Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
लैव्यव्यवस्था 1 लैव्यव्यवस्था 2 लैव्यव्यवस्था 3 लैव्यव्यवस्था 4 लैव्यव्यवस्था 5 लैव्यव्यवस्था 6 लैव्यव्यवस्था 7 लैव्यव्यवस्था 8 लैव्यव्यवस्था 9 लैव्यव्यवस्था 10 लैव्यव्यवस्था 11 लैव्यव्यवस्था 12 लैव्यव्यवस्था 13 लैव्यव्यवस्था 14 लैव्यव्यवस्था 15 लैव्यव्यवस्था 16 लैव्यव्यवस्था 17 लैव्यव्यवस्था 18 लैव्यव्यवस्था 19 लैव्यव्यवस्था 20 लैव्यव्यवस्था 21 लैव्यव्यवस्था 22 लैव्यव्यवस्था 23 लैव्यव्यवस्था 24 लैव्यव्यवस्था 25 लैव्यव्यवस्था 26 लैव्यव्यवस्था 27Verse
लैव्यव्यवस्था 20:1 लैव्यव्यवस्था 20:2 लैव्यव्यवस्था 20:3 लैव्यव्यवस्था 20:4 लैव्यव्यवस्था 20:5 लैव्यव्यवस्था 20:6 लैव्यव्यवस्था 20:7 लैव्यव्यवस्था 20:8 लैव्यव्यवस्था 20:9 लैव्यव्यवस्था 20:10 लैव्यव्यवस्था 20:11 लैव्यव्यवस्था 20:12 लैव्यव्यवस्था 20:13 लैव्यव्यवस्था 20:14 लैव्यव्यवस्था 20:15 लैव्यव्यवस्था 20:16 लैव्यव्यवस्था 20:17 लैव्यव्यवस्था 20:18 लैव्यव्यवस्था 20:19 लैव्यव्यवस्था 20:20 लैव्यव्यवस्था 20:21 लैव्यव्यवस्था 20:22 लैव्यव्यवस्था 20:23 लैव्यव्यवस्था 20:24 लैव्यव्यवस्था 20:25 लैव्यव्यवस्था 20:26 लैव्यव्यवस्था 20:27



लैव्यव्यवस्था 20:3 पर टिप्पणी
पर्व 20:3 में परमेश्वर इस बात को स्पष्ट करते हैं कि वह मूर्तिपूजा और मोलेक के बलिदान के द्वारा उसके पवित्र स्थान के अपवित्र करने के विरुद्ध कठोर दण्ड सुनाते हैं। यहाँ इस्राएल के समाज के भीतर परमेश्वर की पवित्रता और पवित्रस्थान के सम्मान की अत्यावश्यकता पर बल दिया गया है। यह कानून बताता है कि प्रत्येक व्यक्ति और समुदाय के लिए परमेश्वर के आज्ञापालन से विकृतियों के परिणाम होते हैं, और पाप से निपटने के लिये न्यायोचित दण्ड भी आवश्यक है।
मुख्य अर्थ
व्यक्ति ने अपने परमेश्वर के विरुद्ध प्रशंसा-रहित आचरण अपनाया और अपने बच्चों को मोलेक को देकर पवित्रस्थल को अशुद्ध किया। इस संदर्भ में Dieu ने स्पष्ट किया कि यह अपराध समुदाय-समुदाय तक प्रभावित होता है और ईश्वर के पवित्र नाम की मानहानि है। इसके परिणामस्वरूप वह उस नागरिक को और उसके परिवार को लोगों में से नाश कर देंगे, ताकि पाप का दंड पूरी तरह सामने आ सके और पवित्रता बन बनी रहे।
दो-तीन केंद्रित विषय
संदर्भित बाइबिल पद (क्रॉस-रेफरेंसेस) और संक्षिप्त अर्थ
यही प्रकार की पवित्रता के मानक अन्य स्थानों पर भी स्पष्ट होते हैं—जिनमें मोक्ष के इरादे के साथ पवित्रता का आग्रह जुड़ा है।
- रोमी 12:1-2: शरीर को पवित्र सेवकत्व के लिए प्रस्तुत करना—पवित्रता की जीवन-शैली।
- डेविड के प्रेरणादायक उदाहरण: परमेश्वर के साथ एक निर्भीक आस्था और पवित्र जीवन का अनुरोध।
इन संदर्भों से यह स्पष्ट होता है कि पवित्रता केवल सामुदायिक नियम नहीं है, बल्कि व्यक्तिगत और समाजिक जीवन के हर क्षेत्र को प्रभावित करने वाली एक आस्था-व्यवस्था है।
व्यावहारिक विचार
आज के पाठक के लिए यह पाठ संदेश देता है कि हमारे निर्णय, खासकर उन घटनाओं में जो पारिवारिक या सामाजिक स्तर पर एक दोसरे के प्रति रवैया बनाते हैं, हमारे समुदाय के पवित्र नाम के प्रति हमारे नजरिये को निर्धारित करते हैं। परमेश्वर के संकेतों के प्रति विनम्रता और निष्ठा रखें; अपने आचरण में एक ऐसी पवित्रता बनाएं जो समाज में एक सुरक्षित, ईमानदार और नैतिक जीवन दिखाए।
संक्षिप्त निष्कर्ष
लैव्यव्यवस्था 20:3 परमेश्वर की पवित्रता और उसकी व्यवस्था के प्रति अडिग आस्थाकी याद दिलाता है। दोष और पाप के परिणाम कठोर हो सकते हैं, किन्तु यह भी एक अवसर है कि समुदाय अपने ईश्वर-समर्पण को पुनः दृढ़ करे और पवित्रता के मानक को जीवन में व्यवहारिक रूप से उतारे।
पूर्व-आधार उद्धरण (महत्वपूर्ण मतलबी उद्धरण)
यदि उपलब्ध हो, Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke के स्पष्ट उल्लेखित शब्दों के छोटे उद्धरण नीचे दिये जा सकते हैं, परन्तु पूरा पाठ नहीं।
उद्धृत विचार-रोशनी (संक्षेप):
नोट
यह टिप्पणी Ps. 20:3 के पाठ के सीधे अर्थ पर केंद्रित है और सार्वजनिक-डोमेन शिक्षाओं से प्रेरित सामान्य व्याख्या को सम्मिलित करती है।