Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
लैव्यव्यवस्था 1 लैव्यव्यवस्था 2 लैव्यव्यवस्था 3 लैव्यव्यवस्था 4 लैव्यव्यवस्था 5 लैव्यव्यवस्था 6 लैव्यव्यवस्था 7 लैव्यव्यवस्था 8 लैव्यव्यवस्था 9 लैव्यव्यवस्था 10 लैव्यव्यवस्था 11 लैव्यव्यवस्था 12 लैव्यव्यवस्था 13 लैव्यव्यवस्था 14 लैव्यव्यवस्था 15 लैव्यव्यवस्था 16 लैव्यव्यवस्था 17 लैव्यव्यवस्था 18 लैव्यव्यवस्था 19 लैव्यव्यवस्था 20 लैव्यव्यवस्था 21 लैव्यव्यवस्था 22 लैव्यव्यवस्था 23 लैव्यव्यवस्था 24 लैव्यव्यवस्था 25 लैव्यव्यवस्था 26 लैव्यव्यवस्था 27Verse
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सीधे अर्थ की घोषणा
लैव्यव aturan 19:34 में परमेश्वर स्पष्ट करते हैं कि पृथ्वी पर रहने वाले परदेशी के प्रति आत्मीयता और समभाव का व्यवहार उन्हें देशी समान रखना चाहिए, क्योंकि वे भी मिस्र देश में परदेशी थे। परमेश्वर का यह निर्देश आजीविका और समाज-निर्माण में समानता और करुणा की नींव रखता है।
स्थिति-परिस्थिति और पृष्ठभूमि
यह節 कानून-ग्रंथ का हिस्सा है जिसमें समाज-नियम और व्यापारी-व्यवहार स्पष्ट होते हैं। इस समय के यहूदी समाज एक अलग समुदाय के रूप में व्यवस्थित था, परंतु विदेशी या परदेशी लोगों के लिए भी मानवीय सम्मान और आवश्यक सुरक्षा का नियम दिया गया था। यह अछि बात है कि वे वर्षों से मिस्र में रहते थे और उनकी भगावन-विधाता के प्रति अटूट आस्था थी; इस लिए इन्होंने अपने जैसे एक दूसरे पर प्रेम दिखाने की शिक्षा ग्रहण की।
व्याख्यात्मक अवलोकन
छोटी थीम-वस्तुनिष्ठ सूची
उल्लेखित क्रॉस-रेफरेंसेस (संकेतित रूप से) और उनके सार
1) निर्गमन 12:48-49— एक समान नियम: परदेशी के संग समान व्यवहार, यदि वह पालन करे तो उसे भी कानून-ग्रहण की अनुमति।
2) अतिथि-आतिथ्य परजीव— शास्त्र में परदेशी के सम्मान से गहराई है; यह दिखाता है कि समुदाय की आस्था और आचार-व्यवहार सभी के लिए खुला होना चाहिए।
3) व्यवस्थावाक्य 22:21— भाषागत-स्वतंत्रता और न्यायपूर्ण व्यवहार का अभिप्राय: दूसरों के साथ उचित व्यवहार से सामाजिक सुरक्षा बनी रहती है।
हिंदी में हल्के-फुल्के निष्कर्ष
यह आयत एक सामाजिक-आचार के अग्रदूत के रूप में कार्य करती है: किसी भी समाज में जो व्यक्तियाँ अलग पृष्ठभूमि से आती हैं, उन्हें भी सम्मान, सुरक्षा और समान अधिकार मिलना चाहिए। परदेशी के प्रति प्रेम सिर्फ भावनात्मक नहीं, बल्कि व्यवहारिक जिम्मेदारी है—रोज़मर्रा की नीति, क्रय-विक्रय, शांति और सौहार्द के लिए एक स्थिर आधार।
कथन-प्रतिध्वनि (फरमाइश और स्रोत-रेफरेंस)
पवित्र ग्रंथों के सार्वजनिक डोमेन टिप्पणियाँ इन शब्दों के पीछे की नीतियों को संजोती हैं—खासकर Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke की कामकाज-आचार-सार में। इन टिप्पणियों के छोटे उद्धरण यदि उपलब्ध हों, वे पाठ के साथ समरस रूप से प्रस्तुत किए जाते हैं, ताकि पठन-यात्रा में संदर्भ स्पष्ट हों.
व्यावहारिक takeaway
अपने समुदाय में जो बाहर से आए हैं, उनके साथ मूल-नागरिक के समान व्यवहार और सुरक्षा दें। व्यावसायिक और सामाजिक जीवन में हर आवाज़ को स्वीकारें, ताकि समाज का व्यवहार–न्याय और करुणा का दर्पण बन सके।