Old Testament
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यहोशू 23:15 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
तो जैसे तुम्हारे परमेश्वर यहोवा की कही हुई सब भलाई की बातें तुम पर घटी हैं, वैसे ही यहोवा विपत्ति की सब बातें भी तुम पर लाएगा और तुम को इस अच्छी भूमि के ऊपर से, जिसे तुम्हारे परमेश्वर यहोवा ने तुम्हें दिया है, सत्यानाश कर डालेगा।
यहोशू 23:15 पद-दर-पद बाइबल टीका
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यहोशू 23:15 समानांतर पद और संबंधित वचन
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व्यवस्थाविवरण 28:15 (HINIRV) »
“परन्तु यदि तू अपने परमेश्वर यहोवा की बात न सुने, और उसकी सारी आज्ञाओं और विधियों के पालन करने में जो मैं आज सुनाता हूँ चौकसी नहीं करेगा, तो ये सब श्राप तुझ पर आ पड़ेंगे।

न्यायियों 6:1 (HINIRV) »
तब इस्राएलियों ने यहोवा की दृष्टि में बुरा किया, इसलिए यहोवा ने उन्हें मिद्यानियों के वश में सात वर्ष कर रखा।

यहोशू 23:15 पर निहितार्थ — एक चेतावनी और बाबा की प्रतिफल
मतलब स्पष्ट है: जैसे परमेश्वर यहोवा ने भलाई की बातें तुम्हारे हिस्से कर दी हैं, वैसे ही विपत्ति की बातें भी कर देगा अगर तुम उसकी व्यवस्था से भटक जाते हो। यह चेतावनी भूमि-केन्द्रित भाषा में है, पर भावनात्मक और नैतिक असर आज भी स्पष्ट है: आशीष-वंचित होने के पीछे कानून-व्यवस्था की अवहेलना है।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
यहोशू मरकज के बाद इब्राहिम, इसहाक और याकूब के परमेश्वर ने इस्रাঈलियों को उनके विरासत-भूमि पर स्थापित किया। यहोशू 23 भाग उनके अधीनस्थ नेताओं के साथ जीवन-यात्रा के आखिरी चरण में है—यहूदी समाज के लिए एक स्मरण-आधार है कि प्रभु के लाभ और दंड दोनों स्थिर और न्यायसंगत हैं। यदि वे आदेशों को निभाते रहे, तो भूमि में स्थिरता और आशीष होगी; यदि नहीं, तो मिट्टी से उठती विपदाएँ स्वाभाविक परिणाम रूप में आयेंगी।
व्याख्या के मुख्य बिंदु
सूक्ष्म व्याख्या (चरित्र-सार और कथन) — 3 प्रेसिपल बिंदु
1) भरोसेमंद वचन: यहोवा की कही हुई भलाईयां एक परिणामी रिश्ता है—उसके करुणा और वचन के अनुसार जीवन जीना।
2) वैध दायित्व: भलाई के साथ दायित्व जुड़ा है; प्रत्यक्ष परिणाम भी आता है, इसलिए समर्पण में निरंतरता आवश्यक है।
3) भूमि और न्याय: जमीन एक दिये गये आशीष का संकेत है; खतरा तब आता है जब हम टल जाते हैं या विरुद्ध चलते हैं।
हमे समझने के लिए संलग्न क्रॉस-रेफरेंसेस
- स्मरणात्मक दायित्व: यह प्रकार की चेतावनी देह में “याद रहे” के तरह काम करती है—यहोशू 22:5 के अनुरूप, यहोवा के दायित्वों को निभाने की प्रेरणा देता है।
- आशीष और दंड का संतुलन: द्वारान्तरी अध्यायों में यहोशू 1:7-9 की तरह, धर्मी जीवन के लिए दृढ़ता और वचन-पालन की आवश्यकता को व्यक्त करता है।
- सामाजिक-आचार: लोगों के बीच व्यवहार और समुदायिक अनुशासन के साथ प्रभु से जुड़ना—यहोशू 24:15 जैसे उद्धरण इनमें से एक है, जो आस्था-जीवन के समन्वय को दर्शाता है।
आनु-विधिक takeaway
जोखिम और इनाम एक साथ चलते हैं—यहोवा की बताई पथ पर चलते समय हम भलाई पाते हैं; उपेक्षा करने पर विपत्तियाँ आ सकती हैं। जीवन में श्रद्धा, वचन-पालन, और समुदाय के लिए जिम्मेदारी बनाए रखें ताकि भूमि-प्राप्ति जैसी आशीष स्थिर बनी रहे।
सूचना/Quotes (Public-domain प्रभाव)
यह अनुभाग मुख्य तौर पर नवीन पाठ के लिए मूल विचार प्रस्तुत करता है। Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के सार्वजनिक-उद्धरण उपलब्ध हैं, पर यहाँ संक्षेप में उनके विश्लेषण से प्रेरित तत्व समाहित हैं। अगर आप उनके पुख्ता वाक्यों की पंक्तियाँ चाहें, मैं दे सकता हूँ।