Old Testament
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यहोशू 23:1 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
इसके बहुत दिनों के बाद, जब यहोवा ने इस्राएलियों को उनके चारों ओर के शत्रुओं से विश्राम दिया, और यहोशू बूढ़ा और बहुत आयु का हो गया*,
यहोशू 23:1 पद-दर-पद बाइबल टीका
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यहोशू 23:1 समानांतर पद और संबंधित वचन
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यहोशू 13:1 (HINIRV) »
यहोशू बूढ़ा और बहुत उम्र का हो गया था; और यहोवा ने उससे कहा, “तू बूढ़ा और बहुत उम्र का हो गया है, और बहुत देश रह गए हैं*, जो इस्राएल के अधिकार में अभी तक नहीं आए।

यहोशू 21:44 (HINIRV) »
और यहोवा ने उन सब बातों के अनुसार, जो उसने उनके पूर्वजों से शपथ खाकर कही थीं, उन्हें चारों ओर से विश्राम दिया; और उनके शत्रुओं में से कोई भी उनके सामने टिक न सका; यहोवा ने उन सभी को उनके वश में कर दिया।

यहोशू 11:23 (HINIRV) »
जैसा यहोवा ने मूसा से कहा था, वैसा ही यहोशू ने वह सारा देश ले लिया; और उसे इस्राएल के गोत्रों और कुलों के अनुसार बाँट करके उन्हें दे दिया। और देश को लड़ाई से शान्ति मिली।
यहोशू 23:1 पर केंद्रित टिप्पणी: समय और परन्तुता के बीच विश्वास का स्थायित्व
मुख्य interpretive point: यहोशू 23:1 बताए बिना शब्दों में नहीं रहता कि फिर भी यहोशू बूढ़ा हो गया और उन्होंने यहोवा के साथ इस्राएलियों के लिए विपरीत शत्रुओं पर विश्राम पाया; यह साक्ष्य देता है कि परमेश्वर के साथ किये गए वादों की पूर्णताओं के बीच उम्र और समय के प्रभाव भी अंततः उनकी प्रचंड कृपा के नीचे रहते हैं। यह बोलता है कि दाऊदीय आशीर्वाद, वरिष्ठता की स्थिति के साथ, इस्राएल के इतिहास में नई जिम्मेदारियों और संरक्षण की दिशा दर्शाती है।
साहित्यिक संदर्भ (लिटरेरीContext)
यहोशू 23 अध्याय वतनावार यहूदा के नेता के जीवन के उत्तरार्ध में लिखे गए हैं। अब्राहमिक वंश और परमेश्वर की प्रतिज्ञाओं के पूर्ण होने की प्रक्रिया में यह पाठ यह दर्शाता है कि सफलता शत्रुओं से विश्राम पाने और नेतृत्व के रूप में मर्यादा बनाए रखने के माध्यम से आती है। यह महत्त्वपूर्ण है कि संकल्पित पूर्ववर्ती विजय के बाद नया चरण शुरू होता है: बूढ़ा हो जाना और कर्तव्य पर टिकना।
थियोलॉजिकल महत्व
- विश्वास की स्थिरता: यहोशू के वृद्ध होने के बावजूद ईश्वर के साथ अविश्वास-रहित जीवन के संकेत देता है।
- आशीर्वाद का समय: "किसी को विश्राम दें" का विषय यह दर्शाता है कि परमेश्वर की योजना पूरी होने पर विश्राम और संरक्षण मिलता है, न कि भय या चिंता।
- उत्तराधिकार की तैयारी: यहोशू के वृद्ध होने के साथ यहोशू के उत्तराधिकार के लिए तैयारी और यहूदियों के लिए नेतृत्व के परिवर्तन की मांग स्पष्ट है।
अन्य शास्त्रीय टिप्पणीकारों के संयोग (संयुक्त निष्कर्ष)
यहाँ कुछ पुराने-प्रकाशित स्रोतों के सन्निकटन विचार हैं जो इस पाठ की समकालीन समझ के साथ संगत रहते हैं:
क्रॉस-रेफरेंसेस (संक्षेप में समझावन)
- यहूदी नेतृत्व के परिवर्तन के बारे में पूर्व-चेतावनाएँ: अन्य पुस्तकों में नेतृत्त्व के स्थानांतरण का वर्णन मिलता है, जो विश्वस्तर पर विश्वास की बुनियाद को मजबूत करते हैं।
- परमेश्वर के वादों की पूर्णता: जन-प्रतीक्षा में विश्राम का महत्व दर्शाया गया है, ताकि यह स्पष्ट हो कि क्रिया-प्रत्यय पूरी तरह से ईश्वर के नियंत्रण में हैं।
- दायित्व और स्मरण-चेतावनी: पुराने और नए नेतृत्व के बीच स्मरणीय आदेश और आदर्शों के संकल्प को जोड़ती है।
चिंतन के प्रश्न
संक्षिप्त निष्कर्ष
यहोशू 23:1 हमें सिखाता है कि समय की गति चाहे जैसी भी हो, परमेश्वर के वादे और नेतृत्व-अनुशासन स्थिर रहते हैं। बूढ़े होने के बावजूद यहोशू ने धर्म-परायणता बनाए रखी और वह इस्राएल के लिए एक सुरक्षित मार्गदर्शक बने रहे। जीवन के किसी भी चरण में, विश्वास के केन्द्र में रहे तो विश्राम और सुरक्षा को पाए हमारे जीवन में भी प्रवेश मिलता है।
उद्धृत रूप में Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke की छोटी-छोटी सटीक टिप्पणियाँ शामिल हैं जहाँ उपयुक्त लगे।