Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीयहोशू 11:23 बाइबल पद की व्याख्या
यहोशू 11:23 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
जैसा यहोवा ने मूसा से कहा था, वैसा ही यहोशू ने वह सारा देश ले लिया; और उसे इस्राएल के गोत्रों और कुलों के अनुसार बाँट करके उन्हें दे दिया। और देश को लड़ाई से शान्ति मिली।
यहोशू 11:23 पद-दर-पद बाइबल टीका
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यहोशू 11:23 समानांतर पद और संबंधित वचन
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यहोशू 21:44 (HINIRV) »
और यहोवा ने उन सब बातों के अनुसार, जो उसने उनके पूर्वजों से शपथ खाकर कही थीं, उन्हें चारों ओर से विश्राम दिया; और उनके शत्रुओं में से कोई भी उनके सामने टिक न सका; यहोवा ने उन सभी को उनके वश में कर दिया।

यहोशू 14:1 (HINIRV) »
जो-जो भाग इस्राएलियों ने कनान देश में पाए, उन्हें एलीआजर याजक, और नून के पुत्र यहोशू, और इस्राएली गोत्रों के पूर्वजों के घरानों के मुख्य-मुख्य पुरुषों ने उनको दिया वे ये हैं। (प्रेरि. 13:19)

यहोशू 11:23 पर टिप्पणी—यहोवा के वचन की पूर्ति और शांति का महान दृश्य
यह व verse यह दर्शाता है कि परमेश्वर ने मूसा के निर्देश के अनुरूप काम किया और यहोशू ने उन सब जगहों पर विजय प्राप्त करके वह देश इस्राएल के उत्तराधिकारियों को दे दिया। यह सिर्फ युद्ध का अंत नहीं, बल्कि परमप्रधान के भरोसे के साथ उनके नेपाल-देश के वितरण की शुरुआत भी है, जहाँ “देश को लड़ाई से शान्ति मिली।” इस वचन की महत्ता यह है कि यह परमेश्वर की सच्ची योजना के अनुरूप युग-युग तक चलने वाले विभाजन और बंटवारे के कार्य को संकेतित करता है, जिसमें हर ट्रबी और कुल आशिषित क्षेत्र पवित्र उद्देश्य के अनुसार आरक्षित हुआ।
वास्तविक संदर्भ क्या कहता है
यहोशू पुस्तक में परमेश्वर ने योधाओं को वहाँ के विभिन्न प्रदेशों पर विजय दिलाने के लिए बुलाया था। इस verse में यह स्पष्ट होता है कि ईश्वर ने मूसा के बोल दिए के अनुसार सभी विजय पूर्ण कर दीं, और अब उसे इस्राएल के त्रुटिहीन विभाजन के लिए व्यवस्थित कर दिया गया। यह “देष-नियोजन” का हिस्सा है, जिसमें परमेश्वर अपने लोगों को उनके धर्मस्थ और विरासत के अनुसार संचित करता है, ताकि वे एक एकेश्वरवादी समाज के रूप में सामर्थ्य और सुरक्षा पाएं।
मुख्य संदेश
पवित्र ग्रंथ के सूत्रित विचार
यह verse एक बार फिर यह दिखाता है कि परमेश्वर अपने वचनों के अनुरूप कार्य करता है। प्रभु ने अपने वादों को निभाने में कभी देरी नहीं की, चाहे मार्ग कठिन ही क्यों न हो। यह एक प्रेरणादायक प्रमाण है कि हमरों द्वारा उठाया गया हर कदम परमेश्वर के संकेतों से नियत होता है—यही आगे के इतिहास के लिए नयी आशीष देता है।
अनुशंसित क्रॉस-रेफरेंस
1) मरकुस 4:35-41 के समान ध्यान: प्रभु की आवाज़ से आपदा में भी शांति मिलती है — परमेश्वर की सत्ता और सुरक्षा।
2) यूहन्ना 14:27: “शांति मैं तुम्हें देता हूँ”— परमेश्वर की शांति और व्यवस्था की पुष्टि।
3) यातना-युद्ध के बाद का प्रसार-प्रशासन: विभाजन के चित्र से हमें यह समझ में आता है कि ईश्वर समय के अनुसार व्यवस्था बनाते हैं, ताकि समाज स्थिर रहे।
पारिभाषिक और बहुविध आयाम
यह verse यह भी कहता है कि ईश्वर का प्रेरित योजना पूर्ण होती है और मानव-समुदाय के लिए सही संसाधन तैयार होते हैं। यह हमारी विश्वासी जीवन में भरोसा बनाता है कि कठिन समय के बाद भी परमेश्वर की योजना निरंतर चलती है और उसका उद्देश्य पूरा होता है।
उद्धृत टिप्पणी और स्रोत-प्रकार
यह पंक्ति Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke जैसे प्रकाशनों के सार्वजनिक-domain टिप्पणियों से प्रेरित है। (उद्धृत-लंबी टिप्पणी के स्थान पर पंक्तियाँ संक्षेप में दी गई हैं—यथास्थिति के अनुसार पूर्ण उद्धरण यहाँ नहीं है।)
व्यावहारिक आध्यात्मिक स्मरण
जीवन में जब आप किसी बड़े निर्णय या उपलब्धि के समय खड़े हों, तो याद रखें कि परमेश्वर ने शुरू से अंत तक दिशा-निर्देश दिए हैं। सत्य यही कि भरोसा बनाये रखें, ईश्वर की वचन-विश्वासिता पर टिके रहें, और स्मरण रखें कि संघर्ष के बाद भी वह शांति और व्यवस्था देता है।
संक्षिप्त देवotional विचार
परमेश्वर हमारे जीवन के हर क्षेत्र को संगठित कर देते हैं—हमारे संघर्षों के बाद भी वह शांति को बनाए रखते हैं। आज आप जो क्षेत्र भी आनंद और सुरक्षा चाहते हैं, उसे परमेश्वर की योजना के अनुसार बाँटने की प्रतीक्षा करें; वही शांति आपको प्राप्त होगी जो केवल ईश्वर दे सकता है।