Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
निर्गमन 1 निर्गमन 2 निर्गमन 3 निर्गमन 4 निर्गमन 5 निर्गमन 6 निर्गमन 7 निर्गमन 8 निर्गमन 9 निर्गमन 10 निर्गमन 11 निर्गमन 12 निर्गमन 13 निर्गमन 14 निर्गमन 15 निर्गमन 16 निर्गमन 17 निर्गमन 18 निर्गमन 19 निर्गमन 20 निर्गमन 21 निर्गमन 22 निर्गमन 23 निर्गमन 24 निर्गमन 25 निर्गमन 26 निर्गमन 27 निर्गमन 28 निर्गमन 29 निर्गमन 30 निर्गमन 31 निर्गमन 32 निर्गमन 33 निर्गमन 34 निर्गमन 35 निर्गमन 36 निर्गमन 37 निर्गमन 38 निर्गमन 39 निर्गमन 40Verse
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निर्गमन 12:48—परदेशी के पर्व का मानना और खतना
परदेशी जो भी यहोवा के पर्व को मानना चाहे, उसे अपने यहाँ के सब पुरुषों का खतना कराकर भीतर आने देना चाहिए, फिर वह समीप आकर उसे मान लेगा; देशी मनुष्यों के समान ठहरेगा। पर जो खतना नहीं कराए, वह पर्व में खाने से निष्क्रमित रहा है।
इस पाठ से परमेश्वर का दृष्टिकोण और विश्वास
यह शासकीय नियम कलीसिया-गठन की नींव का संकेत देता है कि समुदाय एक परीक्षा-क्षण में एकात्मकता कैसे बनाता है। यहाँ परदेशी को भी यहोवा के नियमों के अनुसार भागीदारी हेतु धार्मिक परंपरा में प्रवेश पाने का अवसर दिया गया है, बशर्ते वह चिन्ह-योजना को स्वीकार करे। खतना एक बाह्य संकेत है जो आंतरिक परिवर्तन और समुदाय में सम्मिलन का प्रतीक बनता है। यह पीढ़ीगत रूप से यहूदी और गैर-यहूदी के बीच के भेद को धीरे-धीरे एकता की दिशा में मोड़ने का संकेत है, ताकि सब मिलकर एक परमेश्वर की सेवा करें।
महत्त्वपूर्ण शब्दों और चित्रों की स्पष्टता
अनुशंसित पारिवारिक और पार्श्व-संबंध पाठ
उसी समय के संदर्भ से जोड़े जाने वाले कुछ नेय-तत्व:
क्रॉस-रेफरेंसेस और उनकी संक्षिप्त व्याख्या
1) उत्पत्ति 17:10-11 (खतना का आरम्भिक आदेश): यह संकेतता है कि खतना ईश्वरीय समझौते के प्रतीक के रूप में स्थानीय समुदाय के भीतर प्रवेश का कड़ाव है।
2) रोमियों 2:28-29 (हृदय की खतना बनाम बाहरी चिन्ह): नए धार्मिक आयाम में बाह्य चिन्ह का आध्यात्मिक महत्व समझाते हैं—आत्मा की खतना ही प्रमुख है।
3) 1 कुरिन्थियों 12:13 (एक ही आत्मा से सभी एक समुदाय में प्रवेश): यह पाठ बताता है कि मानवीय पूर्वाग्रहों के बंधन टूटते हैं जब ईश्वर के आत्मा से नया जीवन मिलता है।
आज के संदर्भ में व्यवहारिक उपयोग
यह व्यवस्था आज के चर्चाई संदर्भ में एक गूढ़ सिद्धांत प्रस्तुत करती है: बाह्य क्रिया-चिह्नों के साथ आस्था की वास्तविकता के लिए आंतरिक परिवर्तन और समुदाय का सक्रिय सम्मिलन आवश्यक है। जो लोग अलग पृष्ठभूमि से आते हैं, उन्हें मानवीय पहचान के भेदभाव के बजाय सच्चे विश्वास और समरसता की कसौटी पर परखा जाना चाहिए। यह वचन स्मरण दिलाता है कि ईश्वर एक है और उसका उद्देश्य सभी जातियों को एकता में बाँधना है।
इन विचारों के साथ, इस पद का मूल संदेश स्पष्ट है: परमेश्वर अपने समुदाय में प्रवेश के लिए एक उद्घाटन-प्रक्रिया देता है, ताकि सभी सहभागी एक ही पर्व को एक साथ मनाकर एक होकर उसकी महिमा करें।