Old Testament
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यहोशू 11:2 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
और जो-जो राजा उत्तर की ओर पहाड़ी देश में, और किन्नेरेत के दक्षिण के अराबा में, और नीचे के देश में, और पश्चिम की ओर दोर के ऊँचे देश में रहते थे, उनको,
यहोशू 11:2 पद-दर-पद बाइबल टीका
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यहोशू 11:2 समानांतर पद और संबंधित वचन
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यहोशू 12:3 (HINIRV) »
और किन्नेरेत नामक ताल से लेकर बेत्यशीमोत से होकर अराबा के ताल तक, जो खारा ताल भी कहलाता है, पूर्व की ओर के अराबा, और दक्षिण की ओर पिसगा की ढलान के नीचे-नीचे के देश पर प्रभुता रखता था।

न्यायियों 1:27 (HINIRV) »
मनश्शे ने अपने-अपने गाँवों समेत बेतशान, तानाक, दोर, यिबलाम, और मगिद्दो के निवासियों को न निकाला; इस प्रकार कनानी उस देश में बसे ही रहे।

यहोशू 17:11 (HINIRV) »
और मनश्शे को, इस्साकार और आशेर अपने-अपने नगरों समेत बेतशान, यिबलाम, और अपने नगरों समेत दोर के निवासी, और अपने नगरों समेत एनदोर के निवासी, और अपने नगरों समेत तानाक की निवासी, और अपने नगरों समेत मगिद्दो के निवासी, ये तीनों जो ऊँचे स्थानों पर बसे हैं मिले।
यहोशू 11:2 पर टिप्पणी — उत्तर की ओर के राज्यों पर एक समेकित दृष्टि
यह वचन यहोशू की किताब के समय की विस्तृत विजय-यात्रा और देशी राज्यों के पराक्रम की एक झलक प्रदान करता है। अध्याय 11 में उत्तर के पहाड़ी प्रदेशों, किन्नेरेत के दक्षिण, अराबा के नीचे के क्षेत्र और दोर के ऊँचे देश जैसे विविध भू-भागों में बसे राजा-वर्ग के प्रतिशोधी प्रतिद्वंद्वियों के विरुद्ध इस्रायली सेनाओं की सफलता का सार प्रस्तुत है। यह वचन विशेष रूप से यह दिखाता है कि परमेश्वर की सत्ता, इजरायल के कठोर परिश्रम और निवास-भूमि के अधिकार प्राप्त करने की योजना को कैसे एकसाथ मिलाते हैं।
कथन का एक से अधिक पाठ में केंद्र
यहोशू 11:2 में लेखक ने उत्तर की ओर स्थित विभिन्न भू-भागों के राजाओं के नाम और उनके विरुद्ध लड़ाई की परिस्थिति का सार प्रस्तुत किया है। ये क्षेत्र पूर्व-युग के भूगोल की भौगोलिक सीमाओं को दर्शाते हैं— पहाड़ी देश, दक्षिण के किन्नेरेत, अराबा के नीचे के देश और पश्चिम के ऊँचे देश। इन सब पर इजरायली शक्ति का प्रबल प्रभाव स्थापित हुआ, जिससे उनके कफ़र-वन, नगर-उपाय और विस्तार की दिशा स्पष्ट हुई।
मुख्य आध्यात्मिक पाठ
इस वचन के पीछे की शिक्षाओं में एक सरल लेकिन गहरा संदेश है: परमेश्वर के निर्देशों के अनुसार निडर विश्वास और कठोर परिश्रम से संघर्ष को जीते बिना नहीं रहते। प्रत्येक क्षेत्र की विजय एक विशिष्ट चुनौती नहीं, बल्कि विश्वास की क्रमशः वृद्धि और प्रभु की प्रतिज्ञा की मान्यता है। यह दिखाता है कि जब लोग परमेश्वर के पथ पर चलते हैं, तब उनके सामने आने वाले खतरे भी प्रभु द्वारा नियंत्रित और सफल होते हैं।
अन्य बाइबल पाठों के साथ सम्बद्धता
इन पाराठयों से स्पष्ट होता है कि क्रमशः दोहराव नहीं, बल्कि परमेश्वर की स्थिर सत्ता और मनुष्य के विश्वास की संगति ही विजय को संभव बनाती है।
आचरण के लिए व्यावहारिक अनुप्रयोग
संक्षिप्त सार
यहोशू 11:2 उत्तर के विविध भू-भागों में प्रतिद्वंद्वियों के विरुद्ध इजरायली विजय का संकेत देता है। यह अध्याय दिखाता है कि परमेश्वर के निर्देशों पर दृढ़ता और विश्वास से संघर्षों को कैसे जीता जा सकता है। संपूर्ण संदर्भ में, यह हमारी आत्मिक यात्रा में भी एक प्रेरणा देता है कि किसी भी क्षेत्र में प्रभु की योजना के अनुरूप चलना ही वास्तविक सफलता है।
क्रॉस-रेफरेंस और उनके संक्षिप्त स्पष्टीकरण
• योह 10–12: उत्तर के राज्यों के विरुद्ध लड़ाइयों का समेकन; परमेश्वर की सहायता और विश्वसनीयता का महत्व।
• उत्पत्ति 15:13–18: परमेश्वर की प्रतिज्ञाओं के साथ भूमि-उद्धार की पुष्टि; विश्वास पर आधारित सफलता की प्रेरणा।
• नेहम 9:24: निवास-भूमि की व्यवस्था और संरक्षा के लिए प्रभु-कार्य का संगत पक्ष।
कई बार पुराने टिप्पणीकारों के जो सार यहाँ एक साथ पढ़े जाते हैं, वे एक-दूसरे को पुष्ट करते हैं: हार्नेस-हेनरी, बर्न्स और क्लार्क के शब्द-रेखाओं में शांति मिलती है—परन्तु मूल संदेश वहीं है—परमेश्वर के साथ निर्भय विश्वास।