Old Testament
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यहोशू 7:17 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
तब उसने यहूदा के परिवार को समीप किया, और जेरहवंशियों का कुल पकड़ा गया; फिर जेरहवंशियों के घराने के एक-एक पुरुष को समीप लाया, और जब्दी पकड़ा गया;
यहोशू 7:17 पद-दर-पद बाइबल टीका
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यहोशू 7:17 समानांतर पद और संबंधित वचन
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गिनती 26:20 (HINIRV) »
और यहूदा के जिन पुत्रों से उनके कुल निकले वे ये थे; अर्थात् शेला, जिससे शेलियों का कुल चला; और पेरेस जिससे पेरेसियों का कुल चला; और जेरह, जिससे जेरहियों का कुल चला।

उत्पत्ति 38:30 (HINIRV) »
पीछे उसका भाई जिसके हाथ में लाल सूत बन्धा था उत्पन्न हुआ, और उसका नाम जेरह रखा गया।

1 इतिहास 2:4 (HINIRV) »
यहूदा की बहू तामार से पेरेस और जेरह उत्पन्न हुए। यहूदा के कुल पाँच पुत्र हुए।
यहोशू 7:17 परिदृश्य और उसका महत्व
यह वचन यह दर्शाता है कि इजराएली सेना ने आरम्भिक दिनों में कमजोर पड़ते राष्ट्रों के विरुद्ध क्या साधारण और कठोर कदम उठाए। जिर्हवंशियों के घरानों के भीतर से एक-एक पुरुष को पकड़ना राज्य-युद्ध का हिस्सा था, ताकि शत्रु का सामर्थ्य तोड़ दिया जा सके और भविष्य के खतरे से देश सुरक्षित किया जा सके। यह संदेश महत्वपूर्ण है कि पाप-क्षेत्रों के विरुद्ध ईश्वर की योजना में पवित्रता और दायित्व की भूमिका कितनी स्पष्ट है।
पैमानेदार संदर्भ और मूल संदर्भ
वाक्यांश में स्पष्ट है कि यह युद्ध-कार्य एक व्यवस्थित अभियान का भाग था, जिसमें अलग-अलग घरानों को पहचानकर उन्हें पकड़ा गया। यहोशू ने इजराइल की सामूहिक सुरक्षा के लिए विधिवत कदम उठाए, ताकि बाहरी आक्रमण फिर न हो सके। मूल परिप्रेक्ष्य में यह एक सामाजिक-आधारिक परिवर्तन का क्षण है—जातीय-समुदायों के भीतर से गलत-आचरण या चिह्नित पाप को सख्ती से रोकना और नियंत्रण करना।
मुख्य संदेश
1) समुदाय की सुरक्षा के लिए लक्ष्मण-रेखा तय करना: शत्रु पंक्ति को कमजो़र कर देने के लिए यह कदम उठाए गए।
2) क्रमबद्ध न्याय: अन्य देशों के साथ-साथ अपनी भी आंतरिक संरचना में पाप की जकड़न को ढीला नहीं किया गया।
3) समन्वय और एकता: Yahweh के निर्देशों के अनुसार एक गठित कार्रवाई ने भीतर-बाहर दोनों स्तरों पर अनुशासन स्थापित किया।
युक्ति-चिन्ह और थीम
संदर्भ-सहयोगी उद्धरण (Cross-references)
1) यहोशू 6:21-26 — इड़्रियों के विरुद्ध निर्णायक कार्रवाई का स्वीकृत इतिहास; यह दिखाता है कि पवित्र स्थल और पवित्र अनुशासन एक साथ कैसे चलते हैं।
2) संत रेखा से इब्रानियों 10:29 (आधारभूत अनुशासन की चेतावनी) — पाप के प्रति कड़ी प्रतिक्रिया और अनुशासन की महत्ता का सिद्धांत प्रस्तुत करता है।
3) राजाओं 21:20-21 — समानांतर घटनाक्रम: पाप के विरुद्ध नीति और दायित्व-निष्ठता की कहानी यहाँ भी स्पष्ट है।
टीका-नोट: उपरोक्त संदर्भ सीधे टेक्स्ट उद्धरण नहीं देते; वे विषय-वस्तु को आगे स्पष्ट करते हैं कि पवित्रता, अनुशासन और सामूहिक सुरक्षा कैसे एक साथ चलते हैं।
देवotional reflection
इस वचन से हमें यह सीख मिलती है कि ईश्वर के नियम जब समाज के भीतर स्पष्ट रहते हैं, तब ही खतरे कम होते हैं। पर्याप्त अनुशासन और sektör के भीतर एकता से समुदाय सुरक्षित रहता है। यह अध्याय यह भी स्मरण कराता है कि पवित्रता का पालन केवल बाहरी उपाधियों से नहीं, बल्कि आंतरिक परिवर्तन और दयालु संचालनों से होता है। अपनी hayat में आप किन 'घरानों' या आंतरिक प्रेरणाओं के विरुद्ध व्यापक और सख्त कदम उठाते हैं, जिनसे परिवार और समाज को समृद्धि मिलती है?