Old Testament
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यहोशू 11:11 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
और जितने प्राणी उसमें थे उन सभी को उन्होंने तलवार से मारकर सत्यानाश किया; और किसी प्राणी को जीवित न छोड़ा, और हासोर को यहोशू ने आग लगाकर फुँकवा दिया।
यहोशू 11:11 पद-दर-पद बाइबल टीका
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यहोशू 11:11 समानांतर पद और संबंधित वचन
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यहोशू 10:40 (HINIRV) »
इसी प्रकार यहोशू ने उस सारे देश को, अर्थात् पहाड़ी देश, दक्षिण देश, नीचे के देश, और ढालू देश को, उनके सब राजाओं समेत मारा; और इस्राएल के परमेश्वर यहोवा की आज्ञा के अनुसार किसी को जीवित न छोड़ा, वरन् जितने प्राणी थे सभी का सत्यानाश कर डाला।

व्यवस्थाविवरण 20:16 (HINIRV) »
परन्तु जो नगर इन लोगों के हैं, जिनका अधिकारी तेरा परमेश्वर यहोवा तुझको ठहराने पर है, उनमें से किसी प्राणी को जीवित न रख छोड़ना*,
यहोशू 11:11 पर विस्तृत टिप्पणी (हिंदी)
यह अध्याय यहोशू के नेतृत्व में कॉन के विजय अभियान का एक भाग है। 11:1-15 में उत्तर-पूर्व से मिली सीमाओं के विरोधियों पर यहोशू की सेना की निर्णायक सफलता दर्ज है। 11:11 का मुख्य संदेश यह है कि Ysrael के परमेश्वर की अनुमति से शहरों और प्राणियों का निष्पादन किया गया, ताकि देश की बस्ती सचेत और सुरक्षित रहे। यह दृश्य कठोर दिख सकता है, परन्तु इसमें एक धार्मिक-नैतिक पाठ भी निहित है: पाप और प्रतिरोध के विरुद्ध ईश्वर का निर्णायक न्याय।
पद का पाठ-पूर्व संदर्भ
11:11 बताता है कि जो कुछ भी उनके नियंत्रण में था, तलवार से समाप्त कर दिया गया; किसी जीवित को न छोड़ा गया; हासोर को आग से जला दिया गया। यह संदेश उस समय की θαशित रणनीति का प्रत्यक्ष चित्रण है जब धरती के विरुद्ध विद्रोह और प्रतिरोध बुरी तरह नष्ट कर दिये जाते हैं ताकि भूमि परमादेश के अनुसार हर प्रकार की दुष्ट ताकत से मुक्त रहे।
मुख्य आध्यात्मिक पाठ
- परमेश्वर के परियोजना-कार्य में पवित्रता और आज्ञा के पालन का महत्त्व: हिंसा केवल तब अनुमत मानी जाती है जब न्याय और पवित्र योजना के लिए अनिवार्य हो। यह संकेत भी देता है कि बुराई के विरुद्ध पृथ्वी पर परमेश्वर की यह न्यायिक कार्रवाई मानवीय अपेक्षाओं से ऊपर है।
- ईश्वर के नियंत्रण में निर्भीकता और विश्वास: यीशु के द्वारा निर्धारित सीमाओं के भीतर वीर योद्धा भी भय और दबाव से मुक्त थे, क्योंकि वे परमेश्वर के आदेश के अनुसार चले।
अन्य पवित्र ग्रंथों के संगत टिप्पणियाँ
यहाँ तीन उल्लेखनीय cross-references (संयुक्त विचार के लिए) दिए जा रहे हैं:
इन संदर्भों से स्पष्ट होता है कि शास्त्र में “न्याय” और “कर्म-प्रभारी भूमिका” परिस्थिति के अनुसार बदलती रहती है, परन्तु परमेश्वर की पब्लिक-न्यायलय की नीयत स्थिर रहती है।
जीवनीय अनुप्रयोग
- हमारी परिस्थितियाँ किसी भी हिंसा के पक्ष में न हो जाएँ; परन्तु विश्वास करते समय हम समझ लें कि परमेश्वर का उद्देश्य संसार के बुरे प्रभावों से लोगों की रक्षा और उच्चतम न्याय है।
- विश्वास-योगी जीवन: संकट के समय में ईश्वर की योजना और समय पर निर्भर रहना, न कि मानवीय दखल या धारणाओं पर।
- नैतिक संकल्पना: समाज में अत्याचार के विरुद्ध खड़ा होना, पर आवश्यकता हो तो न्याय-प्रक्रिया का सम्मान करते हुए भी दया और पुनःस्थापन के मार्ग ढूंढना।
संक्षिप्त सार
यहोशू 11:11 एक कठोर परन्तु महत्वपूर्ण दृश्य प्रस्तुत करता है कि परमेश्वर के उद्धारकारी उद्देश्य के लिए बुराई का अंत कैसे किया जाता है, ताकि देश भर में शांति और धर्मी व्यवस्था स्थापित की जा सके। यह पाठ आज भी हमें यह याद दिलाता है कि परमेश्वर की योजना में न्याय और प्रजापालक धैर्य एक साथ चलते हैं, और हमारे लिए हैंडबुक की तरह है—कठीन परिस्थितियों में भी ईश्वर के निर्देश पर चलने की सीख।