Old Testament
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यहोशू 7:7 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
और यहोशू ने कहा, “हाय, प्रभु यहोवा, तू अपनी इस प्रजा को यरदन पार क्यों ले आया? क्या हमें एमोरियों के वश में करके नष्ट करने के लिये ले आया है? भला होता कि हम संतोष करके यरदन के उस पार रह जाते!
यहोशू 7:7 पद-दर-पद बाइबल टीका
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यहोशू 7:7 समानांतर पद और संबंधित वचन
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2 राजाओं 3:10 (HINIRV) »
और इस्राएल के राजा ने कहा, “हाय! यहोवा ने इन तीन राजाओं को इसलिए इकट्ठा किया, कि उनको मोआब के हाथ में कर दे।”

निर्गमन 17:3 (HINIRV) »
फिर वहाँ लोगों को पानी की प्यास लगी तब वे यह कहकर मूसा पर बुड़बुड़ाने लगे, “तू हमें बाल-बच्चों और पशुओं समेत प्यासा मार डालने के लिये मिस्र से क्यों ले आया है?”

निर्गमन 16:3 (HINIRV) »
और इस्राएली उनसे कहने लगे, “जब हम मिस्र देश में माँस की हाँडियों के पास बैठकर मनमाना भोजन खाते थे, तब यदि हम यहोवा के हाथ से* मार डाले भी जाते तो उत्तम वही था; पर तुम हमको इस जंगल में इसलिए निकाल ले आए हो कि इस सारे समाज को भूखा मार डालो।”
यहोशू 7:7 का संदर्भ और मौजूदा पाठ का परिचय
यह पाठ युद्ध से पहले का एक आकस्मिक मोड़ है। यरीदन के पार से देशवासी सभी महान युद्ध की तैयारी कर रहे थे, परन्तु यहोशू की सेना मन्नत-परकथाओं के बावजूद एक अप्रत्याशित संकट से जूझ उठी। यहोशू ने यह शब्द कहे: प्रभु, तू अपनी इस प्रजा को यरदन पार क्यों ले आया? एमोरियों के वश में करके नष्ट करने के लिये? भला होता कि हम संतोष करके यरदन के उस पार रह जाते!
यहोशू 7:7 से पाठ में ईश्वर और आस्था की शिक्षा
इस घोषणात्मक वक्तव्य में यहोशू लंबी सफलता की अपेक्षा में दुविधा और निराशा व्यक्त कर रहे हैं; वह यह पूछने लगते हैं कि क्या ईश्वर ने उन्हें योद्धाओं के लिए यरदन पार कराने का निर्देश केवल असफलता के लिए दिया है। लेकिन यह आवाज़ केवल भय का प्रमाण नहीं है, बल्कि एक साहसिक विश्लेषण भी है—क्या सचमुच परमेश्वर की योजना मानव क्षमता से आगे है, या अक्षमता के कारण बाधा है? इस प्रश्न से यहूदियों की आस्था और ईश्वर की पहचान पर उभरा एक अवसर है: केवल बाहरी विजय नहीं, बल्कि परमेश्वर की बहुमुखी योजना को समझना।
ईश्वर पर विश्वास और शब्दों की व्याख्या
यहोशू के शब्दों में दो प्रमुख भाव उभरते हैं: - स्मरण (याद रखना) कि परमेश्वर ने यरदन पार कराने की अनमोल योजना दी थी, परन्तु संभवतः वह समय नहीं था। - भयमोचन और आत्म-परख: क्या हमारा उद्देश्य सिर्फ सफल युद्ध है या परमेश्वर की सर्व व्यवस्था समझना?
महत्वपूर्ण शब्दावलियों के संकेत: - “हाय”: एक गम्भीर आह या असंतोष का स्वर। - “यरदन पार”: परमेश्वर की प्रतिज्ञाओं के मानचित्र पर आगे बढ़ना। - “एमोरियों के वश में करके नष्ट”: वे प्रतिशोध जो वे देश के भीतर स्वीकार करते हैं, उससे उत्पन्न होने वाले खतरे का चित्रण है।
अन्य प्राचीन टिप्पणीकारों से मिलते-जुलते विचार
एडम क्लार्क और एलबर्ट बार्न्स के दृष्टिकोण में यह बात उभरती है कि परमेश्वर के आदेशों के पीछे एक गुप्त उद्देश्य रहता है—मानवीय समझ से परे एक साथिक व्यवस्था। मैथ्यू हेन्री के अनुसार, यहूदियों के लिए यह समय संयम, विश्वास और परमेश्वर की पथ प्रदर्शकता को पहचाने का अवसर था। ये विचार मिलकर इस पाठ को एक ऐसी कथा बनाते हैं जिसमें भय और विश्वास के बीच संतुलन ज़रूरी है।
यह पाठ कैसे आगे बढ़ाता है
यहोशू 7:7 से संकेत मिलता है कि परमेश्वर के साथ सत्ता-चाल में संतुलित आस्था आवश्यक है; जब मनुष्य आस्था में चूक करते हैं—जैसे कि अना के बाद—तो परमेश्वर स्पष्ट निर्देशों के साथ पुनः मार्गदर्शन देता है। यह संघर्ष व्यक्तियों और समुदाय दोनों के लिए सुधार की दिशा दिखाता है: परमेश्वर के पवित्र उद्देश्य के अनुसार विनम्रता और निष्ठा बनाए रखना।
आज के संदर्भ में लागू होने वाले बिंदु
क्रॉस-रेफरेंसेस और उनकी छोटी-सी व्याख्या
1) येहश्यू 6–7 की कथा से यह स्पष्ट होता है कि परमेश्वर की योजना में बाधाओं के पीछे कुछ नयी सीखें छिपी होती हैं। इन अवसरों पर स्मरण करें कि कैसे परमेश्वर ने इस्राएलियों को संगठन और पवित्रता के मार्ग पर निकाला।
2) निर्गमन 14–15 के संदर्भ में,पानी पार करना और बाधाओं के बीच परमेश्वर की गाइडेंस का महत्व दोहराया गया है। यह बताता है कि विश्वास की दिशा सही हो तो रास्ते खुलते हैं।
3) प्रेरितों के कार्य 16 के भीतर कुछ कठिन परिस्थितियों में भी पवित्र आत्मा की निर्देशित यात्रा दिखती है; यह आज के समुदाय के लिए अनुभव-आधारित मार्गदर्शन है।
निष्कर्ष: यहोशू 7:7 एक ऐसी उक्ति है जो आस्था की परिक्षा दिखाती है—क्या हम स्थिति के अनुसार ईश्वर की योजना को समझते और मानते हैं? जवाब परमेश्वर के मार्गदर्शन में छिपा है: उसकी कृपा और नियोजन से ही संघर्ष पार होता है, और भय के बीच भी विश्वास की रोशनी बनी रहती है।
ध्यान दें: इस पाठ के संकीर्ण शब्दों के भीतर, परमेश्वर की पवित्रता, सहायता और मार्गदर्शन की गहरी अभिव्यक्ति है—जो आज भी विश्वासियों के लिए प्रेरणा है।