Old Testament
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यहोशू 7:6 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
तब यहोशू ने अपने वस्त्र फाड़े, और वह और इस्राएली वृद्ध लोग यहोवा के सन्दूक के सामने मुँह के बल गिरकर भूमि पर सांझ तक पड़े रहे; और उन्होंने अपने-अपने सिर पर धूल डाली।
यहोशू 7:6 पद-दर-पद बाइबल टीका
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यहोशू 7:6 समानांतर पद और संबंधित वचन
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उत्पत्ति 37:29 (HINIRV) »
रूबेन ने गड्ढे पर लौटकर क्या देखा कि यूसुफ गड्ढे में नहीं है; इसलिए उसने अपने वस्त्र फाड़े,

उत्पत्ति 37:34 (HINIRV) »
तब याकूब ने अपने वस्त्र फाड़े और कमर में टाट लपेटा, और अपने पुत्र के लिये बहुत दिनों तक विलाप करता रहा।

गिनती 14:6 (HINIRV) »
और नून का पुत्र यहोशू और यपुन्ने का पुत्र कालेब, जो देश के भेद लेनेवालों में से थे, अपने-अपने वस्त्र फाड़कर,
यहोशू 7:6 पर टिप्पणी — एक क्षोभित हृदय की पुकार
यहोशू 7:6 में यहोशू और इस्राएली वृद्ध लोग अयहोव के सन्दूक के सामने अपनी कब्र जैसी स्थिति में आकर घुटने टेकते हैं। वे अपने वस्त्र फाड़ते हैं, मुँह के बल गिरते हैं और भूमि पर धूल डालते हैं। यह दृश्य गहरे आघात, गहरी पश्चाताप और ईश्वर के प्रति विवेकपूर्ण संवेदना का प्रतीक है। यह युद्ध के बीच की स्थिति है, जब ईश्वर की विजय असहज लगने लगती है और आदर्श के विरुद्ध एक तात्कालिक असफलता सामने आ जाती है। यहाँ पर साधारण विजय-उत्साह नहीं, बल्कि आध्यात्मिक परिशुद्धता और ईश्वर के सामने आत्म-परख प्रस्तुत है।
कथा के अध्याय में यह verse — क्या घटित हुआ?
यहोशू 7 अध्याय में इज्राइलियों की पहली बड़ी हार का वर्णन है। Achan की चोरी के कारण इज्राइल हार मानते हैं और यहोशू की सेना पर असफलता का धब्बा लगता है। हार की क्षति से जो दर्द और पश्चाताप प्रकट होता है, वही 6वें Verse में सामुदायिक रूप से व्यक्त होता है: यहोशू और वृद्ध लोग सन्तुलित आत्म-निगरानी के साथ अपने कर्मों को ईश्वर के सामने स्वीकार करते हैं। यह एक सामूहिक पवित्र अवस्था है, जिसमें दोष स्वीकारना और ईश्वर के साथ पुनः संबंध स्थापित करना सबसे आवश्यक है।
मुख्य आध्यात्मिक पाठ — क्या नया एसोसिएट करता है?
मुख्य पाठ यह है कि परमेश्वर की योजना में विफलता तब होती है जब व्यक्तिगत चोरी, सरासर अनदेखी या आत्म-स्वार्थ रास्ते अपनाए जाते हैं। इस verse में यह स्पष्ट है कि परमेश्वर के सामर्थ्य के साथ सामंजस्य बनाए रखने के लिए पवित्रता और ईमानदारी अत्यंत आवश्यक है। यह घटना हमें आत्म-समझ और सामाजिक-सम्प्रति में विनम्रता सिखाती है—कि जब sin के परिणाम सामने आते हैं, तब एक सामूहिक होकर दोष स्वीकारना और ईश्वर के मार्ग को पुनः प्राप्त करना चाहिए।
इतिहासिक-आध्यात्मिक तुलना
- प्रेरक पाठ: यहोशू 6, ग़ौर करें कि ज्यों-ज्यों लोग ईश्वर की योजना के अनुसार चलते हैं, विजयी होते हैं; - अय्यूब 42:6 जैसे संशय-घड़ी में भी अपने अंतरंग को ईश्वर के सामने खोलना और पश्चाताप दिखाना महत्त्वपूर्ण है; - 2 समूएल 12:13 में नबियों के बीच आत्म-स्वीकृति और क्षमा का आश्वासन मिलता है, जो यहाँ सामूहिक पश्चाताप की तरह प्रकट होता है।
एक धार्मिक-आचरणात्मक आवेदन
सूक्ष्म cross-references और उनके संकेत
- वचन-उद्धार की पवित्रता: अनुशासनात्मक चेतावनी (यहश 7:1) — पाप के कारण समष्टि पर प्रतिकूल प्रभाव; यह verse इसे स्मरण कराता है।
- हराय-प्रत्याशा: 2 समוएल 12:13 — उत्तरदायित्व और क्षमा की संभावना; यह यहाँ यह दर्शाता है कि पश्चाताप के साथ उद्धार संभव है।
- सार्वजनिक पवित्रता: याकूब 4:8 का सिद्धांत कि पवित्रता के साथ ईश्वर के सम्मुख आना चाहिए; यह समूह-उत्साह बनाम पाप के विरुद्ध संघर्ष में मार्गदर्शक है।
सार: संदेश और संकल्प
यह verse एक साहचर्यपूर्ण सच को उजागर करता है—जब समुदाय खतरे में हो, तब विनम्रता, पश्चाताप और ईश्वर के निर्देशों का पालन ही उद्धार का रास्ता है। यह हमें याद दिलाता है कि परमेश्वर की कृपा हर समय उपलब्ध है, परन्तु वह सत्य-हृदय की विनम्रता और समुदाय की जवाबदेही के साथ प्रकट होती है।
सूक्ष्म उद्धरण: Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke के सार्वजनिक-डायरेक्ट टिप्पणियों से यहाँ समृद्ध विचार सम्मिश्रित हैं; यदि आवश्यकता हो तो उनके संक्षिप्त रूप में उल्लेखित विचारवार उद्धरण प्रस्तुत किए जा सकते हैं।
नोट
यह टिप्पणी HINIRV अनुवाद के भावार्थ को साधती है, ताकि पाठक को scripture के गहरे अर्थ, संदर्भ और व्यवहारिक अनुप्रयोग स्पष्ट हों।