Old Testament
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यहोशू 11:1 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
यह सुनकर हासोर के राजा याबीन* ने मादोन के राजा योबाब, और शिम्रोन और अक्षाप के राजाओं को,
यहोशू 11:1 पद-दर-पद बाइबल टीका
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यहोशू 11:1 समानांतर पद और संबंधित वचन
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यहोशू 11:10 (HINIRV) »
उस समय यहोशू ने घूमकर हासोर को जो पहले उन सब राज्यों में मुख्य नगर था ले लिया, और उसके राजा को तलवार से मार डाला।

न्यायियों 4:2 (HINIRV) »
इसलिए यहोवा ने उनको हासोर में विराजनेवाले कनान के राजा याबीन के अधीन कर दिया, जिसका सेनापति सीसरा था, जो अन्यजातियों के हरोशेत का निवासी था।

यहोशू 10:3 (HINIRV) »
इसलिए यरूशलेम के राजा अदोनीसेदेक ने हेब्रोन के राजा होहाम, यर्मूत के राजा पिराम, लाकीश के राजा यापी, और एग्लोन के राजा दबीर के पास यह कहला भेजा,
यहोशू 11:1 के सन्निकट संदर्भ और पाठ का प्रभाव
यह पंक्ति यह बताती है कि किस प्रकार मिस्र के राजा हासोर के राजा याबीन ने मादोन के राजा योबाब, साथ ही शिम्रोन और अक्षाप के राजाओं के साथ मिलकर यहूदा के भूभाग पर आक्रमण की योजना बनाई। यहोशू के समय इस क्षेत्र पर एक संगठित गठबंधन का चित्र उभरता है, जो परमेश्वर के लोगों पर बाहर से दबाव डालता है।
परमेश्वर की योजना और विश्वास की दिशा
यह पाठ संकेत करता है कि परमेश्वर की योजनाओं के विरुद्ध भी संसारिक शक्तियाँ एकत्र होती हैं, परन्तु विश्वासियों के लिये परमेश्वर अपनी रक्षा और विजय का मार्ग पहले से निर्धारित कर चुका होता है। यहूदी-युद्ध के संदर्भ में यह रचना बताती है कि प्रभुवर् अपने लोगों के विरुद्ध उठती शक्ति के सामने भी सामर्थ्य देता है।
शब्द और चित्रों की स्पष्ट व्याख्या
- हासोर: यह एक प्रमुख पंथीय-शहर के राजा होने के साथ क्षेत्रीय शक्तिशाली केंद्र का नाम है।
- याबीन, योबाब, शिम्रोन, अक्षाप: ये सभी ऐतिहासिक नगर-राज्य और उनके शासक थे; यह पाठ युद्ध की एक श्रृंखला की शुरुआत को संकेत करता है जिससे क्षेत्रीय असंतुलन सामने आता है।
संबंधित अन्य पाठ
मुख्य पाठ-आकर्षण और शिक्षण
1) भयभीत नहीं होना: जब बड़े विशाल सेनापतियों के विरुद्ध कदम उठाने होते हैं, तब परमेश्वर की शक्ति पर निर्भर रहना चाहिए।
2) क्षेत्रीय राजनीति के बीच परमेश्वर की नीति: राजा-राजाओं के गठजोड़ के बावजूद परमेश्वर अपने समुदाय को सुरक्षा देता है और जीत की योजना बनाता है।
3) साहसिक कार्य की तैयारी: नयी कठिनाइयों के लिये समुदाय को एकजुट होकर हरदम मानवीय कसरत से आगे बढ़ना चाहिए—यही विश्वास का व्यवहार है।
पक्का मोड़: आधुनिक अभ्यास के लिये संकेत
- कठिन समय में प्रभु पर निर्भर रहें: भय के समय परमेश्वर की सहायता की उम्मीद रखें और उसकी दिशा के अनुसार कदम उठाएं।
- समुदाय की एकता बनाए रखें: बाहरी दबाव के बावजूद एकता से ही विजय की संभावना बढ़ती है।
- धारणाओं से ऊपर परमेश्वर की योजना: राजनीति, गठबंधनों या सैन्य रणनीतियों पर निर्भर रहने के बजाय परमेश्वर की योजना को प्राथमिकता दें।
cross-references
1) यहोशू 10:8–11: परमेश्वर की रक्षा के अद्भुत काम, जब बड़े सेना द्वारा घेराव होता है, तब God के इरादे स्पष्ट होते हैं।
2) यशायाह 41:10: परमेश्वर की सहायता के प्रति भय-रहित आस्था का मार्गदर्शन।
3) पहुँचा हुआ याकूब 1:12: Trial के समय धैर्य और विश्वास की परख।
नोट: इस पाठ से सीधे उद्धरण नहीं हैं; हमने प्रसिद्ध पब्लिक-डोमेन टिप्पणीकारों के विचारों के सार का समायोजन किया है ताकि हिन्दी पाठक आसानी से समझ सकें।]
सार: यहोशू 11:1 संसारिक शक्तियों के गठबंधन के समय परमेश्वर की रक्षा और विश्वास की शिक्षा को उजागर करता है। यह पाठ आधुनिक संदर्भ में सुरक्षा, एकता और ईमानदार आस्था की आवश्यकता को रेखांकित करता है ताकि विश्वासजनों के जीवन में परमेश्वर की योजना के अनुरूप विजय संभव हो।