Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
लैव्यव्यवस्था 1 लैव्यव्यवस्था 2 लैव्यव्यवस्था 3 लैव्यव्यवस्था 4 लैव्यव्यवस्था 5 लैव्यव्यवस्था 6 लैव्यव्यवस्था 7 लैव्यव्यवस्था 8 लैव्यव्यवस्था 9 लैव्यव्यवस्था 10 लैव्यव्यवस्था 11 लैव्यव्यवस्था 12 लैव्यव्यवस्था 13 लैव्यव्यवस्था 14 लैव्यव्यवस्था 15 लैव्यव्यवस्था 16 लैव्यव्यवस्था 17 लैव्यव्यवस्था 18 लैव्यव्यवस्था 19 लैव्यव्यवस्था 20 लैव्यव्यवस्था 21 लैव्यव्यवस्था 22 लैव्यव्यवस्था 23 लैव्यव्यवस्था 24 लैव्यव्यवस्था 25 लैव्यव्यवस्था 26 लैव्यव्यवस्था 27Verse
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मुख्य निहितार्थ
लैव्यव्यवथा 19:7 में दिया गया निर्देश बताता है कि यदि किसी पवित्र वस्त्र, पकवान या अन्य औचित्य के साथ “तीसरे दिन” कुछ भी ग्रहण किया जाए, तो वह घृणित ठहरेगा और ग्रहण नहीं किया जाएगा। यह नियम केवल आचार-विचार के सापेक्ष नहीं, बल्कि स्पष्ट आधिकारिक कारणों से थाती रखता है कि पवित्र कृत्य या खाद्य-उत्पाद में एक निर्दिष्ट समय-सीमा के भीतर पवित्रता और निष्ठा बनी रहे। यह स्थिति यह दर्शाती है कि परमेश्वर के नियमों में समय-सीमा, शुद्धता और प्रिय निवास के लिए एक सुव्यवस्थित ढांचा है।
पाठ-संदर्भ की सृष्टि और साहित्यिक संदर्भ
यह उद्घोषणा ल्यव्यव्यवस्था के कुल नियम-संकलन के भीतर पवित्रता के कार्यक्रम को मजबूत करती है। तीसरे दिन का संकेत तब आता है जब प्रत्यक्ष पूजा या दान का क्रम पूरी तरह सम्पन्न हो रहा होता है; यदि इसे बिना पूर्ण शुद्धि के ग्रहण कर लिया जाए, तो विध्वंसात्मक परिणाम और निषेध दिखाई देते हैं। यह धार्मिक-नियमन केवल बाहरी आचरण नहीं है, बल्कि आंतरिक शुद्धता और कर्तव्यनिष्ठा को भी सूचित करता है।
विश्वास-सम्बंध और theological significance
यह वाक्य पवित्रता के साथ समर्पण की गहराई को उजागर करता है—परमेश्वर के साथ समुदाय की पवित्रता का मूल्य। पुनरावर्तन में, इस प्रकार के नियम यह बताते हैं कि हर अवसर पर, भगवान के पवित्र आह्वान को सम्मान के साथ स्वीकारना चाहिए और बिना विलंब या अल्पता के उसे उचित क्रम में पूरा करना चाहिए। यह विषय आधुनिक नैतिक जीवन के लिए भी अनुरूप है: आचरण में शुद्धता और समय परता बनाये रखना।
क्रॉस-रेफ़रंस आदि संपर्क
स्व-विचार के लिए प्रश्न
सारगर्भ निष्कर्ष
प्रश्न यह है कि हम परमेश्वर के पवित्र नियमों को कितनी सावधानी और उत्साह के साथ स्वीकारते हैं। यदि किसी वस्तु या क्रिया के साथ असमान्य देरी या अधूरी तैयारी हो, तो उसका प्रभाव समुदाय के पवित्रता-लाभ पर पड़ सकता है। इसलिए संयम, शुद्धता और समय पर पालन हमारे आस्थागत जीवन के मूल तत्व बन जाते हैं।
आर्काइव संदर्भ उद्धरण (केवल संक्षेप में)
अगर आप चाहें, तो प्राचीन टिप्पणीकारों की धारणा इस प्रकार है: मालिकान Henry, Barnes और Clarke ने पवित्रता, समय-सीमा और आचरण की सावधानी पर बल दिया है। “यह नियम आचार-व्यवस्था में पवित्रता के लिए एक स्पष्ट ढांचा देता है,” जैसी धारणा अनेक टिप्पणियों में मिलती है।
नोट: नीचे दिए गए उद्धरण केवल संक्षेप में हैं; पूर्ण पाठ उपलब्ध टिप्पणी-ग्रंथ में देखें।
उद्धृत टिप्पणियों के संकेत
ऐतिहासिक सार्वजनिक डोमेन टिप्पणीकारों के विचारों का समन्वय अनिवार्य है। यदि किसी कार्य के छोटे-छोटे कथन मिलें, उनका वेधित उल्लेख किया गया है—यथा Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke के छोटे चंद कथन।