Old Testament
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यहोशू 7:4 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
इसलिए कोई तीन हजार पुरुष वहाँ गए; परन्तु आई के रहनेवालों के सामने से भाग आए,
यहोशू 7:4 पद-दर-पद बाइबल टीका
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यहोशू 7:4 समानांतर पद और संबंधित वचन
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लैव्यव्यवस्था 26:17 (HINIRV) »
और मैं भी तुम्हारे विरुद्ध हो जाऊँगा, और तुम अपने शत्रुओं से हार जाओगे; और तुम्हारे बैरी तुम्हारे ऊपर अधिकार करेंगे, और जब कोई तुमको खदेड़ता भी न होगा तब भी तुम भागोगे।

व्यवस्थाविवरण 28:25 (HINIRV) »
“यहोवा तुझको शत्रुओं से हरवाएगा; और तू एक मार्ग से उनका सामना करने को जाएगा, परन्तु सात मार्ग से होकर उनके सामने से भाग जाएगा; और पृथ्वी के सब राज्यों में मारा-मारा फिरेगा।

व्यवस्थाविवरण 32:30 (HINIRV) »
यदि उनकी चट्टान ही उनको न बेच देती, और यहोवा उनको दूसरों के हाथ में न कर देता; तो यह कैसे हो सकता कि उनके हजार का पीछा एक मनुष्य करता, और उनके दस हजार को दो मनुष्य भगा देते?
सीधे अर्थ का स्पष्टउल्लेख
यहोशू 7:4 में कहा गया है कि इस घटना में तीन हजार पुरुष आगे बढ़े, परन्तु वे ईश्वरीय प्रतिरोध के सामने से भाग गए। यह करेंसी बताती है कि इस आक्रमण में असफलता क्यों आई और क्यों परमेश्वर ने इस झटके से उनका मार्गदर्शन किया।
प्रसंगजन्य परिचय
यह्रूजों के युग में आगमन के बाद इरून के नगर ऐक के विरुद्ध Yahweh की लड़ाई में यह घटना एक चेतावनी के समान है कि विजय सिर्फ संख्या नहीं, बल्कि परमेश्वर की कृपा और साक्षात्कार पर निर्भर है। यहोशू ने सुरक्षा के लिए दायित्व किया, पर कुछ समय के लिए मान लिया गया कि शस्त्र की भारी संख्या ही विजय की कुंजी है; परिणामस्वरूप वे विचलित और निर्बल हो उठे।
व्याख्यात्मक विश्लेषण
- पीछे हटना: तीन हजार का प्रयास भी असफल हुआ, क्योंकि वे खिलाफ रुकावटों और भय से घिरे थे। भाग जाना दर्शाता है कि भय ने उनके आंतरिक दृढ़ता को कुचल दिया।
- प्रतिज्ञान और पराक्रम: यह वास्तविकता है कि परमेश्वर के वरदान के बिना युद्ध में सफलता संभव नहीं है; यहूदियों को आत्म-समीक्षा और विश्वास की सुधर की जरूरत थी।
2-3 व्यावहारिक बिंदु
सংশोदन-उद्धरण (क्रॉस-रेफरेंस)
यह घटना अन्य स्थानों के संदर्भों से मेल खाती है जहाँ लोग भय के कारण असफल होते हैं या परमेश्वर की सहायता के बिना अपने कदम उठाते हैं। संदर्भ-सम्बन्धित विचार:
1) प्रेरित की एक पंक्ति—समूह की समन्वय और विश्वास का महत्त्व बताती है कि एकजुट होकर परमेश्वर की इच्छा को खोजना चाहिए।
2) एक अन्य संदर्भ—यही बात है कि डर के कारण समर्थनों के बिना भीतरी दृढ़ता खो जाती है; पर परमेश्वर की कृपा से ही विजय संभव है।
3) तीसरा संदर्भ—आत्म-निरीक्षण: हर योजना पर परमेश्वर की इच्छा के अनुरूप पुनर्विचार आवश्यक है।
तीन प्रमुख बिंदुओं का संक्षेप
- असफलता का कारण: भय और बिना प्राप्त परमेश्वर के प्रयास।
- पाठ: दृढ़ विश्वास और परमेश्वर के निर्देश के साथ ही विजय संभव है।
- जीवनक अनुभव: पूर्वाग्रह के बिना आत्म-निरीक्षण और सामूहिक निर्भरतामय कदम उठाने चाहिए।
संक्षिप्त निष्कर्ष और उपयोगी takeaway
यहोशू 7:4 हमें सिखाता है कि विजय केवल सेना की ताकत नहीं, बल्कि परमेश्वर की इच्छा के अनुरूप विश्वास और संयम पर निर्भर है। हर योजना और संघर्ष में प्रभु की दिशा को seeking करना एवम् भय पर नियंत्रण रखना अनिवार्य है ताकि क्रमशः ईश्वर हमारी निष्ठा को बढ़ावा दें।
उद्धृत टिप्पणी (public-domain से संदर्भित संकेत)
मार्थो मैथ्यू हेन्री, अलबर्ट बार्न्स और एडम क्लार्क के मौलिक टिप्पणियों में यह भावना प्रकट होती है कि परमेश्वर की सहायता के बिना मानव शक्तियाँ कमजोर पड़ती हैं; भय के कारण निर्णयों में कमी आ जाती है और परिणामतः संघर्ष में हार होती है। यदि उद्धरण उपलब्ध हो, तो वे संक्षेप में यह बताते हैं कि परीक्षणों के बीच विश्वास की स्थिरता ही विजय की कुंजी है।