Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीयहोशू 20:3 बाइबल पद की व्याख्या
यहोशू 20:3 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
जिससे जो कोई भूल से बिना जाने किसी को मार डाले, वह उनमें से किसी में भाग जाए; इसलिए वे नगर खून के पलटा लेनेवाले से बचने के लिये तुम्हारे शरणस्थान ठहरें।
यहोशू 20:3 पद-दर-पद बाइबल टीका
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यहोशू 20:3 समानांतर पद और संबंधित वचन
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यहोशृ 20:3 — शरणस्थल का उद्देश्य और उसकी भूमिका
यहोशू 20:3 में कानूनी ढांचे के भीतर शरणस्थलों के उपयुक्त स्थानों की पुख़्तगी बताई गई है: यदि कोई भूल-चूक से किसी को मार डाला है, तो वह हिंसा के चक्र में फँसकर भागने की आवश्यकता से बच सके, ताकि न्याय न टूटे और अपराधी को निष्पादन का खतरा भी रहे। यह टेक्स्ट शरणस्थल के उद्देश्य—भीतरी सुरक्षा और निष्पक्ष न्याय के संतुलन—को स्पष्ट करता है।
ईश्वर और विश्वास के बारे में यह पाठ क्या बताता है
शरणस्थल व्यवस्था बताती है कि ईश्वर सच और न्याय के परमपालक हैं। एक ओर हिंसा के कारण भय के वातावरण से बचना चाहिए, दूसरी ओर अपराधी की सुरक्षा और उचित सुनवाई की भी व्यवस्था है। इसे देखकर विश्वास की यह शिक्षा निकलती है कि भगवान अपराध के दण्ड से पहले सच के आधार पर निर्णय चाहते हैं और वे मानवीय व्यवस्था में सुरक्षा के स्थान रखते हैं।
महत्वपूर्ण शब्दों और छवियों की स्पष्टता
संदर्भित और मिलते-जुलते विचार
अन्य समुदाय-न्याय के आँचल में यह सिद्धांत है कि अवांछित हिंसा से बचाव के लिए सुरक्षित स्थान, जिसे प्रशासन द्वारा मान्यता मिली हो, आवश्यक है। यह विचार कुछ पुराने सम्मानित टीकाओं में भी परिलक्षित होता है जहाँ न्याय और mercy के बीच संतुलन आवश्यक माना गया है।
अन्य-पथ के संकेत (Cross-references) और उनके संक्षिप्त समझिए
आज के संदर्भ में उपयोगिता
आज के समय में यह पाठ हमें बताता है कि हम समुदाय में सुरक्षा, वफादारी और निष्पक्ष न्याय के लिए सुरक्षित स्थान बनाएं, ताकि किसी की अनजानी गलती भी लोगों को नुकसान न पहुँचा सके। यह धार्मिक-न्याय के संतुलन को याद दिलाता है—हानिकारक हिंसा से रोकने के साथ, उचित प्रक्रिया और संरक्षण की व्यवस्था बनाए रखना आवश्यक है।
संछिप्त सार
यहोशू 20:3 शरणस्थलों के उद्देश्य को रेखांकित करता है: भय और हिंसा से सुरक्षा, साथ ही सही निर्णय के लिए न्यायिक मार्ग की उपलब्धता। यह पाठ ईश्वर के न्याय के साथ करुणा और सुरक्षा के संतुलन की प्रेरणा देता है।
कम्पैक्ट नोट्स
उद्धृत टिप्पणीकारों के कुछ सार प्रासंगिक विचार: शरण आपके लिए सुरक्षा का स्थान है, परंतु न्याय से पीछे नहीं हटना चाहिए। यह संदेश एक समुदाय के भीतर सुरक्षा और निष्पक्ष सुनवाई को प्राथमिकता देता है।