Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीयहोशू 7:1 बाइबल पद की व्याख्या
यहोशू 7:1 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
परन्तु इस्राएलियों ने अर्पण की वस्तु के विषय में विश्वासघात किया; अर्थात् यहूदा गोत्र का आकान, जो जेरहवंशी जब्दी का पोता और कर्मी का पुत्र था, उसने अर्पण की वस्तुओं में से कुछ ले लिया; इस कारण यहोवा का कोप इस्राएलियों पर भड़क उठा।
यहोशू 7:1 पद-दर-पद बाइबल टीका
*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।
यहोशू 7:1 समानांतर पद और संबंधित वचन
उन बाइबल पदों को देखें जो विषय, शिक्षा या संदर्भ के आधार पर इस अंश से जुड़े हैं। समानांतर पदों की तुलना करने से इस वचन के संदर्भ और संदेश को अधिक गहराई से समझने में सहायता मिलती है। किसी चित्र को चुनें और संबंधित पद, उसकी व्याख्या तथा पद-दर-पद बाइबल टीका देखें।

यहोशू 22:20 (HINIRV) »
देखो, जब जेरह के पुत्र आकान ने अर्पण की हुई वस्तु के विषय में विश्वासघात किया, तब क्या यहोवा का कोप इस्राएल की पूरी मण्डली पर न भड़का? और उस पुरुष के अधर्म का प्राणदण्ड अकेले उसी को न मिला'।”

1 इतिहास 2:6 (HINIRV) »
और जेरह के पुत्र: जिम्री, एतान, हेमान, कलकोल और दारा सब मिलकर पाँच पुत्र हुए।

यहोशू 7:20 (HINIRV) »
आकान ने यहोशू को उत्तर दिया, “सचमुच मैंने इस्राएल के परमेश्वर यहोवा के विरुद्ध पाप किया है, और इस प्रकार मैंने किया है,
परिचयात्मक अवलोकन
यहोशू अध्याय 7 में इस्राएलियों के अधिकार-त्याग (Achan पर) के कारण एक बार फिर योद्धाओं की कमी और ईश्वर की पूजा में विश्वासघात के प्रभाव दर्शाए जाते हैं. यहोपन में परमेश्वर ने इस्राएल को विजयी प्रदान किया था, पर अर्पण की वस्तुओं के प्रयोग के समय निष्ठां और ईमानदारी की कमी ने उनकी सेना को परास्त कर दिया। इस घोर परिणाम से यह स्पष्ट होता है कि ईश्वर के अभिषिखित कार्यों में पवित्रता और आज्ञा का पालन कितना अनिवार्य है।
पद पर विचार
यहोशू 7:1 (HINIRV) - “परन्तु इस्राएलियों ने अर्पण की वस्तु के विषय में विश्वासघात किया; अर्थात् यहूदा गोत्र का आकान, जो जेरहवंशी जब्दी का पोता और कर्मी का पुत्र था, उसने अर्पण की वस्तुओं में से कुछ ले लिया; इस कारण यहोवा का कोप इस्राएलियों पर भड़क उठा।”
पाठ का स्पष्ट सार
यह अध्याय दर्शाता है कि अकस्मात् विजय के पीछे भी एक निजी अपवित्रता फूट पड़ती है, जिसने समुदाय को संकट में डाल दिया. आकान का चोरी करना सिर्फ उसे व्यक्तिगत रूप से दंडित नहीं करता, बल्कि पूरे समुदाय के लिए परिणाम देता है. परमेश्वर की पवित्रता और वफादारी के बिना किसी क्रियात्मक सफलता का लाभ नहीं उठ सकता.
मुख्य आध्यात्मिक शिक्षण
पवद-तुलना टिप्पणी
यहोशू 7 की घटना हमें हेब्रू बाइबल के अन्य हिस्सों में उल्लिखित उसी सिद्धांत से जोड़ती है: परमेश्वर की स्वीकृति के लिए लोक के भीतर एक निष्ठाजनक आचरण आवश्यक है (उद्धार/युद्ध के मामलों में विशेषकर)। उदाहरण स्वरूप, निकट की अन्य घटनाओं में भी पाप के कारण राज्य के लिए विपरीत परिणाम आना दिखता है; जबकि पवित्र आज्ञाओं की पूर्णता ही समुदाय को सुरक्षित रखती है।
स्थिर पंक्ति और अनुभाविक पाठ
- आकान का पाप एक व्यक्तिगत चूक नहीं, बल्कि पूरे इस्राएली समुदाय के लिए एक चेतावनी बन गई. चोर-चाल से उत्पन्न विपत्ति की चिंगारी भी ईश्वर के आशीर्वाद को जला देती है. इस घटना से हमें अपने जीवन में पवित्रता की कसौटी—आज्ञा-पालन—का महत्व स्मरण होता है।
आवेदन
हम अपने दिनों में भी विचार करें कि क्या हम अपने व्यक्तित्व,आचरण या व्यवहार में ईश्वर के निर्देशों के अनुरूप चल रहे हैं. कार्यस्थल, परिवार या समुदाय में किसी भी प्रकार की चोरी, झूठ या अनुचित लाभ से बचना चाहिए ताकि परमेश्वर की Rosie-प्राप्ति और सामुदायिक शांति बनी रहे. संकल्प लें कि हम निष्ठा से अपनी चीजें, हर काम और परमेश्वर के वचनों के अनुसार जीवन बितायेंगे।
क्रॉस-रेफरेंस(Cross-References)
1) याकूब 2:14-26: विश्वास के साथ कर्मों की परीक्षा—कार्य ही प्रमाणित करते हैं कि विश्वास जीवित है; पाप की चिंगारी से भरी चाबी से सुरक्षा कवच टूट सकता है।
2) नीति 16:18-19: घमंड से पाप बढ़ता है और समुदाय के भीतर असन्तोष-झगड़े उत्पन्न होते हैं; आत्म-नीति से एकता और पवित्रता बनी रहती है।
3) यहोशू 22:20: यदि किसी ने सम्मिलित होकर सीमा-रक्षा के साथ गलत किया, तो वह भी समुदाय के लिए विपत्ति का कारण बन सकता है—निष्ठा की आवश्यकता अब भी है।
संक्षिप्त निष्कर्ष
यहोशू 7 स्पष्ट करता है कि सफलता बाहरी शक्तियों से नहीं, बल्कि आंतरिक ईमानदारी और सामुदायिक निष्ठा से आती है. परमेश्वर की पवित्रता के अनुरूप चलना ही जीवन-युद्ध में विजय दिलाता है.
नोट: इस पाठ पर Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के सार्वजनिक-डायरेक्ट टिप्पणी-उद्धरण की संक्षिप्त पंक्तियाँ नीचे उद्धृत हैं:
“The sin of Achan not only ruined him, but spoiled the whole camp” (अनुदर्शन: एक संक्षिप्त उद्धरण, संदर्भ के लिए) — पारिभाषिक सार.
“Where the Lord’s anger burns, there is no room for private advantage” — (अर्थपूर्ण संयोजन, Barnes/Clarke के सार से प्रचलित विचार).
उद्धरण उल्लेख केवल संदर्भ के लिए है; विस्तृत पाठ नहीं दिया गया है।