Old Testament
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यहोशू 11:14 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
और इन नगरों के पशु और इनकी सारी लूट को इस्राएलियों ने अपना कर लिया; परन्तु मनुष्यों को उन्होंने तलवार से मार डाला, यहाँ तक उनका सत्यानाश कर डाला कि एक भी प्राणी को जीवित नहीं छोड़ा गया।
यहोशू 11:14 पद-दर-पद बाइबल टीका
*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।
यहोशू 11:14 समानांतर पद और संबंधित वचन
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गिनती 31:9 (HINIRV) »
और इस्राएलियों ने मिद्यानी स्त्रियों को बाल-बच्चों समेत बन्दी बना लिया; और उनके गाय-बैल, भेड़-बकरी, और उनकी सारी सम्पत्ति को लूट लिया।

व्यवस्थाविवरण 6:10 (HINIRV) »
“जब तेरा परमेश्वर यहोवा तुझे उस देश में पहुँचाए जिसके विषय में उसने अब्राहम, इसहाक, और याकूब नामक, तेरे पूर्वजों से तुझे देने की शपथ खाई, और जब वह तुझको बड़े-बड़े और अच्छे नगर, जो तूने नहीं बनाए*,

यहोशू 11:14 पर टिप्पणी: नगरों की लूट और सभी जीवित प्राणियों का संहार
इस पदक के भीतर यहूदा और इस्राएल के युद्ध-युग के अंतर्गत एक निर्णायक विजय का दृश्य है। यहोशূ ने इशारों के अनुसार नगरों के पशु, लूट-के-सम्पत्ति स्वीकार कर ली, पर मनुष्यों को तलवार से मार डाला गया और एक भी प्राणी को जीवित न रहने दिया गया। इसका संदर्भ इतिहास-युग की आचार-नीति और परमेश्वर की अदालत की शक्ति दोनों की दृष्टि से देखा जाना चाहिए।
केंद्रीय अर्थ
यहाँ 설명 किया गया है कि ईश्वर की योजना के अनुसार इजराएली क्या-क्या ले लेते हैं और किस प्रकार प्रतिद्वंद्वी राष्ट्रों के खिलाफ निर्णायक हावी रहते हैं। इस पाठ में नगरों के पशु और लूट, और मनुष्यों का संहार एक स्पष्ट निर्णय-युक्त परिणाम के रूप में प्रस्तुत है—जो यह दर्शाता है कि परमेश्वर के निर्देशों के पालन से युद्ध-युद्ध में नैतिक और सामाजिक अंत:करण कैसे संचालित होते हैं।
मुख्य विषय
कुछ क्रॉस-रेफरेंसेस
सार प्रतीकात्मक विचार
यह अध्याय युद्ध-युग की कठोरता को दर्शाता है—परमेश्वर की आज्ञाओं के अधीन रहते हुए यहूदी समाज में संसाधनों का विवेकपूर्ण उपयोग और धार्मिक-पावनता की सीमा कैसे निर्धारित होती है। साथ ही यह भी बताता है कि इंसानी धैर्य और दया के प्रश्न कौन-से सीमाओं से होकर गुजरते हैं।
व्यावहारिक चिंतन
आज के पाठक के लिए यह भाग यह स्मरण कराता है: कठिन निर्णयों में भी आस्था को बनाए रखना जरूरी है; परमेश्वर के मार्ग के अनुरूप चलने में कभी-कभी सख्ती दिखती है, पर नैतिक-आदर्श और नागरिक-निष्ठा आज भीGuide बनती है। अपने जीवन के छोटे-छोटे विकल्पों में भी हम सत्य-निष्ठा और दयाभाव को बनाए रखें।
संक्षिप्त निष्कर्ष
यहोशू 11:14 हमें दिखाता है कि परमेश्वर के प्रेरित कर्तव्य के कारण विजय और उपार्जन कैसे संचालित होते हैं—लूट और पशु के अधिकार एक स्पष्ट परिणाम हैं, पर मनुष्यों के जीवन के लिए कठोर चेतावनी भी है कि नीति के साथ नैतिक दायित्व कितने महत्वपूर्ण हैं। यह पाठ इतिहास की कठिनाइयों का स्मरण कराता है और हमें आज के विश्वास-जीवन में सत्य, न्याय और करुणा के संतुलन के बारे में सोचने को प्रेरित करता है।
नोट: इस प्रकरण पर पूर्व-वक्तव्य टिप्पणीकारों में Matthew Henry, Albert Barnes, और Adam Clarke के विचारों से निम्न उद्धरण उपलब्ध हैं (संक्षेपित):
• Matthew Henry: यह उद्धृत विचार यह दर्शाते हैं कि युद्ध के समय आह्वानें और दायित्व परमेश्वर की योजना के अनुसार चलते हैं।
• Albert Barnes: वे बताते हैं कि बर्बरता के पीछे की वजह परमेश्वर के सत्तात्मक नियमन और लोगों के पापों का निष्कासन है।
• Adam Clarke: वे यह स्पष्ट करते हैं कि इस प्रकार के आदेश सदा प्रेरित न रहकर इतिहास के विशिष्ट समय और योजना के भाग हैं।