Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
लैव्यव्यवस्था 1 लैव्यव्यवस्था 2 लैव्यव्यवस्था 3 लैव्यव्यवस्था 4 लैव्यव्यवस्था 5 लैव्यव्यवस्था 6 लैव्यव्यवस्था 7 लैव्यव्यवस्था 8 लैव्यव्यवस्था 9 लैव्यव्यवस्था 10 लैव्यव्यवस्था 11 लैव्यव्यवस्था 12 लैव्यव्यवस्था 13 लैव्यव्यवस्था 14 लैव्यव्यवस्था 15 लैव्यव्यवस्था 16 लैव्यव्यवस्था 17 लैव्यव्यवस्था 18 लैव्यव्यवस्था 19 लैव्यव्यवस्था 20 लैव्यव्यवस्था 21 लैव्यव्यवस्था 22 लैव्यव्यवस्था 23 लैव्यव्यवस्था 24 लैव्यव्यवस्था 25 लैव्यव्यवस्था 26 लैव्यव्यवस्था 27Verse
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लैव्यव्यवस्था 19:17 का पठन-आत्मा: पड़ोसी के प्रति नफरत नहीं, बल्कि चユकन-चेतना
पाद में कहा गया है कि अपने मन में एक दूसरे के प्रति बैर न रखना चाहिए और पड़ोसी को उचित रूप से डाँटना चाहिए ताकि उसके पाप का भार तुम्हारे ऊपर न आये। इसका संदर्भ यीशु मसीह के संदेश से जुड़ता है जहाँ नम्र correction और परम मित्रता ही समुदाय की सुरक्षा करते हैं (मत्ती 18:15-17). यहाँश्वर स्पष्ट करते हैं कि प्रेम और सत्य, दोनों का संतुलन आवश्यक है: न तो द्वेष रखना ठीक है और न ही अन्य के पापों को अनदेखा करना।
मुख्य विषय और समझ
हमारे पीछे के बृहद संदर्भ
पाठ-आचरण पर प्रस्तावित व्यावहारिक विचार
- अपने मन में किसी के विरुद्ध बैर न रखें; यदिদন্ত के कारण कुछ गलतियाँ दिखें तो शांति से, स्पष्ट शब्दों में बताएं।
- पड़ोसी के दोषों के बारे में केवल उस परिस्थिति में बोलें जब उससे संबंधित प्रश्न या सुधार संभव हो, ताकि समुदाय में विश्वास बना रहे।
- किसी गलती पर क्रोध या डाँटना ईमानदारी से हो, पर वह मर्म को घायल करने वाला न हो; जिससे दया और सत्य दोनों साथ चलें।
संयुक्त सार
यह Verse सामाजिक कानून के मूल में स्थित है: प्रेम के साथ सत्य का संयोजन। बैर न रखना और उचित सुधार के बीच संतुलन से समुदाय सुरक्षित और पवित्र रहता है। यह दृष्टिकोण दो प्रमुख स्रोतों से जुड़ा है—पड़ोसी के प्रति minimal दोष-निर्वाण और प्यार-भरे निष्पक्ष सुधार की कला।
संक्षिप्त समापन
जब चारों ओर दया और सत्य का संतुलन होता है, तब न केवल व्यक्तियों के रिश्ते सुधरते हैं, बल्कि पूरा समाज शुद्ध और सुरक्षित बनता है। प्रयास करें कि अपने मन में बैर न पनपे और आवश्यक हो तो प्रेम-युक्त डाँटना से गलतियाँ सुधारी जाएँ।
पुनरावलोकन उद्धरण (संक्षेप)
पूर्ववर्ती टिप्पणीकारों के चर्चित शब्द इस धरातल पर अगस्त्य की तरह नहीं रहते, पर उनकी दृष्टि यह है कि क्रोध और सुधार के बीच संतुलन से नैतिक समुदाय बनता है।