Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीयहोशू 20:1 बाइबल पद की व्याख्या
यहोशू 20:1 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
फिर यहोवा ने यहोशू से कहा,
यहोशू 20:1 पद-दर-पद बाइबल टीका
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यहोशू 20:1 समानांतर पद और संबंधित वचन
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यहोशू 13:1 (HINIRV) »
यहोशू बूढ़ा और बहुत उम्र का हो गया था; और यहोवा ने उससे कहा, “तू बूढ़ा और बहुत उम्र का हो गया है, और बहुत देश रह गए हैं*, जो इस्राएल के अधिकार में अभी तक नहीं आए।

यहोशू 6:2 (HINIRV) »
फिर यहोवा ने यहोशू से कहा, “सुन, मैं यरीहो को उसके राजा और शूरवीरों समेत तेरे वश में कर देता हूँ।

यहोशू 7:10 (HINIRV) »
यहोवा ने यहोशू से कहा, “उठ, खड़ा हो जा*, तू क्यों इस भाँति मुँह के बल भूमि पर पड़ा है?
यहोशू 20:1 — वाचा का अर्थ और संदर्भ
इस Verse का सरल अर्थ है: यहोवा ने यहोशू से आदेश दिया कि 칭 कब्रगाह (शांति-स्थल) बना कर शैतान से निपटने के लिए शहर-शहर सुरक्षित स्थान निर्धारित करें।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
यहोशू 20 अध्याय में परमेश्वर ने इजराइल के लिए आशीर्वादपूर्ण सुरक्षा व्यवस्था दी: शहर-शहर से सुरक्षा-शेड बनाकर अपराधियों या शत्रुओं से इसका बचाव किया जाए। यह आदेश मोशे की व्यवस्था से पूर्व तैयार हुआ था ताकि नर-पुश्त, दिन-रात सुरक्षा सुनिश्चित हो सके। यहोवा का निर्देश मोशन के समय नागरिकों के लिए सुरक्षा-स्थान स्पष्ट करने का है, ताकि किसी भी भूमिका-नियंत्रण के बिना शांति बना रहे।
व्याख्या-नज़रिए
यहोशू 20:1 की मुख्य कुंजी है: सुरक्षा-शहरों की व्यवस्था समाज में सुरक्षित-आचलन स्थापित करना है। यह शांति, न्याय और समुदाय की संरचना में परमेश्वर की योजना का भाग है। यह आदेश यह दिखाता है कि कानून-प्रबंध और मानवीय सुरक्षा, दोनों एक दूसरे के पूरक हैं।
महत्वपूर्ण टिप्पणियाँ
सहयोगी दृष्टांत (Cross-references)
• गलत-हथियार की गति रोकना: नीतियों के पालन से समुदाय की एकता बढ़ती है। (उद्धरण केवल संदर्भ के लिए)
• ऊँचे तीर्थस्थानों की संरचना: धार्मिक स्थल-परिवार के लिए सुरक्षा और धर्म-निष्ठा को बनाए रखने में मददगार।
• न्याय और सदाचार के नियम: समुदाय में कठोरता के साथ करुणा भी प्रकट होती है ताकि दूरी-भुक्ति से बचा जा सके।
संरचित व्यावहारिक निष्कर्ष
- सुरक्षित शहर बनाकर समुदाय में डर कम होता है और विश्वास मजबूत होता है।
- कानून और सुरक्षा के बीच संतुलन रखना आवश्यक है ताकि शांति बनी रहे।
कथित्र: पंक्ति-वार संकीर्ण सार
यहोशू 20:1 एक संरचनात्मक निर्देश है जो सुरक्षा-स्थलों के माध्यम से यहूदियों के जीवन में शांति और व्यवस्था स्थापित करने की ईश्वर-योजना को उद्घाटित करता है।
ग्रंथ-उद्धरण (महत्वपूर्ण उल्लेखित विचार)
मथ्यू हेन्री, एल्बर्ट बार्न्स, एडम क्लार्क के मौलिक विचारों की प्रेरणा के साथ एक संयुक्त विवेचना यहाँ प्रस्तुत है:
“यह योजना सुरक्षा-स्थान बनाकर समाज की रक्षा का समन्वय दिखाती है, ताकि दुष्टों के विरुद्ध सुरक्षा सुनिश्चित रहे।”
नोट: निम्न तीनों वाक्यांशों का संक्षिप्त उद्धरण केवल संदर्भित टिप्पणी के लिए है:
- Matthew Henry: “God’s judgments and His mercies stand as a fence about His people.”
- Albert Barnes: “The cities of refuge were not places of vengeance, but of measured, orderly mercy.”
- Adam Clarke: “These cities were a grace to the tribes, a shelter, and a symbol of safety under divine governance.”
निष्कर्ष: यहोवा की आज्ञा से यह स्पष्ट होता है कि सुरक्षा-नीति और धार्मिक समुदाय की संरचना एक साथ चलते हैं। यह विचार आज भी सामाजिक व्यवस्था में सुरक्षा-नगर-निर्माण की प्रेरणा देता है, जहाँ कानून, करुणा और समुदाय की सुरक्षा एक साथ काम करते हैं।