Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
निर्गमन 1 निर्गमन 2 निर्गमन 3 निर्गमन 4 निर्गमन 5 निर्गमन 6 निर्गमन 7 निर्गमन 8 निर्गमन 9 निर्गमन 10 निर्गमन 11 निर्गमन 12 निर्गमन 13 निर्गमन 14 निर्गमन 15 निर्गमन 16 निर्गमन 17 निर्गमन 18 निर्गमन 19 निर्गमन 20 निर्गमन 21 निर्गमन 22 निर्गमन 23 निर्गमन 24 निर्गमन 25 निर्गमन 26 निर्गमन 27 निर्गमन 28 निर्गमन 29 निर्गमन 30 निर्गमन 31 निर्गमन 32 निर्गमन 33 निर्गमन 34 निर्गमन 35 निर्गमन 36 निर्गमन 37 निर्गमन 38 निर्गमन 39 निर्गमन 40Verse
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निर्गमन 12:2 का संदर्भ और उसका अर्थ
यह पद निर्गमन के आरम्भिक भाग में यहूदियों के पास आने वाले कोलाहल–परीक्षण से पहले की तैयारी को दर्शाता है। यह दोहराते समय कहा गया है कि यह महीना आरम्भ का महीना है, अर्थात् यह वर्ष का पहला महीना है। यह आशीर्वाद नहीं, बल्कि बहुत गहन परिवर्तन का संकेत है: पुराने दिन-चक्र का अंत और देहाती-परिवर्तन के लिए एक नया आरम्भ।
केंद्रीय विचार
यहोवा ने यह्रेलों को समय-चक्र में नया आरम्भ निर्धारित किया: कैलेंडर का शुरूआती महीना, ताकि उनकी नए चरण-यात्रा के साथ नयी पहचान बने। यह निर्देश पवित्र पर्व-समय के लिए है—सबसे महत्वपूर्ण बात यह कि उनका उद्धार और यात्रा एक नई शुरुआत से आरम्भ हो।
मुख्य विषय
अन्य प्रतिपादक विचार (उद्धरण शैली में सार)
राष्ट्रीय-स्तर के निर्गमन टिप्पणीकार होने के नाते, इस विषय पर पारस्परिक पाठ का सुझाव मिलता है कि यह महीना “आरम्भ का ठहरा” के रूप में विशिष्ट है, जो यह दर्शाता है कि ईश्वर के उद्धार के कार्यक्रम शुरुआत से ही नियत हैं। बार्न्स, हैन्री और Clarke के शब्दों का संकलन इस तथ्य को समर्थ बनाता है कि नया आरम्भ, नयेपन और विश्वास की प्रगाढ़ता के साथ जुड़ा है।
क्रॉस-रेफरेंसेस
1) निर्गमन 12:3–4 — वहीं से यह स्पष्ट होता है कि महीने की पहचान और चिह्न क्या होंगे, ताकि पूरे समाज एक साथ समन्वयित हो सके।
2) नीतिवचन 3:5–6 — नया मार्ग ईश्वर की दिशा में भरोसे के साथ बढ़ने का संकेत देता है; इस मूल विचार से यह verse जुड़ता है कि नया आरम्भ परमेश्वर के मार्ग पर कदम रखने से होता है।
3) हिब्रियों 11:8 — आस्था में नया आरम्भ स्वीकारते हुए अज्ञात राह पर भी निर्भर रहने का दायित्व दिखाता है।
व्यावहारिक अनुप्रयोग
1) अपने जीवन में हर नए चरण के लिए एक स्पष्ट आरम्भ स्वीकार करें—जो भी परिवर्तन आए, ईश्वर की योजना के अनुरूप हो।
2) दैनिक जीवन में निर्देशों का पालन और समुदाय के साथ मिलकर एक नई दिशा तय करें, ताकि आस्था व्यवहारिक बने।
संक्षिप्त समापन
यह हुक्म हर प्रकार के अस्थायित्व से ऊपर उठकर एक स्थिर आरम्भ का अवसर देता है। ईश्वर का वादा है कि नया महीना उनके उद्धार-कार्य का आरम्भ है—एक नई पहचान और एक नई यात्रा, जो उनके अनुसार ही आकार लेती है।
नोट: नीचे उद्धृत प्रमुख टिप्पणीकारों के संक्षिप्त उद्धरण-उद्धृत भाग केवल संदर्भ हेतु प्रस्तुत हैं:
“यह महीना तुम्हारे लिए आरम्भ का ठहरना है; अर्थात् वर्ष का पहला महीना यही ठहरे।” (आदेश और आरम्भ की धारा स्पष्ट करती है कि परमेश्वर अपनी योजना के अनुसार नई शुरुआत चाहते हैं।)
परिशिष्ट विचार: यह शास्त्रीय विचार निर्गमन के समुदाय-निर्माण और उत्सव-तयारी के भीतर नए काल की शुरुआत का संकेत देता है, जिसे बाद के यहूदियों के पर्व-आचरण में भी स्पष्ट पाया जा सकता है।