यहोशू 7:26 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

और उन्होंने उसके ऊपर पत्थरों का बड़ा ढेर लगा दिया जो आज तक बना है*; तब यहोवा का भड़का हुआ कोप शान्त हो गया। इस कारण उस स्थान का नाम आज तक आकोर तराई पड़ा है।

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यहोशू 7:26 पद-दर-पद बाइबल टीका

यहोशू 7:26 पर टिप्पणी: आकोर तराई का स्मरण और भड़के हुए कोप की शांति

यह व Verse यहोशू के समय की कथा से जुड़ता है जब इब्रीय किसानों की लापरवाही के कारण आदि की आर्था में फिर बेमेल पाप के परिणामों की warning मिलती है। यहाँ आकोर की पत्थरों से बड़े ढेर का निर्माण एक स्मारक-चिह्न बनता है जो यहोवा के क्रोध के अंत की ओर इशारा करता है। आकोर का पाप एक साथ फला-फूला था, और यह शरीर-स्त्रोतों पर भी विश Rath देता है कि परमेश्वर के अनुग्रह के बिना सफलता नहीं मिलती। पत्थरों का ढेर इस बात का स्थायी संकेत है कि प्रगट अपराध के बाद भी न्याय की अवधि समाप्त नहीं होती; परन्तु यह भी दर्शाता है कि कोप शांत हो गया है और स्थान कोप से मुक्त हुआ।

केंद्रीय अर्थ

यहोशू 7:26 में आकोर के पाप के परिणामों के साथ-साथ यह दर्शाता है कि यहोवा की क्रोध किस प्रकार जुर्म पर उतर कर सामान्य समाज को प्रभवित करता है, और फिर कैसे उसे शांति और स्मरण के लिए एक पवित्र स्मारक के रूप में समर्पित किया गया। ढेर-चिह्न एक शिक्षा है कि पाप का स्थाई स्मारक बन सकता है, परन्तु परमेश्वर की दया के साथ उस स्मारक का उद्देश्य पुनः एहसास कराना है कि पाप से बचना है, न कि उसे गिने-चुने अवसरों पर हर तरफ ढोना।

तीन प्रमुख विषय

  1. पाप के परिणाम और दायित्व: आकोर का पाप समुदाय के लिए खतरा बना और उसे दंड का अनुभव हुआ।
  2. परमेश्वर की क्रोध और उसकी शांति: क्रोध के बाद शांति की स्थिति आती है; कोप शांत होते ही स्थान भी शुद्ध लगता है।
  3. स्मारक और सीख: पत्थरों से बना ढेर भविष्य की स्मृति बनता है ताकि लोग फिर दुबारा उसी पथ पर न चलें।

उपयुक्त क्रॉस-रेफरेंसेज़ (संक्षेप में)

1) यहोशू 7:11—यहोवा ने पाप को पहचाना और इसे समुदाय से दूर किया, यह दर्शाता है कि पाप कैसे गणना और दण्ड के साथ सामने आता है।

2) एब्राहीम के चाप्टरों में भी पाप के परिणाम और दया दोनों दिखते हैं; यह दर्शाता है कि भलाई के लिए सत्य और पवित्रता आवश्यक है।

3) व्यवसाओं में भी पाप के स्मारक से सीख मिलती है, जैसे कि पवित्रता की याद दिलाने वाले स्थल और पर्व-प्रथाओं के माध्यम से धार्मिक निरंतरता बनी रहती है।

व्यावहारिक विचार

हमारे जीवन में कभी-कभी गलतियाँ परिणाम-समाप्ति नहीं करतीं, परन्तु परमेश्वर की प्रत्यक्षदर्शी शांति तब आती है जब हम पाप के मार्ग से तौबा करें। यह स्मारक-ढेर reminding देता है कि सजग रहना और पवित्रता की दिशा में कदम उठाना आवश्यक है। घर-परिवार और समुदाय में एक दूसरे के प्रति सत्य और नैतिकता बनाए रखना भी इसी शिक्षा का भाग है।

संक्षिप्त सार

यहोशू 7:26 यह बताता है कि पाप की गम्भीरता और उसका परिणाम एक स्थायी स्मारक बन जाता है, परन्तु परमेश्वर की कोप शांत होने के साथ ही स्थान शुद्ध और स्मरणीय होता है। आकोर की घटना से हमें यह सीख मिलती है कि पाप के विरुद्ध सावधानी और पवित्रता की प्रतिबद्धता कितनी आवश्यक है।

नोट: इस पाठ के लिए प्रयुक्त प्रसिद्ध कलाकृतियाँ—Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke—सीधे उद्धृत नहीं हैं; यदि इन पंक्तियों में उनके स्पष्ट शब्द चाहिए हों, तो मैं संकेत अनुसार छोटे-छोटे उद्धरण दे सकता हूँ।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

यहोशू 7:26 समानांतर पद और संबंधित वचन

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व्यवस्थाविवरण 13:17 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
व्यवस्थाविवरण 13:17 (HINIRV) »
और कोई सत्यानाश की वस्तु तेरे हाथ न लगने पाए; जिससे यहोवा अपने भड़के हुए कोप से शान्त होकर जैसा उसने तेरे पूर्वजों से शपथ खाई थी वैसा ही तुझ से दया का व्यवहार करे, और दया करके तुझको गिनती में बढ़ाए।

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यशायाह 65:10 (HINIRV) »
मेरी प्रजा जो मुझे ढूँढ़ती है, उसकी भेंड़-बकरियाँ तो शारोन में चरेंगी, और उसके गाय-बैल आकोर नामक तराई में विश्राम करेंगे।

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होशे 2:15 (HINIRV) »
वहीं मैं उसको दाख की बारियाँ दूँगा, और आकोर की तराई को आशा का द्वार कर दूँगा और वहाँ वह मुझसे ऐसी बातें कहेगी जैसी अपनी जवानी के दिनों में अर्थात् मिस्र देश से चले आने के समय कहती थी।

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