाज में कैसे अस्थिरता आती है। परन्तु यह भी स्पष्ट है कि दण्ड के बीच परमेश्वर की करुणा और उद्धार की राह खुली रहती है, ताकि लोग लौटकर अपने परमपूज्य स्वामी के साथ फिर से जुड़ सकें।