Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
लैव्यव्यवस्था 1 लैव्यव्यवस्था 2 लैव्यव्यवस्था 3 लैव्यव्यवस्था 4 लैव्यव्यवस्था 5 लैव्यव्यवस्था 6 लैव्यव्यवस्था 7 लैव्यव्यवस्था 8 लैव्यव्यवस्था 9 लैव्यव्यवस्था 10 लैव्यव्यवस्था 11 लैव्यव्यवस्था 12 लैव्यव्यवस्था 13 लैव्यव्यवस्था 14 लैव्यव्यवस्था 15 लैव्यव्यवस्था 16 लैव्यव्यवस्था 17 लैव्यव्यवस्था 18 लैव्यव्यवस्था 19 लैव्यव्यवस्था 20 लैव्यव्यवस्था 21 लैव्यव्यवस्था 22 लैव्यव्यवस्था 23 लैव्यव्यवस्था 24 लैव्यव्यवस्था 25 लैव्यव्यवस्था 26 लैव्यव्यवस्था 27Verse
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लैव्यव्यवस्था 20:4 — पाठ के समीपस्थ संदर्भ में
यह आयत मूर्तिपूजा और हानिकारक आचरण के निषेध को स्पष्ट करती है। यदि कोई देश या जनता किसी व्यक्ति के पुत्र-या-पुत्री के मोलेक को बलिदान कराए, और बाकी लोग इस कृत्य के बारे में चुप रहते हुए भी उसे रोकने में आनाकानी करें, तो उसे दण्डित किया जाएगा। यह परमेश्वर के अन देखकर के आदेश के विरुद्ध है और समाज के नैतिक ढांचे को तोड़ने वाला अपराध माना गया है।
पाठ से जानें: परमेश्वर का उद्देश्य, विश्वास की अग्निपरीक्षा
यह verses दिखाते हैं कि परमेश्वर का इरादा सामाजिक और धार्मिक व्यवस्था की पवित्रता है। मोलेक के बलिदान जैसी प्रथाओं के प्रति सामुदायिक चुप्पी या सहयोग λάहना, इन्होंने परमेश्वर के एकेश्वरिक आचरण के प्रतिकूल है। न्याय में भागीदारी न कर पाने से भी नैतिक जिम्मेदारी बनती है। अगर कोई अपने कुटुंबीयों के गलत कर्मों के साथ है, तो समाज को प्रतिक्रिया देनी चाहिए ताकि बुराइयों का पुनरुत्पादन रोका जा सके।
मुख्य शब्द और चित्र
संयुक्त संदर्भ (Cross-references)
1) एक समान प्रकार के निषेध: सामाजिक उपहास और पाप के विरुद्ध समुदाय की सावधानी (उत्पत्ति के समय की घटनाएँ) — यह दिखाता है कि सामूहिक संरचना पवित्रता के लिए उत्तरदायी है।
2) चेतावनी और दंड: आचरण की अनदेखी पर कड़ी सजा का स्वरूप — यह दर्शाता है कि परमेश्वर न्यायप्रिय है और पाप सामान्य नहीं रहा जा सकता।
3) प्रतिष्ठित आस्तिकता बनाम सार्वजनिक दबाव: बाइबल में व्यक्तिगत और सामाजिक नैतिकता का संतुलन—दृष्टांत कि किस प्रकार समुदाय सत्य और धर्म के अनुरूप प्रतिक्रिया देता है।
पूर्व-दर्शन: व्यवहारिक पाठ
आज के विश्वास के संदर्भ में यह स्पष्ट करता है कि केवल व्यक्तिगत पाप ही नहीं, बल्कि समुदाय की चुप्पी भी पाप का समर्थन बन सकती है। माता-रिश्तेदारों के गलत आचरण के विरुद्ध साहसिक कदम उठाना, न्यायप्रिय समाज की पहली आवश्यकता है। परमेश्वर का आग्रह है कि धर्म और मनुष्य-प्रेरित दबाव के बीच संतुलन बने रहे—जहाँ सत्य और करुणा दोनों साथ चलें।
एक छोटा समाहार
इस आयत से सीख मिलती है कि ईश्वर एक एकेश्वरवादी सुरक्षा-प्रणाली चाहते हैं जो सांसारिक दबावों के बावजूद सत्य और नैतिकता की रक्षा करे। अगर समाज अपराध के प्रति सजग रहे और दोषी को दंडित करे, तो पवित्रता बनी रहेगी और देव कीashire समाज में आशीष फैलती है।
पश्च-आकलन (निष्कर्ष)
जो लोग मोलेक जैसे पथ-भ्रष्ट आचरण के विरुद्ध उभरते झुकावों को नियंत्रित करते हैं, वे वास्तविक विश्वास का प्रदर्शन करते हैं—कि परमेश्वर ही जीवन का निर्धारणकर्ता है। मजबूत Gemeinschaft, सत्य के लिए साहस, और पाप से दृढ़ दूरी—ये तीनों इस आयत के मूल पाठ पर स्थापित हैं।
सूत्रधार (Historical-Commentary Traditions): इस अंश के हलफनामे सामान्य बाइबल-टिप्पणीकारों के सम्मिश्रण से निर्मित हैं, जिनमें Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke के सार्वजनिक-डायरेक्ट शब्द समाहित हैं। निम्न उद्धरण केवल चयनित क्षणों के तौर पर उद्धृत हैं:
“True religion obliges men to separate themselves from all abominations of idolatry.” — Matthew Henry (सार-रिपोर्ट)
कृपया ध्यान दें: ऊपर उद्धृत पंक्तियाँ कुल मिलाकर संदर्भ-उद्धरण के रूप में हैं; पूर्ण पाठ के लिए मूल टिप्पणीकारों के अभिलेख देखें।