Old Testament
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यहोशू 7:25 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
तब यहोशू ने उससे कहा, “तूने हमें क्यों कष्ट दिया है? आज के दिन यहोवा तुझी को कष्ट देगा।” तब सब इस्राएलियों ने उस पर पथराव किया; और उनको आग में डालकर जलाया, और उनके ऊपर पत्थर डाल दिए।
यहोशू 7:25 पद-दर-पद बाइबल टीका
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यहोशू 7:25 समानांतर पद और संबंधित वचन
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यहोशू 6:18 (HINIRV) »
और तुम अर्पण की हुई वस्तुओं से सावधानी से अपने आप को अलग रखो, ऐसा न हो कि अर्पण की वस्तु ठहराकर बाद में उसी अर्पण की वस्तु में से कुछ ले लो, और इस प्रकार इस्राएली छावनी को भ्रष्ट करके उसे कष्ट में डाल दो।

1 इतिहास 2:7 (HINIRV) »
फिर कर्मी का पुत्र: आकार जो अर्पण की हुई वस्तु के विषय में विश्वासघात करके इस्राएलियों को कष्ट देनेवाला हुआ।

लैव्यव्यवस्था 20:2 (HINIRV) »
“इस्राएलियों से कह कि इस्राएलियों में से, या इस्राएलियों के बीच रहनेवाले परदेशियों में से, कोई क्यों न हो, जो अपनी कोई सन्तान मोलेक* को बलिदान करे वह निश्चय मार डाला जाए; और जनता उसको पथरवाह करे।
पद के तुरंत संदर्भ का सेटअप
यहोशू 7:25 इस्राएलियों को बताता है कि अचेतन परिश्रम और परिश्रम के बाद भी परमेश्वर की अनुमति से एक शाखा में विफलता कैसे सामने आती है। यहोशू ने ऐनाक के नगर इबर-यील के विरुद्ध युद्ध की हार के बाद एक सीधी साक्ष्य ली। अकसर यहोशू 7 के भागात वह कहाँ दोष मन्द्रों के कारण परिलक्षित होता है—यहूदा नहीं, बल्कि वह स्मरण कर रहे हैं कि चूंकि इस्राएल आक्रामक पाप से बंधा हुआ था, इसलिए हार का कारण भी पाप ही था। इस पाठ में एक व्यक्ति ने यह कहकर ईश्वर की निंदा की कि उसने गणना के अनुसार यह दंड दिया है, और उसी से गुस्सा सुलग उठा।
कथन का तात्पर्य: ईश्वर और विश्वास के बारे में
यह पाठ दिखाता है कि पाप का परिणाम स्पष्ट और तात्कालिक हो सकता है, और पेट्रीकरण के बिना भी यहोवा के पवित्र नियमों के उल्लंघन पर कठोर दंड उसी समय लागू होता है। साथ ही, यह कानून-आचरण और भय की गतिकी को भी उभारता है कि विश्वासियों को पंथ और आचार में ईमानदार रहना चाहिए, ताकि बिचौलिया अपराधों से बचा जा सके। परमेश्वर यहाँ न केवल न्यायपूर्ण हैं, बल्कि उनकी योग्यता और क्रोध भी स्पष्ट रूप से दिखाते हैं—जो पाप के प्रति अवज्ञा पर तुरन्त प्रभाव डालता है।
महत्त्वपूर्ण शब्द और छवियाँ
— कष्ट दिया: यहाँ प्रयुक्त क्रिया यह दर्शाती है कि पाप से पैदा उलझनों, कठिनाइयों और दंड की श्रृंखला कैसे प्रारम्भ होती है।
— आग में डालकर जलाया: पाप के विरुद्ध कड़ा दंड। यह दृश्य यह बताता है कि असफलता के परिणाम कितने तीखे हो सकते हैं जब पाप खुला और गहरा हो।
अन्य सुस्पष्ट पाठ (Cross-references)
इन संदर्भों के साथ यह दिखता है कि पाप के परिणाम समयानुसार और समुदाय के लिए भी सच होते हैं, और विश्वासियों के लिए सावधानी आवश्यक है।
प्रासंगिक वैचारिक विवेचना (Historical commentary snippets)
मैथ्यू हेनरी (public-domain) ने दिखाया है कि इस प्रकार का दंड यह दर्शाता है कि परमेश्वर अपने लोगों के पाप से चिढ़ते नहीं हैं, बल्कि वे उनके उद्धार के लिए पथ साफ रखते हैं। ऐल्बर्ट बार्न्स (public-domain) ने कहा है कि यह घटना पाप की गहराई का परिणाम दिखाती है—सूत्रों के अनुसार कानून-नियमों की अवहेलना अंततः समुदाय के भीतर विभाजन और भय पैदा कर देती है। एडम क्लार्क (public-domain) ने पंक्तियों के नैतिक प्रभाव पर बल दिया है कि पाप के कारण कष्ट आता है, परन्तु यह भी संकेत है कि परमेश्वर की शुद्धता और न्याय से दूर हटना जोखिमभरा है। (नोट: नीचे उद्धृत वाक्यांश, Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke के संकलित विश्लेषण से हैं, यदि उपलब्ध हों, ठीक-ठीक उद्धरण के छोटे अंश यहां रखें गए हैं.)
आज का अनुप्रयोग
कुल मिलाकर, यहोशू 7:25 पाप की निर्णायक चेतावनी देता है कि भय और विश्वास के बीच संतुलन बनाए रखना परमेश्वर के लोगों के लिए आवश्यक है।