Old Testament
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यहोशू 11:21 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
उस समय यहोशू ने पहाड़ी देश में आकर हेब्रोन, दबीर, अनाब, वरन् यहूदा और इस्राएल दोनों के सारे पहाड़ी देश में रहनेवाले अनाकियों को नाश किया; यहोशू ने नगरों समेत उनका सत्यानाश कर डाला।
यहोशू 11:21 पद-दर-पद बाइबल टीका
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यहोशू 11:21 समानांतर पद और संबंधित वचन
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व्यवस्थाविवरण 9:2 (HINIRV) »
उनमें बड़े-बड़े और लम्बे-लम्बे लोग, अर्थात् अनाकवंशी रहते हैं, जिनका हाल तू जानता है, और उनके विषय में तूने यह सुना है, कि अनाकवंशियों के सामने कौन ठहर सकता है?

गिनती 13:22 (HINIRV) »
वे दक्षिण देश होकर चले, और हेब्रोन तक गए; वहाँ अहीमन, शेशै, और तल्मै नामक अनाकवंशी रहते थे। हेब्रोन मिस्र के सोअन से सात वर्ष पहले बसाया गया था।

व्यवस्थाविवरण 1:28 (HINIRV) »
हम किधर जाएँ? हमारे भाइयों ने यह कहके हमारे मन को कच्चा कर दिया है कि वहाँ के लोग हम से बड़े और लम्बे हैं; और वहाँ के नगर बड़े-बड़े हैं, और उनकी शहरपनाह आकाश से बातें करती हैं; और हमने वहाँ अनाकवंशियों को भी देखा है।'
यहोशू 11:21 पर टिप्पणी
यह verse यहोशू के नेतृत्व में इज़राइल के आक्रमण-युग का एक हिस्सा है, जब मिस्र से मुक्त होकर प्रवेश कर चुके लोग कनान के निवासियों के विरुद्ध निर्णायक लड़ाइयों से गुजरते हैं। इस पंक्ति में पहाड़ी देशों के आक्रमण और हिमालयी क्षेत्रो के निवासियों—अनाकियों—का संहार स्पष्ट रूप से यह दर्शाता है कि ईश्वर की योजना के अनुसार यहूदा और इस्राएल के लिए कनान के विशाल दायरे को नियंत्रित कर लेने की कोशिश चल रही थी।
मुख्य अर्थ
व्यक्ति-स्तर पर देखें तो यहोशू ने हेब्रोन, दबीर, अनाब जैसे कड़े विनाश के स्थानों और उनके निवासियों पर विजय प्राप्त की। यहाँ “नाश किया” और “सत्यानाश कर डाला” के शब्द यह दिखाते हैं कि युद्ध के परिणामस्थल शास्त्रीय रूप से गहन और निर्णायक थे। यह एक अनुपम राजनीतिक-धार्मिक परिवर्तन का संकेत है: इज़राइल की भूमि के भीतर बाहरी विरोधियों के विरुद्ध स्थायी नियंत्रण की स्थापना।
तीन प्रमुख विषय
अनुरूप पारिवारिक पाठ और अन्य संदर्भ
इसी प्रकार के संदर्भ अन्य बार इस्राएल की उन्नति में मिलते हैं, जैसे कि अयूब और अन्य पड़ोसी नगरों के विरुद्ध निर्णायक युद्धों में। इनमें यह विचार उभरता है कि ईश्वर की सुरक्षा तब संभव होती है जब राष्ट्र उसकी आज्ञाओं के अनुरूप कार्य करता है। नीचे दिये गए cross-reference विचारश्रेणियाँ इस विचार को संतुलित करती हैं:
इन संदर्भों से स्पष्ट होता है कि यह पाठ धार्मिक-राजनीतिक उन्नति के साथ-साथ ईश्वर की राह पर चलने की प्रतिबद्धता से जुड़ा है, न कि मात्र सैनिक विजय का रिकॉर्ड।
व्यवहारिक चिंतन
यह verse आज हमारे लिए एक नैतिक चुनौती नहीं देता, पर एक स्मरण देता है कि कठिन समय में ईश्वर की योजनाओं के अनुरूप चरित्र सत्कार्ड रहने की आवश्यकता है। संघर्ष के समय में भी विश्वास, धैर्य और नैतिक विकल्पों के साथ संचालन करने की सीख मिलती है—यहाँ हिंसा के दृश्य historical context में समझी जानी चाहिए, और भविष्य के न्याय-सूत्रों के लिए आशीर्वाद और जिम्मेदारी दोनों की धारणा बनी रहे।
संक्षिप्त समापन
यहोशू 11:21 में पहाड़ी देश के अनाकियों का नाश यह संकेत देता है कि ईश्वर की प्रतिज्ञा-भूमि की स्थिरता और सुरक्षा के लिए यहूदा-इस्राएल ने आध्यात्मिक-राजनीतिक मार्ग को अपनाया। यह पाठ शक्तिशाली विजय के साथ-साथ आस्थागत निर्देशों को भी याद दिलाता है—कि परमेश्वर की योजना में प्रभुत्व और पवित्रता दोनों आवश्यक हैं।
इस सेट के उद्धरण और प्रेरित विचार
इस पंक्ति के बारे में प्रसिद्ध प्रारम्भिक लेखक Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के संकलनों से संक्षेप में एकीकृत भाव सामने आता है: वे कहते हैं कि ईश्वर की सहायता से अनुशासन से भरपूर विजय परमप्रभु के दायित्व का परिणाम है; धर्म-संरक्षण और विरासत की सुरक्षा इसी के भीतर आती है।