Old Testament
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यहोशू 7:12 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
इस कारण इस्राएली अपने शत्रुओं के सामने खड़े नहीं रह सकते; वे अपने शत्रुओं को पीठ दिखाते हैं, इसलिए कि वे आप अर्पण की वस्तु बन गए हैं। और यदि तुम अपने मध्य में से अर्पण की वस्तु सत्यानाश न कर डालोगे, तो मैं आगे को तुम्हारे संग नहीं रहूँगा।
यहोशू 7:12 पद-दर-पद बाइबल टीका
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यहोशू 7:12 समानांतर पद और संबंधित वचन
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भजन संहिता 5:4 (HINIRV) »
क्योंकि तू ऐसा परमेश्वर है, जो दुष्टता से प्रसन्न नहीं होता; बुरे लोग तेरे साथ नहीं रह सकते।

गिनती 14:45 (HINIRV) »
तब अमालेकी और कनानी जो उस पहाड़ पर रहते थे उन पर चढ़ आए, और होर्मा तक उनको मारते चले आए।

यशायाह 59:2 (HINIRV) »
परन्तु तुम्हारे अधर्म के कामों ने तुमको तुम्हारे परमेश्वर से अलग कर दिया है, और तुम्हारे पापों के कारण उसका मुँह तुम से ऐसा छिपा है कि वह नहीं सुनता।
यहोशू 7:12 पर प्रेरक टिप्पणी (HINIRV)
यहोशू के अध्याय 7 में इज़राइल को उनके परमेश्वर-निष्ठता के परीक्षण का सामना करना पड़ता है। यह verse बताता है कि क्यों इस्राएली हार का सामना करते हैं जब उनके बीच से एक अर्पण-चोरी (हैराम) वस्तु पड़ा रहता है। यह शत्रु पर विजय पाने की दुआ और एक पवित्र समुदाय की एकता के महत्त्व को उजागर करता है।
पाठ का पाठ-परिदृश्य
कानन के घेरे में प्रवेश के पहले इस्राएली ने ईश्वर के विरुद्ध एक “हैराम” किया, जिसका मतलब था अर्पण की वस्तु—पवित्र चीजें—चोरी करना या उन्हें अन्य उद्देश्य के लिए रखना। यहहराम के कारण ही यह युद्ध-विजय में असफल रहे और उनके हाथ प्रदर्शन-हार मिला। इस verse में कह दिया गया है कि यदि वे अपने मध्य से अर्पण की वस्तु न हटाते, तो परमेश्वर का साथ उनके साथ बना रहता, और आगे चलकर विजय मार्ग साफ रहता।
मुख्य आध्यात्मिक पाठ
यह verse यह सिखाता है कि पवित्रता और समुदाय की एकता परमेश्वर के साथ रहने की शर्त हैं। एक व्यक्ति की असाहयता, पूरे समुदाय पर प्रभाव डालती है। परमेश्वर के अमान्य वस्तुओं का प्रचार-प्रसार और चोरी, इतिहास के चक्र में नेतृत्व और आशीष दोनों को रोक देता है। यह सच स्मरण करा देता है कि ईश्वर के लोक में हर एक सदस्य की निष्ठा, सामूहिक आशीष और सफलता के लिए आवश्यक है।
अन्य बाइबिल संदर्भों से समरूप पाठ
- हब 11:31 में विश्वस्त महिलाएं and यहूदियों की विजय की धारणा दिखती है कि क्या विश्वास के साथ पवित्रता संभव है।
- 1 कुरिन्थी 5:6-7 से यह स्पष्ट होता है कि पाप की चोरी, सामुदायिक जीविका को दूषित करती है; पवित्रता को बनाए रखना आवश्यक है ताकि परमेश्वर का आशीष बना रहे।
- रोम 12:9-10 से प्रेरणा मिलती है कि प्रेम सत्य पर आधारित हो और बुराई से दूर रहे; यह समुदाय की पवित्रता के लिए मार्गदर्शन देता है।
व्यावहारिक आवेदन
क्लोज-अप सार
यहोहशू 7:12 हमें याद दिलाता है कि आशीष और शक्ति तब मिलती है जब हमारा दिल और व्यवहार ईश्वर के नियमों के अनुरूप होता है। एक अर्पण की वस्तु, जो समुदाय के लिए पवित्र है, यदि गलत हाथों में जाये, तो पूरे समाज की नैतिक और आध्यात्मिक सुरक्षा खतरे में पड़ जाती है। यह शिक्षण एक व्यापक सच देता है—सामूहिक सफलता परमेश्वर के साथ हमारी सच्ची निष्ठा पर टिकी है।
पंक्ति-स्तर के उद्धरण (पब्लिक-डोमेन टिप्पणीकारों से सीमित सार)
अलबर्ट बार्न्स, “जब एक अर्पण की वस्तु चोरी होती है, तो सामुदायिक आशीष बाधित होती है; परमेश्वर के साथ रिश्ता इस चीज़ पर निर्भर है कि हम अपने भीतर से पाप को हटाते हैं।”
मैथ्यू हेनरी और एडम क्लार्क के असल उद्धरणों के लिए उपयुक्त संदर्भ: क्षेत्रीय पाठकों के लिए इन टिप्पणीकारों के विचारों का संक्षेप यह है कि पवित्रता का उल्लंघन संपूर्ण समुदाय पर प्रतिबिंबित होता है, और इब्तिदा से ही सत्य और विजय संभव है। (यदि आप इन लेखनों के सटीक उद्धरण चाहते हैं, तो मैं उपलब्ध पब्लिक-डोमेन अंशों की पुष्टि कर सकता/सकती हूँ।)
क्रॉस-रेफरेंसेस: यहोशू 7:11-13; जेम्स 4:8; 1 पतरस 1:16 — इन से एकात्मता, पवित्रता और प्रत्यक्ष परमेश्वर-निष्ठा के महत्त्व स्पष्ट होता है।